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पिटाई के बाद जेल में बंदियों का अनशन शुरू
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:35 AM IST
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जिला जेल में बंदियों ने गुरुवार से अनशन शुरू कर दिया है। बंदी रक्षकों की पिटाई से बंदियों में गुस्सा है। जेल प्रशासन ने बंदियों को समझाने का प्रयास किया है लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। बंदियों के परिजनों ने मामले की शिकायत कारागार मंत्री समेत अधिकारियों से की है। वहीं जेल प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधकर बैठा है।
जिला जेल की कैंटीन में तीन दिन पहले बैरक 4-बी के बंदी आनन्द बाबू निवासी सैदपुर (करेली) इलाहाबाद समेत नियाज आलम, मिलन पाल, वीरेंद्र सिंह, पंचम पाल, संजीव सिंह उर्फ लसटाकी से बंदी रक्षकों ने रुपये की मांग की थी। बंदी रक्षक 25 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। बंदी आनन्द बाबू के भाई रामबाबू का आरोप है कि रुपया देने से इंकार करने पर बंदी रक्षकों ने उसके भाई व साथ रहे बंदियों को बेरहमी से पीटा। इससे उन्हें चोटें भी आईं।
बताया कि वह बुधवार को वह अपने भाई से जेल में मिलने गया तो इसकी जानकारी हुई। इसकी शिकायत स्थानीय अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बंदी रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराज बंदियों ने गुरुवार से जिला जेल में अनशन शुरू कर दिया है। वह भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। गुरुवार को बंदियों के परिजनों ने कारागार मंत्री समेत शासन स्तर के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा। मामले में बंदी रक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। जेल में भूख हड़ताल शुरू होने से जिला जेल प्रशासन में खलबली मची है। जेल प्रशासन ने बंदियों को मनाने का प्रयास किया है, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे। इससे जेल के भीतर तनाव बढ़ने लगा है। जेल अधीक्षक एचआर दोहरे ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है।
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बैरक की बोली लगाते हैं अधिकारी
जेल के अधिकारी बैरक की बोली लगाते हैं। बोली लंबरदारों से कराई जाती है। इसके अलावा इस काम में जेलों में बंद शातिर अपराधियों की भी भूमिका अहम होती है। 30-35 हजार रुपये में बैरक खरीदने के बाद शातिर अपराधी रुपया वसूलते हैं। हर बैरक की अलग-अलग बोली होती है। इंकार करने पर बंदी रक्षकों से रुपया दिलाने का दबाव बनवाते हैं। इसी खेल का नतीजा है कि तीन दिन पहले कैंटीन में बंदियों को सिपाहियों ने बेरहमी से पीटा। इसके बाद भी जेल प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है।
जेल प्रशासन की ओर से इस तरह की कोई सूचना नहीं मिली है। कौशाम्बी के जिला कारागार में यदि इस तरह की घटना हुई है तो वह खुद शुक्रवार को जेल का निरीक्षण करेंगे और बंदियों से बातचीत करेंगे। बंदी भूख हड़ताल पर पाए गए तो बंदी रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
संतोष श्रीवास्तव, डीआईजी (जेल)
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जिला जेल की कैंटीन में तीन दिन पहले बैरक 4-बी के बंदी आनन्द बाबू निवासी सैदपुर (करेली) इलाहाबाद समेत नियाज आलम, मिलन पाल, वीरेंद्र सिंह, पंचम पाल, संजीव सिंह उर्फ लसटाकी से बंदी रक्षकों ने रुपये की मांग की थी। बंदी रक्षक 25 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। बंदी आनन्द बाबू के भाई रामबाबू का आरोप है कि रुपया देने से इंकार करने पर बंदी रक्षकों ने उसके भाई व साथ रहे बंदियों को बेरहमी से पीटा। इससे उन्हें चोटें भी आईं।
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बताया कि वह बुधवार को वह अपने भाई से जेल में मिलने गया तो इसकी जानकारी हुई। इसकी शिकायत स्थानीय अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बंदी रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराज बंदियों ने गुरुवार से जिला जेल में अनशन शुरू कर दिया है। वह भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। गुरुवार को बंदियों के परिजनों ने कारागार मंत्री समेत शासन स्तर के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा। मामले में बंदी रक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। जेल में भूख हड़ताल शुरू होने से जिला जेल प्रशासन में खलबली मची है। जेल प्रशासन ने बंदियों को मनाने का प्रयास किया है, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे। इससे जेल के भीतर तनाव बढ़ने लगा है। जेल अधीक्षक एचआर दोहरे ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है।
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बैरक की बोली लगाते हैं अधिकारी
जेल के अधिकारी बैरक की बोली लगाते हैं। बोली लंबरदारों से कराई जाती है। इसके अलावा इस काम में जेलों में बंद शातिर अपराधियों की भी भूमिका अहम होती है। 30-35 हजार रुपये में बैरक खरीदने के बाद शातिर अपराधी रुपया वसूलते हैं। हर बैरक की अलग-अलग बोली होती है। इंकार करने पर बंदी रक्षकों से रुपया दिलाने का दबाव बनवाते हैं। इसी खेल का नतीजा है कि तीन दिन पहले कैंटीन में बंदियों को सिपाहियों ने बेरहमी से पीटा। इसके बाद भी जेल प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है।
जेल प्रशासन की ओर से इस तरह की कोई सूचना नहीं मिली है। कौशाम्बी के जिला कारागार में यदि इस तरह की घटना हुई है तो वह खुद शुक्रवार को जेल का निरीक्षण करेंगे और बंदियों से बातचीत करेंगे। बंदी भूख हड़ताल पर पाए गए तो बंदी रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
संतोष श्रीवास्तव, डीआईजी (जेल)