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कौशाम्बी को ‘अंधा’ बना रही स्प्रिट

Mon, 30 Jan 2017 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Mon, 30 Jan 2017 12:50 AM IST
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 जिले में अवैध तरीके से गांव-गांव स्प्रिट बिक रही है। यह स्प्रिट लोगों की जान तो ले ही रही है, शौकीनों की आंख की रोशनी भी छीन रही है। तराई में दर्जनों ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्होंने इस नशे के बदले अपनी आंख गंवा दी है। स्प्रिट की यह खेप आबकारी विभाग की दुकानों सेे गांवों में पहुंचाई जा रही है। नशे की आगोश में तराई उड़ रही है और अधिकारी मौत के इस धंधे का तमाशा देख रहे हैं।
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   यमुना नदी किनारे बसे नंदा का पुरवा, मल्हीपुर, औधन गांव के अधिकांश लोग स्प्रिट पीते हैं। यह जानलेवा जहर वह गांव से ही खरीदकर पीते हैं। इन गांवों में स्प्रिट बेचने वाले सक्रिय हैं। इनके अलावा मोहिउद्दीनपुर, फकीराबाद, सरायअकिल, पुरखास, इछना, घोसिया, चित्तापुर, चंदूपुर अमरायन, भगवानपुर, बहुगरा आदि गांवों में भी स्प्रिट खुलेआम बेची जा रही है। स्प्रिट पीने से एक साल के भीतर नंदा का पुरवा गांव के राजेंद्र (40) पुत्र लल्लू निषाद, तितली(42) पुत्र हरकू, मुन्नू (50) पुत्र शारधा की मौत हो चुकी हैं। इसी गांव के सुग्गा पुत्र कुल्लू और बब्लू पुत्र छेदी की आंख खराब हो गई है। इनके अलावा गांव के युवा राजेश, सोहन, बद्री आदि की भी आंख की रोशनी कम हो गई है।
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केवट पुरवा गांव के तिहाई (45) पुत्र ललवा और मल्हीपुर निवासी हीरालाल पुत्र दिलसुख की मौत हो चुकी है। छह माह के अंदर औधन गांव के बिहारी निषाद, कंधई, हब्बू निषाद और गोकरन ने स्प्रिट के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। इस गांव के भी युवकों की आंख की रोशनी कम हो गई है। इसके बाद भी नशे की लत इस कदर सवार हो चुकी है कि वह इसको छोड़ नहीं पा रहे हैं। गांवों में स्प्रिट आबकारी की ही दुकानों से पहुंच रही है। स्प्रिट बेचने वाले दुकानदार बिना किसी पूछताछ के भारी मात्रा में दोगुने दाम पर स्प्रिट बेचते हैं।
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दस रुपये में बिकती है स्प्रिट
जानलेवा स्प्रिट दस रुपये गिलास बेची जाती है। एक लिटर स्प्रिट दो सौ रुपये की बिकती है। इसमें पांच लीटर पानी मिलाकर बेचा जाता है। खरीदने वाले भी स्प्रिट में अलग से पानी मिलाकर पीते हैं। नशे का यह धंधा तेजी से बढ़ने लगा है। अब तो यह कस्बों तक पहुंच गया है। मजदूर तबका देशी शराब खरीदने के बजाय सस्ता होने के कारण स्प्रिट पीने में दिलचस्पी दिखाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी
‘किसी भी सामान्य व्यक्ति को दुकान से स्प्रिट नहीं बेची जा सकती है। यदि दुकान से गांवों तक स्प्रिट पहुंचाई जा रही है तो यह गंभीर मामला है। दुकानों की जांच कराई जाएगी।’
वीपी मानिक, जिला आबकारी अधिकारी

जिले में हैं स्प्रिट की सरकारी दुकानें
जिले में पांच स्प्रिट की सरकारी दुकानें हैं। मंझनपुर, करारी, भरवारी, सिराथू और सरायअकिल में यह दुकानें संचालित हैं। एक दुकानदार लगभग 650 लीटर स्प्रिट माह में भर में गोदाम से उठाता है। दुकानों से यह स्प्रिट सीधे गांवों को पहुंच जाती है। जानलेवा कारोबार करने वाले भारी मात्रा में इनके यहां से चोरी छिपे स्प्रिट लेकर गांव पहुंचाते हैं।

सामान्य व्यक्ति को देने में है प्रतिबंध
स्प्रिट किसी भी सामान्य व्यक्ति को नहीं दी जा सकती है। इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। डॉक्टरों के पर्चे पर ही कोई व्यक्ति स्प्रिट खरीद सकता है। डॉक्टर अपने लेटर में बाकायदा इसका जिक्र करते हैं। स्प्रिट की आपूर्ति अस्पताल व लैब के अलावा किसी दूसरी जगह नहीं हो सकती है। इसके बाद भी धड़ल्ले से भारी मात्रा में स्प्रिट बेची जा रही है और अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं।


प्रधान की शिकायत पर हो चुकी है कार्रवाई
औधन गांव में छह माह के भीतर चार लोगाें की मौत स्प्रिट पीने से हो चुकी है। इससे नाराज ग्राम प्रधान ने इसकी शिकायत पिपरी थाने की पुलिस से की थी। इस मामले में पिपरी पुलिस ने औधन गांव के लवकुश, मैकन और रामबाबू के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया था। इसके बाद भी यह धंधा नहीं बंद हो सका।
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