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चूहे ने किया बिजली गुल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 16 May 2016 12:42 AM IST
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एक चूहे ने तीन फीडर के क्षेत्र में 15 घंटे तक के लिए अंधेरा पैदा कर दिया। फिलहाल क्षेत्र के कछुआ स्थित विद्युत सब स्टेशन में हुए अग्निकांड में जले उपकरण को विभाग ने ठीक कराकर आपूर्ति बहाल कर दी। पता चला है कि आउट गोइंग मशीन में चूहे के घुसने से तकनीकी खराबी आई थी। शनिवार की रात बिजली अपूर्ति बहाल होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि बिन बिजली 12 घंटे ग्रामीणों ने कैसे गुजारा यह उनका दिल ही जानता है।
बता दें कि शुक्रवार की रात विद्युत सब स्टेशन कछुआ में पैदा हुई तकनीकी खामी से आउट गोइंग मशीन में आग लग जाने से तकरीबन दो लाख के उपकरण जल गए थे। देर रात हुए इस हादसे के दौरान विभाग का एक भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। ड्यूटी पर मौजूद प्राइवेट कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डाल आग को नियंत्रित कर बुझा दिया था। आग लगन से क्षेत्र के अजुहा, टांडा और कल्यानपुर फीडर की सप्लाई 15 घंटे तक ठप रही। विभाग ने आनन-फानन में इलाहाबाद से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाकर जले हुए उपकरण को दुरुस्त करा सप्लाई बहाल करवा दी। इस दौरान पूरे दिन सप्लाई नहीं आने के साथ आसमान से बरस रही आग से आम जनता बेहाल रही। शहाजादपुर प्रधान पति दिलीप तिवारी ने बताया कि शनिवार को उन्हें टैंकर से गांव में पेयजल आपूर्ति कराना पड़ा। बिजली खराब होने से पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई थी। अवर अभियंता ज्ञानू मौर्या का कहना है कि मशीन के अंदर चूहा घुस गया था, जिससे विद्युत हादसा हो गया था।
करोड़ों रुपये की लागत से बना विद्युत सब स्टेशन कछुआ का संचालन विभागीय स्तर पर जुगाड़ पद्धति से कराया जा रहा है। एक तरह से कहा जाए कि यह सब स्टेशन भगवान भरोसे चल रहा है तो गलत नहीं होगा। यहां स्टेशन का संचालन तकनीकी जानकारों के हाथ होने के बजाए विभाग में बेगार कर अपनी रोजी-रोटी चलाने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से सौंप दिया गया है।
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क्षेत्र में बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए सरकार ने करोड़ाें रुपये की लागत से कछुआ में 33 केवीए का सब स्टेशन बनवा रखा है। शिकायत है कि सब स्टेशन में सात फीडर तो बना दिए गए हैं। पर, इसे विडंबना कहें या मनमानी की पराकाष्ठा कि यहां एक भी एसएसओ की तैनाती नहीं की गई है। एसएसओ के नाम पर जुगाड़ पद्धति का इस्तेमाल कर प्राइवेट लाइन मैन के तौर पर काम करने वाले राम नारायण, संजीव और महेश को बिजली सब स्टेशन की कमान सौंप दी गई है। यही तीनों सब स्टेशन चलाते हैं।
एक संविदाकर्मी की मानें तो विभाग उन्हें काम के बदले वेतन के नाम पर ठेकेदार से पैसा दिलाता है। उन लोगों को 17 माह से महज चार बार ही पैसा मिला है। विभाग के नाम पर उन लोगों को दिए जाने वाले चेक में ठेकेदार के हस्ताक्षर रहते हैं। प्राइवेट कर्मचारी बताते हैं कि वे लोग बेगार करने के लिए इसलिए भी मजबूर है क्याेंकि जब वे फॉल्ट ठीक करने जाते है तो खर्च के लिए चार पैसा मिल जाता है। इसी वे अपने परिवार का पेट पालते हैं। जो सरकारी लाइन मैन हैं वे घर बैठ सरकारी वेतन के साथ हमारी कमाई का आधा हिस्सा लेकर मौज उड़ाते रहते हैं। यह विद्युत विभाग की आंतरिक व्यवस्था है, सब जानते हैं।
विद्युत सब स्टेशन कछुआ में एसएसओ की तैनाती नहीं होने से लॉग बुक में दर्ज किया जाने वाला डाटा का अपडेट भी नहीं होता है। प्राईवेट कर्मचारियाेें का कहना है कि उन्हें लॉग बुक अपडेट करना नहीं आता है। वे साक्षर हैं शिक्षित नहीं। विद्युत विभाग के हर सब स्टेशन पर लॉग बुक होती है। विभाग के इस महत्वपूर्ण रिकार्ड में बिजली जाने आने की पल-पल की सूचना दर्ज की जाती है। पर, कछुआ सब स्टेशन पर लॉग बुक का मतलब कुछ भी नहीं है। इस बारे में विभाग के जिम्मेदाराें से जब सवाल किया जाता है तो वे कन्नी काटने लगते हैं।
नगर पंचायत करारी के तीनों वार्डों की बिजली आपूर्ति ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण सप्ताह भर से ठप है। इसके चलते वार्ड के उपभोक्ताओं का बुरा हाल है। उपभोक्ताओं ने मामले की शिकायत उपकेंद्र के जेई और एसडीओ से की। मगर सप्ताह भर का समय बीत जाने के बाद जिम्मेदार फुंका ट्रांसफार्मर बदल नहीं सके हैं।
नगर पंचायत करारी के कृष्ण नगर, अशोक नगर और किंग नगर में बिजली आपूर्ति देने के लिए चार सौ केवीए का ट्रांसफार्मर लगा है।
क्षमता से अधिक लोड होने के कारण यह ट्रांसफार्मर सप्ताह भर पहले फुंक गया। कस्बे के रमेश कुमार, नाजिर मोहम्मद, गुलाम अहमद आदि का आरोप है कि ट्रांसफार्मर फुंकने की शिकायत पावर हाउस के जेई और एसडीएम को दी गई है। सप्ताह भर का समय बीतने के बाद ट्रांसफार्मर बदलना तो दूर फुंका ट्रांसफार्मर उतारकर मरम्मत के लिए भी नहीं भेजा जा सका। उधर बिजली नहीं मिलने से भीषण गर्मी में तीनों वार्डों के उपभोक्ता उबल रहे हैं। ट्रांसफार्मर न बदले जाने को लेकर उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति नाराजगी है। मामले में जेई आशीष शुक्ल का कहना है कि ठेकेदार को ट्रांसफार्मर बदलने का निर्देश दिया गया है। स्टोर में ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होने की वजह से फुंका ट्रांसफार्मर नहीं उतारा गया। जैसे ही ट्रांसफार्मर मिलेगा, फुंका ट्रांसफार्मर उतारकर बदल दिया जाएगा।
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बता दें कि शुक्रवार की रात विद्युत सब स्टेशन कछुआ में पैदा हुई तकनीकी खामी से आउट गोइंग मशीन में आग लग जाने से तकरीबन दो लाख के उपकरण जल गए थे। देर रात हुए इस हादसे के दौरान विभाग का एक भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। ड्यूटी पर मौजूद प्राइवेट कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डाल आग को नियंत्रित कर बुझा दिया था। आग लगन से क्षेत्र के अजुहा, टांडा और कल्यानपुर फीडर की सप्लाई 15 घंटे तक ठप रही। विभाग ने आनन-फानन में इलाहाबाद से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाकर जले हुए उपकरण को दुरुस्त करा सप्लाई बहाल करवा दी। इस दौरान पूरे दिन सप्लाई नहीं आने के साथ आसमान से बरस रही आग से आम जनता बेहाल रही। शहाजादपुर प्रधान पति दिलीप तिवारी ने बताया कि शनिवार को उन्हें टैंकर से गांव में पेयजल आपूर्ति कराना पड़ा। बिजली खराब होने से पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई थी। अवर अभियंता ज्ञानू मौर्या का कहना है कि मशीन के अंदर चूहा घुस गया था, जिससे विद्युत हादसा हो गया था।
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करोड़ों रुपये की लागत से बना विद्युत सब स्टेशन कछुआ का संचालन विभागीय स्तर पर जुगाड़ पद्धति से कराया जा रहा है। एक तरह से कहा जाए कि यह सब स्टेशन भगवान भरोसे चल रहा है तो गलत नहीं होगा। यहां स्टेशन का संचालन तकनीकी जानकारों के हाथ होने के बजाए विभाग में बेगार कर अपनी रोजी-रोटी चलाने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से सौंप दिया गया है।
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क्षेत्र में बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए सरकार ने करोड़ाें रुपये की लागत से कछुआ में 33 केवीए का सब स्टेशन बनवा रखा है। शिकायत है कि सब स्टेशन में सात फीडर तो बना दिए गए हैं। पर, इसे विडंबना कहें या मनमानी की पराकाष्ठा कि यहां एक भी एसएसओ की तैनाती नहीं की गई है। एसएसओ के नाम पर जुगाड़ पद्धति का इस्तेमाल कर प्राइवेट लाइन मैन के तौर पर काम करने वाले राम नारायण, संजीव और महेश को बिजली सब स्टेशन की कमान सौंप दी गई है। यही तीनों सब स्टेशन चलाते हैं।
एक संविदाकर्मी की मानें तो विभाग उन्हें काम के बदले वेतन के नाम पर ठेकेदार से पैसा दिलाता है। उन लोगों को 17 माह से महज चार बार ही पैसा मिला है। विभाग के नाम पर उन लोगों को दिए जाने वाले चेक में ठेकेदार के हस्ताक्षर रहते हैं। प्राइवेट कर्मचारी बताते हैं कि वे लोग बेगार करने के लिए इसलिए भी मजबूर है क्याेंकि जब वे फॉल्ट ठीक करने जाते है तो खर्च के लिए चार पैसा मिल जाता है। इसी वे अपने परिवार का पेट पालते हैं। जो सरकारी लाइन मैन हैं वे घर बैठ सरकारी वेतन के साथ हमारी कमाई का आधा हिस्सा लेकर मौज उड़ाते रहते हैं। यह विद्युत विभाग की आंतरिक व्यवस्था है, सब जानते हैं।
विद्युत सब स्टेशन कछुआ में एसएसओ की तैनाती नहीं होने से लॉग बुक में दर्ज किया जाने वाला डाटा का अपडेट भी नहीं होता है। प्राईवेट कर्मचारियाेें का कहना है कि उन्हें लॉग बुक अपडेट करना नहीं आता है। वे साक्षर हैं शिक्षित नहीं। विद्युत विभाग के हर सब स्टेशन पर लॉग बुक होती है। विभाग के इस महत्वपूर्ण रिकार्ड में बिजली जाने आने की पल-पल की सूचना दर्ज की जाती है। पर, कछुआ सब स्टेशन पर लॉग बुक का मतलब कुछ भी नहीं है। इस बारे में विभाग के जिम्मेदाराें से जब सवाल किया जाता है तो वे कन्नी काटने लगते हैं।
नगर पंचायत करारी के तीनों वार्डों की बिजली आपूर्ति ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण सप्ताह भर से ठप है। इसके चलते वार्ड के उपभोक्ताओं का बुरा हाल है। उपभोक्ताओं ने मामले की शिकायत उपकेंद्र के जेई और एसडीओ से की। मगर सप्ताह भर का समय बीत जाने के बाद जिम्मेदार फुंका ट्रांसफार्मर बदल नहीं सके हैं।
नगर पंचायत करारी के कृष्ण नगर, अशोक नगर और किंग नगर में बिजली आपूर्ति देने के लिए चार सौ केवीए का ट्रांसफार्मर लगा है।
क्षमता से अधिक लोड होने के कारण यह ट्रांसफार्मर सप्ताह भर पहले फुंक गया। कस्बे के रमेश कुमार, नाजिर मोहम्मद, गुलाम अहमद आदि का आरोप है कि ट्रांसफार्मर फुंकने की शिकायत पावर हाउस के जेई और एसडीएम को दी गई है। सप्ताह भर का समय बीतने के बाद ट्रांसफार्मर बदलना तो दूर फुंका ट्रांसफार्मर उतारकर मरम्मत के लिए भी नहीं भेजा जा सका। उधर बिजली नहीं मिलने से भीषण गर्मी में तीनों वार्डों के उपभोक्ता उबल रहे हैं। ट्रांसफार्मर न बदले जाने को लेकर उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति नाराजगी है। मामले में जेई आशीष शुक्ल का कहना है कि ठेकेदार को ट्रांसफार्मर बदलने का निर्देश दिया गया है। स्टोर में ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होने की वजह से फुंका ट्रांसफार्मर नहीं उतारा गया। जैसे ही ट्रांसफार्मर मिलेगा, फुंका ट्रांसफार्मर उतारकर बदल दिया जाएगा।