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रुपया न मिलने पर रो पड़ी वृद्धा
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 02 Dec 2016 12:03 AM IST
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बीओबी की शाखा अझुवा में 80 वर्ष की एक वृद्धा पेंशन के खाते से रुपया निकालने आई थी, लेकिन उसकी किसी ने मदद नहीं की। रुपया न मिलने पर बैंक के अंदर ही वृद्धा फफक कर रो पड़ी। इससे लोगों ने बैंक के गार्ड से रुपया दिलाने को कहा। इसके बावजूद गार्ड टालमटोल करता रहा।
नांदेमई गांव की हफीजुन निशां का खाता बैंक ऑफ बड़ौदा अझुवा में है। इस खाते में वृद्धा पेंशन आती है। ठंड व कोहरा होने के बाद भी वृद्धा गांव के एक व्यक्ति के साथ साइकिल पर बैठकर रुपया लेने आई थी। बैंक में घंटों बैठने के बाद भी वृद्धा को रुपया नहीं मिला। इस दौरान उसने बैंक कर्मियों से तमाम मिन्नते कीं। दवा व खाने-पीने की समस्या भी बताई, लेकिन कोई नहीं पसीजा। इस पर वृद्धा रो पड़ी। इसके बाद लोगों ने वृद्धा को रुपया दिलाने का प्रयास किया। बैंक गार्ड पर दबाव भी बनाया, लेकिन बात नहीं बन सकी।
मांगे दस हजार, बैंक ने दिया दो हजार
आरबीआई ने बैंक खाते से रकम निकालने की लिमिट खत्म कर दी है। यह प्रतिबंध केवल जन-धन खाता पर ही लागू है। इसके बाद भी ग्राहकों को आहरण में डाली गई रकम के हिसाब से रुपया नहीं मिल रहा है। ग्राहक दस हजार मांगता है तो उसे दो हजार रुपया दिया जा रहा है। इतना ही नहीं भीड़ बढ़ने के साथ लिमिट और कम कर दी जाती है।
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जिले में कैश न होने की वजह से बैंकर्स अपने नियम कानून के हिसाब से स्थिति को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं। ये नकदी का ही संकट है कि आरबीआई के छूट देने के बाद भी लोगों को मुंह मांगी रकम बैंक से नहीं मिल रही है। जिले के अधिकांश बैंकों में गुुरुवार को दो से तीन लाख कैश मिला। यह रकम देखते ही देखते खत्म हुई। भीड़ को देखने के बाद बैंकर्स ने दो से एक हजार रुपया देने की लिमिट तय कर वितरण किया। कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें घर के खर्च व आटा दाल की जरूरत थी, वह रुपया लेकर गए, लेकिन जिन्हें मोटी रकम की आवश्यकता थी, उन्हें वापस ही लौटना पड़ा। इससे लोगों में जबर्दस्त नाराजगी रही। बैंक कर्मियों की मजबूरियों को समझ लोग वापस आए।
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नांदेमई गांव की हफीजुन निशां का खाता बैंक ऑफ बड़ौदा अझुवा में है। इस खाते में वृद्धा पेंशन आती है। ठंड व कोहरा होने के बाद भी वृद्धा गांव के एक व्यक्ति के साथ साइकिल पर बैठकर रुपया लेने आई थी। बैंक में घंटों बैठने के बाद भी वृद्धा को रुपया नहीं मिला। इस दौरान उसने बैंक कर्मियों से तमाम मिन्नते कीं। दवा व खाने-पीने की समस्या भी बताई, लेकिन कोई नहीं पसीजा। इस पर वृद्धा रो पड़ी। इसके बाद लोगों ने वृद्धा को रुपया दिलाने का प्रयास किया। बैंक गार्ड पर दबाव भी बनाया, लेकिन बात नहीं बन सकी।
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मांगे दस हजार, बैंक ने दिया दो हजार
आरबीआई ने बैंक खाते से रकम निकालने की लिमिट खत्म कर दी है। यह प्रतिबंध केवल जन-धन खाता पर ही लागू है। इसके बाद भी ग्राहकों को आहरण में डाली गई रकम के हिसाब से रुपया नहीं मिल रहा है। ग्राहक दस हजार मांगता है तो उसे दो हजार रुपया दिया जा रहा है। इतना ही नहीं भीड़ बढ़ने के साथ लिमिट और कम कर दी जाती है।
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जिले में कैश न होने की वजह से बैंकर्स अपने नियम कानून के हिसाब से स्थिति को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं। ये नकदी का ही संकट है कि आरबीआई के छूट देने के बाद भी लोगों को मुंह मांगी रकम बैंक से नहीं मिल रही है। जिले के अधिकांश बैंकों में गुुरुवार को दो से तीन लाख कैश मिला। यह रकम देखते ही देखते खत्म हुई। भीड़ को देखने के बाद बैंकर्स ने दो से एक हजार रुपया देने की लिमिट तय कर वितरण किया। कुछ लोग ऐसे थे, जिन्हें घर के खर्च व आटा दाल की जरूरत थी, वह रुपया लेकर गए, लेकिन जिन्हें मोटी रकम की आवश्यकता थी, उन्हें वापस ही लौटना पड़ा। इससे लोगों में जबर्दस्त नाराजगी रही। बैंक कर्मियों की मजबूरियों को समझ लोग वापस आए।