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डीएम, सीडीओ के गोद लिए गांव में कुपोषण भगाने की मुहिम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:48 PM IST
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गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को रोजाना मिलेगा गरम भोजन
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डीएम और सीडीओ के गोद लिए गांवों से कुपोषण मिटाने की बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने मुहिम तेज कर दी है। गोद लिए इन गांवों के कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना गरम भोजन परोसा जाएगा। सोमवार को इसकी शुरुआत जनपद के चार गांवों में की गई।
कौशाम्बी में कुपोषण भी एक बड़ी समस्या है। दोआबा विकास एवं उत्थान संस्था की ओर से मंझनपुर, सरसवां और कौशाम्बी ब्लाक के गांवों में कराए गए सर्वे में ही तमाम बच्चे कुपोषण से जकड़े मिले थे। इसके बाद इन गांवों में कुपोषण से मिटाने की मुहिम शुरू की गई। जिलाधिकारी, सीडीओ समेत जिलास्तरीय अफसरों को कुपोषित बाहुल्य गांवों को गोद दिया गया। डीएम और सीडीओ ने भी दो-दो गांवों को गोद लिया है। इधर, जिलाधिकारी के गोद लिए गांव काजीपुर और तियरा जमालपुर और सीडीओ की ओर से गोद लिए गांव पेरई, गरौली में बाल विकास विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना गरमागरम भोजन परोसना का अभियान शुरू किया गया। सोमवार को धात्री महिलाओं और बच्चों को गरम भोजन परोसकर इसकी शुरूआत की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि गरम भोजन परोसे जाने का यह कार्यक्रम अन्य गांवों में शुरू किया जाएगा। यह अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक कि गांव का प्रत्येक बच्चा कुपोषण से मुक्त नहीं हो जाता है।
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कौशाम्बी में कुपोषण भी एक बड़ी समस्या है। दोआबा विकास एवं उत्थान संस्था की ओर से मंझनपुर, सरसवां और कौशाम्बी ब्लाक के गांवों में कराए गए सर्वे में ही तमाम बच्चे कुपोषण से जकड़े मिले थे। इसके बाद इन गांवों में कुपोषण से मिटाने की मुहिम शुरू की गई। जिलाधिकारी, सीडीओ समेत जिलास्तरीय अफसरों को कुपोषित बाहुल्य गांवों को गोद दिया गया। डीएम और सीडीओ ने भी दो-दो गांवों को गोद लिया है। इधर, जिलाधिकारी के गोद लिए गांव काजीपुर और तियरा जमालपुर और सीडीओ की ओर से गोद लिए गांव पेरई, गरौली में बाल विकास विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना गरमागरम भोजन परोसना का अभियान शुरू किया गया। सोमवार को धात्री महिलाओं और बच्चों को गरम भोजन परोसकर इसकी शुरूआत की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि गरम भोजन परोसे जाने का यह कार्यक्रम अन्य गांवों में शुरू किया जाएगा। यह अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक कि गांव का प्रत्येक बच्चा कुपोषण से मुक्त नहीं हो जाता है।
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