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फूड प्वाइजनिंग से 20 बीमार, अस्पताल में भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 09 May 2017 01:27 AM IST
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पश्चिमशरीरा गांव में सोमवार दोपहर एक ही परिवार के करीब दो दर्जन लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। घर की महिलाएं पड़ोसी के घर आयोजित संकटा पूजन में शामिल होने गई थीं। खोवा, चावल व चीनी मिश्रित प्रसाद खाने से लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। हालत खराब होने पर बीमार लोगों को आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पश्चिमशरीरा गांव के राजेश चौरसिया के घर सोमवार को संकटा पूजन का कार्यक्रम था। जिसमें मोहल्ले भर की करीब डेढ़ दर्जन महिलाएं शामिल होने के लिए गई थी। संकटा पूजन के बाद बांटा गया प्रसाद लेकर महिलाएं घर गईं और परिवार के लोगों को वितरित कर दिया। प्रसाद खाने के बाद छोटेलाल (12), सूरज (15) पुत्र बसंत लाल, लीला देवी (45) पत्नी जगमोहन, सीमा देवी (25) पुत्री हरी मोहन, सुशील कुमार (45) पुत्र सेरजदीन, रीता चौरसिया (22) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, पचनी (65) पत्नी बृज मोहन, आंचल (10) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, कोमल (12) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, गोलू (12) पुत्र पंडा, मालती देवी (16) पुत्री पंडा, राजेश्वरी देवी, अंजू देवी समेत एक-एक कर करीब दो दर्जन लोगों को उल्टी-दस्त होने लगी।
एक साथ महिलाओं और बच्चों को बीमार होते देख लोगों के होश उड़ गए। आनन-फानन बीमार महिलाओं और बच्चों को लेकर परिजन स्थानीय सीएचसी ले गए। जहां डॉक्टर के नहीं होने पर बीमारों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां सभी बीमार बच्चों और महिलाआें का उपचार हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हैं
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डॉक्टरों की लापरवाही पड़ सकती थी भारी
प्रसाद खाने से बीमार हुए लोगों की जान पर बन आई थी। फूड प्वाइजनिंग से उनकी हालत खराब हो चुकी थी। परिवार के लोग बीमारों को लेकर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने गए थे लेकिन वहां डॉक्टर ही नहीं थे। एक के बाद एक मरीज आने शुरू हुए तो अस्पताल के कर्मचारियों के होश उड़ गए। तीमारदारों ने बिना समय गंवाए मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि निजी अस्पताल के चिकित्सक के पास बेड नहीं थे। एक बेड पर तीन से चार लोगों को लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। इस दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मची रही।
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पश्चिमशरीरा गांव के राजेश चौरसिया के घर सोमवार को संकटा पूजन का कार्यक्रम था। जिसमें मोहल्ले भर की करीब डेढ़ दर्जन महिलाएं शामिल होने के लिए गई थी। संकटा पूजन के बाद बांटा गया प्रसाद लेकर महिलाएं घर गईं और परिवार के लोगों को वितरित कर दिया। प्रसाद खाने के बाद छोटेलाल (12), सूरज (15) पुत्र बसंत लाल, लीला देवी (45) पत्नी जगमोहन, सीमा देवी (25) पुत्री हरी मोहन, सुशील कुमार (45) पुत्र सेरजदीन, रीता चौरसिया (22) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, पचनी (65) पत्नी बृज मोहन, आंचल (10) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, कोमल (12) पुत्री राजेन्द्र प्रसाद, गोलू (12) पुत्र पंडा, मालती देवी (16) पुत्री पंडा, राजेश्वरी देवी, अंजू देवी समेत एक-एक कर करीब दो दर्जन लोगों को उल्टी-दस्त होने लगी।
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एक साथ महिलाओं और बच्चों को बीमार होते देख लोगों के होश उड़ गए। आनन-फानन बीमार महिलाओं और बच्चों को लेकर परिजन स्थानीय सीएचसी ले गए। जहां डॉक्टर के नहीं होने पर बीमारों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां सभी बीमार बच्चों और महिलाआें का उपचार हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हैं
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डॉक्टरों की लापरवाही पड़ सकती थी भारी
प्रसाद खाने से बीमार हुए लोगों की जान पर बन आई थी। फूड प्वाइजनिंग से उनकी हालत खराब हो चुकी थी। परिवार के लोग बीमारों को लेकर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने गए थे लेकिन वहां डॉक्टर ही नहीं थे। एक के बाद एक मरीज आने शुरू हुए तो अस्पताल के कर्मचारियों के होश उड़ गए। तीमारदारों ने बिना समय गंवाए मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि निजी अस्पताल के चिकित्सक के पास बेड नहीं थे। एक बेड पर तीन से चार लोगों को लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। इस दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मची रही।