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हीटस्ट्रोक ने फिर ली आधा दर्जन मोरों की जान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 15 May 2017 01:17 AM IST
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भीषण गर्मी के चलते राष्ट्रीय पक्षी मोर के मरने का सिलसिला जारी है। कोखराज के चंदवारीबाग में रविवार को आधा दर्जन मोरों के शव मिले। प्यास के कारण मोरों की मौत हुई है। जिले में अब तक 20 से ज्यादा मोरों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी वन विभाग मोरों को बचाने की कोई पहल नहीं कर रहा है। स्वयं सेवी संस्थाएं भी तमाशा देख रही हैं।
कोखराज के चंदवारी बाग में रविवार दोपहर लोगों ने आधा दर्जन मोरों के शव देखे गए। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने वन विभाग के कर्मियों को सूचना दी। वे मौके पर आए और जांच करने के बाद शव दफनवा दिए। बता दें कि बाग में लगभग सप्ताह भर पहले नौ मोरों के शव मिले थे।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि मोरों को जहर देकर मारा गया है। अज्ञात तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पहले वन विभाग ने तस्करों का खेल बताकर पल्ला झाड़ लिया था लेकिन अब मोरों की मौत हीटस्ट्रोक से हो रही है। चंदवारी बाग के अलावा चरवा इलाके में भी मोरों की मौत हो चुकी है। लगातार राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत होने से लोगों में नाराजगी है। पानी न मिलने के कारण प्यास से तड़प कर मोर दम तोड़ रहे हैं। वन विभाग ने प्यासे मोरों को पानी पिलाने का अब तक कोई इंतजाम नहीं किया है। इससे मोरों पर खतरा मंडराने लगा है।
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‘मोरों के मरने की सूचना मिली है। इस मामले में वन विभाग से जवाब मांगा गया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि जहां बड़ी संख्या में मोर पाए जाते हैं, वहां वे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। यदि इसमें लापरवाही हुई तो कार्रवाई की जाएगी।’
अखंड प्रताप सिंह
जिलाधिकारी कौशाम्बी
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कोखराज के चंदवारी बाग में रविवार दोपहर लोगों ने आधा दर्जन मोरों के शव देखे गए। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने वन विभाग के कर्मियों को सूचना दी। वे मौके पर आए और जांच करने के बाद शव दफनवा दिए। बता दें कि बाग में लगभग सप्ताह भर पहले नौ मोरों के शव मिले थे।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि मोरों को जहर देकर मारा गया है। अज्ञात तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पहले वन विभाग ने तस्करों का खेल बताकर पल्ला झाड़ लिया था लेकिन अब मोरों की मौत हीटस्ट्रोक से हो रही है। चंदवारी बाग के अलावा चरवा इलाके में भी मोरों की मौत हो चुकी है। लगातार राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत होने से लोगों में नाराजगी है। पानी न मिलने के कारण प्यास से तड़प कर मोर दम तोड़ रहे हैं। वन विभाग ने प्यासे मोरों को पानी पिलाने का अब तक कोई इंतजाम नहीं किया है। इससे मोरों पर खतरा मंडराने लगा है।
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‘मोरों के मरने की सूचना मिली है। इस मामले में वन विभाग से जवाब मांगा गया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि जहां बड़ी संख्या में मोर पाए जाते हैं, वहां वे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। यदि इसमें लापरवाही हुई तो कार्रवाई की जाएगी।’
अखंड प्रताप सिंह
जिलाधिकारी कौशाम्बी