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बालू माफिया ने तराई में डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 29 Sep 2017 01:45 AM IST
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बारिश खत्म होते ही पंजाब के शातिर खनन माफिया ने अपनी टीम के साथ तराई में एक बार फिर डेरा डाल दिया है। दूसरों के नाम से ठेका लेकर खनन कराने वाला यह माफिया सीबीआई के भी रडार पर है। माफिया के आने से तराई में एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। मेजा विधायक नीलम करवरिया से चल रहा रास्ते का विवाद माफिया के आने से एक बार फिर सुर्खियों में आ सकता है।
बारिश शुरू होते ही जिले के बालू घाट बंद हो गए थे। अब बारिश खत्म हो चुकी है। बालू घाट शुरू होने वाले हैं। नए सिरे से ठेकेदार रास्ता बनवाने में जुटे हैं। घाटों पर चहलकदमी बढ़ चुकी है। इसी बीच पंजाब के तरणतारण के खनन माफिया ने इंट्री मार दी है। खनन माफिया के आते ही मेजा विधायक नीलम करवरिया के समर्थक एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस माफिया से नीलम करवरिया की भूमि पर कब्जे का विवाद है। बारिश से पहले विधायक की जमीन पर कब्जा कर बालू की निकासी कराई गई थी। इसको लेकर शिकायत भी हुई थी। शासन स्तर के भी अधिकारियों के संज्ञान में मामला आया था। मुख्य सचिव से शिकायत होने पर मामले की नए सिरे से जांच कराई जा रही है।
रास्ते का यह विवाद अबकी बार तूल पकड़ सकता है। इसको लेकर प्रशासन भी सक्रिय है। यही कारण है कि खनन माफिया इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठा रहा है। इसके लिए वह स्थानीय लोगों से साठगांठ भी कर रहा है। अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए माफिया ने अबकी जिला मुख्यालय को अपना ठौर ठिकाना नहीं बनाया बल्कि पश्चिमशरीरा में डेरा जमाया है। यहीं से वह अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है।
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माफिया के खिलाफ हो चुकी है रिपोर्ट
सपा सरकार में पंजाब के खनन माफिया के खिलाफ महेवाघाट में मामला भी दर्ज हो चुका है। धोखाधड़ी समेत कई अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गई थी। बाद में सत्तादल के कुछ नेताओं ने इस मामले में एफआर लगवा दी थी। इसके बाद माफिया के हौसले बुलंद हो गए थे। बालू कारोबारियों का कहना है कि जब से यह माफिया जिले में आया है तराई की व्यवस्था तहस-नहस करके रख दी है।
घाटों की निगरानी के लिए बुलाए जा रहे असलहाधारी
बालू घाटों की निगरानी के लिए खनन माफिया ने पश्चिमशरीरा में डेरा डालते ही असलहाधारी युवकों को चार से छह हजार रुपये में काम देना शुरू कर दिया है। वरीयता पर युवाओं को रखा जा रहा है। इनमें से अधिकांश असलहाधारी युवा माफिया के साथ चलेंगे। इनके लिए किराए की गाड़ी की भी व्यवस्था की जा रही है। माना जा रहा है कि रास्ते के विवाद को लेकर यह तैयारी हो रही है।
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बारिश शुरू होते ही जिले के बालू घाट बंद हो गए थे। अब बारिश खत्म हो चुकी है। बालू घाट शुरू होने वाले हैं। नए सिरे से ठेकेदार रास्ता बनवाने में जुटे हैं। घाटों पर चहलकदमी बढ़ चुकी है। इसी बीच पंजाब के तरणतारण के खनन माफिया ने इंट्री मार दी है। खनन माफिया के आते ही मेजा विधायक नीलम करवरिया के समर्थक एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस माफिया से नीलम करवरिया की भूमि पर कब्जे का विवाद है। बारिश से पहले विधायक की जमीन पर कब्जा कर बालू की निकासी कराई गई थी। इसको लेकर शिकायत भी हुई थी। शासन स्तर के भी अधिकारियों के संज्ञान में मामला आया था। मुख्य सचिव से शिकायत होने पर मामले की नए सिरे से जांच कराई जा रही है।
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रास्ते का यह विवाद अबकी बार तूल पकड़ सकता है। इसको लेकर प्रशासन भी सक्रिय है। यही कारण है कि खनन माफिया इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठा रहा है। इसके लिए वह स्थानीय लोगों से साठगांठ भी कर रहा है। अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए माफिया ने अबकी जिला मुख्यालय को अपना ठौर ठिकाना नहीं बनाया बल्कि पश्चिमशरीरा में डेरा जमाया है। यहीं से वह अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है।
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माफिया के खिलाफ हो चुकी है रिपोर्ट
सपा सरकार में पंजाब के खनन माफिया के खिलाफ महेवाघाट में मामला भी दर्ज हो चुका है। धोखाधड़ी समेत कई अन्य धाराओं में रिपोर्ट लिखी गई थी। बाद में सत्तादल के कुछ नेताओं ने इस मामले में एफआर लगवा दी थी। इसके बाद माफिया के हौसले बुलंद हो गए थे। बालू कारोबारियों का कहना है कि जब से यह माफिया जिले में आया है तराई की व्यवस्था तहस-नहस करके रख दी है।
घाटों की निगरानी के लिए बुलाए जा रहे असलहाधारी
बालू घाटों की निगरानी के लिए खनन माफिया ने पश्चिमशरीरा में डेरा डालते ही असलहाधारी युवकों को चार से छह हजार रुपये में काम देना शुरू कर दिया है। वरीयता पर युवाओं को रखा जा रहा है। इनमें से अधिकांश असलहाधारी युवा माफिया के साथ चलेंगे। इनके लिए किराए की गाड़ी की भी व्यवस्था की जा रही है। माना जा रहा है कि रास्ते के विवाद को लेकर यह तैयारी हो रही है।