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कौशाम्बी में वृद्धा का बेरहमी से कत्ल
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 17 Jan 2015 12:33 AM IST
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सिराथू/पइंसा। पशुशाला के कोठरी में सो रही परईखागल (मोहब्बतपुर पइंसा) गांव की वृद्धा सूरतकली (75) की बृहस्पतिवार की रात हत्या कर दी गई। कोठरी की दीवार तोड़कर घुसे हत्यारों ने उसे पीट-पीटकर बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतारा है। घटना को अंजाम देने के कातिल भाग निकले। घटना की जानकारी परिजन और ग्रामीणों को सुबह हुई। वृद्धा को किसने और क्यों मारा। परिजन भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। मौके पर आई पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मोहब्बतपुर पइंसा कोतवाली क्षेत्र के परई खागल (भैरमपुर) गांव की रहने वाली सूरतकली (75) स्वर्गीय रामपाल के दो बेटे हैं। दोनों बेटे हरिश्चंद्र और रामलखन गांव के भीतर बने मकान में रहते हैं। जबकि वृद्धा गांव के बाहर बनी पशुशाला की कोठरी में अकेली रहती थी। परिजन बताते हैं कि वह कभी-कभार ही घर आती थी। उसका खाना भी पशुशाला में ही पहुंचा दिया जाता था। इधर, शुक्रवार को सुबह करीब 10 बजे जब बड़े बेटे हरिश्चंद्र का लड़का दादी के लिए खाना लेकर गया तो पशुशाला की कोठरी का दरवाजा भीतर से बंद था।
कई बार आवाज देने के बाद भी दादी ने दरवाजा नहीं खुला। उसने घर आकर परिजनों को इसकी जानकारी दी। इससे परेशान परिजन और गांववाले आए। ग्रामीणों ने प्रयास करके कोठरी की कुंडी तोड़ी, तो भीतर का मंजर देख सभी के होश उड़ गए। भीतर वृद्धा का रक्तरंजित शव चारपाई से बंधा हुआ था। साथ ही कोठरी के पीछे की दीवार टूटी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वृद्धा के पर चेहरे और पूरे शरीर में चोट के निशान थे।
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इससे लगता है कि किसी ने बड़ी ही बेरहमी से पीट-पीटकर उसे मौत के घाट उतारा है। मारने के बाद हत्यारे दीवार तोड़कर भाग निकले। हत्या की खबर लगते ही मौके पर पइंसा कोतवाली पुलिस भी आई। जांच के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसओ रामआसरे ने बताया कि हत्या किसने और किस रंजिश में की। यह घरवाले भी नहीं बता पा रहे हैं। गांववालों के मुताबिक भी इस परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं। ऐसे में परिजन और ग्रामीण यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर किसने और क्यों वृद्धा की इतनी बेरहमी से हत्या की है।
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मोहब्बतपुर पइंसा कोतवाली क्षेत्र के परई खागल (भैरमपुर) गांव की रहने वाली सूरतकली (75) स्वर्गीय रामपाल के दो बेटे हैं। दोनों बेटे हरिश्चंद्र और रामलखन गांव के भीतर बने मकान में रहते हैं। जबकि वृद्धा गांव के बाहर बनी पशुशाला की कोठरी में अकेली रहती थी। परिजन बताते हैं कि वह कभी-कभार ही घर आती थी। उसका खाना भी पशुशाला में ही पहुंचा दिया जाता था। इधर, शुक्रवार को सुबह करीब 10 बजे जब बड़े बेटे हरिश्चंद्र का लड़का दादी के लिए खाना लेकर गया तो पशुशाला की कोठरी का दरवाजा भीतर से बंद था।
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कई बार आवाज देने के बाद भी दादी ने दरवाजा नहीं खुला। उसने घर आकर परिजनों को इसकी जानकारी दी। इससे परेशान परिजन और गांववाले आए। ग्रामीणों ने प्रयास करके कोठरी की कुंडी तोड़ी, तो भीतर का मंजर देख सभी के होश उड़ गए। भीतर वृद्धा का रक्तरंजित शव चारपाई से बंधा हुआ था। साथ ही कोठरी के पीछे की दीवार टूटी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वृद्धा के पर चेहरे और पूरे शरीर में चोट के निशान थे।
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इससे लगता है कि किसी ने बड़ी ही बेरहमी से पीट-पीटकर उसे मौत के घाट उतारा है। मारने के बाद हत्यारे दीवार तोड़कर भाग निकले। हत्या की खबर लगते ही मौके पर पइंसा कोतवाली पुलिस भी आई। जांच के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसओ रामआसरे ने बताया कि हत्या किसने और किस रंजिश में की। यह घरवाले भी नहीं बता पा रहे हैं। गांववालों के मुताबिक भी इस परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं। ऐसे में परिजन और ग्रामीण यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर किसने और क्यों वृद्धा की इतनी बेरहमी से हत्या की है।