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योगी जी! एक थी रचना, एक थी संजू
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:31 AM IST
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योगी राज में भी अबला छात्राएं किस्सा-कहानियां बन रही हैं। न एंटी रोमियो काम आ रहा है, न ही 100 डॉयल पुलिस। 15 दिन के भीतर छेड़खानी की शिकार हुई दो छात्राओं ने अपनी जान देकर पुलिस के इकबाल को झकझोर का रख दिया है। पहले रचना, अब संजू। इन्होंने अपनी जान देकर पुलिस महकमे को तो हिलाया ही है, शासन की बनाई रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। आबरू से खिलवाड़ होने पर दोनों छात्राओं ने मौत को गले लगाया, आरोपी जेल भेजे गए, लेकिन क्या यही इंसाफ है? यह सवाल छात्राओं के मां-बाप के साथ हर वह शख्स पूछ रहा है, जिनकी बेटियां प्रतिदिन घरों से पढ़ने के लिए निकलती हैं।
सैनी कोतवाली के ख्वाजकीमई की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा संजू देवी बेकसूर थी, लेकिन फिर भी उसे अपने हाथों ही अपनी जान गंवानी पड़ी। छेड़खानी के बाद समाज के तानो से बचने के लिए उसे ऐसा करना पड़ा। बेखौफ पूर्व प्रधान के बेटे मुनील, गोरेलाल व अखिलेश ने उसके साथ सोमवार की शाम को छेड़खानी की थी। विरोध करने पर भाई जैसा हश्र करने की चेतावनी दी थी। भाई जैसा हश्र करने की चेतावनी से वह डरी सहमी थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मुख्य आरोपी मुनील ने आठ साल पहले उसके चचेरे भाई से कुकर्म किया था। यही कारण था कि आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद भी वह खौफ से बाहर नहीं निकल सकी और जहर खाकर मंगलवार को जान दे दी।
इसके पहले 25 मार्च को पिपरी के गांजा गांव की रचना सिंह बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ने छेड़खानी के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अब यह दोनों जिंदा नहीं है। इनके घरों में मातम पसरा हुआ है। 15 दिन के भीतर दो छात्राओं के आत्महत्या करने से जिले के लोग सहम गए हैं। बढ़ती घटनाओं ने लोगों को चिंतित कर दिया है। भाजपा सरकार से लोगों की उम्मीद बढ़ी थी, घटनाओं पर रोक लगेगी, लेकिन सबकुछ इसके उलट हो रहा है। इंसाफ के लिए लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। हर वह शख्स इन घटनाओं के बाद डरा-सहमा है, जिनके घरों की बेटियां पढ़ने-लिखने के लिए प्रतिदिन दहलीज लांघती हैं।
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संजू की मौत से गांव में तनातनी का माहौल
सैनी कोतवाली के ख्वाजकीमई गांव की छात्रा संजू देवी के साथ हुई छेड़खानी से लोगों में गुस्सा था। मंगलवार को संजू ने आत्महत्या कर ली तो लोगों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गांव में तनातनी का माहौल बना है। आरोपियों के परिजन भी संजू की मौत के बाद घर छोड़कर गायब हो गए। आरोपियों के घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
ख्वाजकीमई गांव की संजू देवी के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। मां प्रभावती दहाड़े मारकर रो रही है। जिला अस्पताल में आए नात-रिश्तेदार भी रो रहे थे। संजू की मौत पर लोगों में गुस्सा था। यही हाल गांव वालों का भी था। आरोपियों के परिजनों को जैसे ही पता चला कि संजू की मौत हो गई है तो उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। आरोपियों के घरों में सन्नाटा पसर गया था। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए गांव में पुलिस भी तैनात कर दी गई थी।
शव पहुंचने पर मचा हाहाकार
छात्रा संजू देवी का शव पोस्टमार्टम के बाद देर शाम गांव पहुंचा तो हाहाकार मच गया। परिजन शव पर दहाड़े मारकर रो रहे थे। नात-रिश्तेदार भी इस घटना पर गमजदा थे। गम व गुस्से के बीच शव का अंतिम संस्कार किया गया। घटना से संजू की बहन मंजू, अंजू, गुड़िया, भाई रोहन, नन्हें, पिता इंद्रपाल व मां प्रभावती का रो-रो कर बुरा हाल है।
शातिर है मुख्य आरोपी मुनील
ख्वाजकीमई गांव की पूर्व प्रधान रजनी देवी का बेटा मुनील शातिर है। मुनील ने आठ साल पहले छात्रा संजू देवी के चचेरे भाई के साथ कुकर्म किया था। इस मामले में सैनी कोतवाली पुलिस ने मुनील को जेल भेजा था। उस वक्त मुनील नाबालिग था। जेल से रिहा होने पर वह घर आया तो उसकी आदतों में सुधार नहीं आया। वह दिन भर गांव के अवारागर्दी करने वाले युवकों के साथ घूमता-टलहता रहता था। वह नशे का भी आदी था। नशे के चक्कर में उसका कई लोगों से विवाद भी हो चुका था। मामूली बात पर वह मारपीट पर आमादा हो जाता था।
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सैनी कोतवाली के ख्वाजकीमई की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा संजू देवी बेकसूर थी, लेकिन फिर भी उसे अपने हाथों ही अपनी जान गंवानी पड़ी। छेड़खानी के बाद समाज के तानो से बचने के लिए उसे ऐसा करना पड़ा। बेखौफ पूर्व प्रधान के बेटे मुनील, गोरेलाल व अखिलेश ने उसके साथ सोमवार की शाम को छेड़खानी की थी। विरोध करने पर भाई जैसा हश्र करने की चेतावनी दी थी। भाई जैसा हश्र करने की चेतावनी से वह डरी सहमी थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मुख्य आरोपी मुनील ने आठ साल पहले उसके चचेरे भाई से कुकर्म किया था। यही कारण था कि आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद भी वह खौफ से बाहर नहीं निकल सकी और जहर खाकर मंगलवार को जान दे दी।
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इसके पहले 25 मार्च को पिपरी के गांजा गांव की रचना सिंह बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ने छेड़खानी के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अब यह दोनों जिंदा नहीं है। इनके घरों में मातम पसरा हुआ है। 15 दिन के भीतर दो छात्राओं के आत्महत्या करने से जिले के लोग सहम गए हैं। बढ़ती घटनाओं ने लोगों को चिंतित कर दिया है। भाजपा सरकार से लोगों की उम्मीद बढ़ी थी, घटनाओं पर रोक लगेगी, लेकिन सबकुछ इसके उलट हो रहा है। इंसाफ के लिए लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। हर वह शख्स इन घटनाओं के बाद डरा-सहमा है, जिनके घरों की बेटियां पढ़ने-लिखने के लिए प्रतिदिन दहलीज लांघती हैं।
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संजू की मौत से गांव में तनातनी का माहौल
सैनी कोतवाली के ख्वाजकीमई गांव की छात्रा संजू देवी के साथ हुई छेड़खानी से लोगों में गुस्सा था। मंगलवार को संजू ने आत्महत्या कर ली तो लोगों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गांव में तनातनी का माहौल बना है। आरोपियों के परिजन भी संजू की मौत के बाद घर छोड़कर गायब हो गए। आरोपियों के घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
ख्वाजकीमई गांव की संजू देवी के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। मां प्रभावती दहाड़े मारकर रो रही है। जिला अस्पताल में आए नात-रिश्तेदार भी रो रहे थे। संजू की मौत पर लोगों में गुस्सा था। यही हाल गांव वालों का भी था। आरोपियों के परिजनों को जैसे ही पता चला कि संजू की मौत हो गई है तो उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। आरोपियों के घरों में सन्नाटा पसर गया था। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए गांव में पुलिस भी तैनात कर दी गई थी।
शव पहुंचने पर मचा हाहाकार
छात्रा संजू देवी का शव पोस्टमार्टम के बाद देर शाम गांव पहुंचा तो हाहाकार मच गया। परिजन शव पर दहाड़े मारकर रो रहे थे। नात-रिश्तेदार भी इस घटना पर गमजदा थे। गम व गुस्से के बीच शव का अंतिम संस्कार किया गया। घटना से संजू की बहन मंजू, अंजू, गुड़िया, भाई रोहन, नन्हें, पिता इंद्रपाल व मां प्रभावती का रो-रो कर बुरा हाल है।
शातिर है मुख्य आरोपी मुनील
ख्वाजकीमई गांव की पूर्व प्रधान रजनी देवी का बेटा मुनील शातिर है। मुनील ने आठ साल पहले छात्रा संजू देवी के चचेरे भाई के साथ कुकर्म किया था। इस मामले में सैनी कोतवाली पुलिस ने मुनील को जेल भेजा था। उस वक्त मुनील नाबालिग था। जेल से रिहा होने पर वह घर आया तो उसकी आदतों में सुधार नहीं आया। वह दिन भर गांव के अवारागर्दी करने वाले युवकों के साथ घूमता-टलहता रहता था। वह नशे का भी आदी था। नशे के चक्कर में उसका कई लोगों से विवाद भी हो चुका था। मामूली बात पर वह मारपीट पर आमादा हो जाता था।