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किसान की आत्महत्या को हत्या बताने में जुटे रहे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:22 AM IST
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कौशाम्बी
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किसान रामबाबू की मौत के साथ प्रशासन खिलवाड़ करने पर उतारू हो गया है। आत्महत्या की घटना को हत्या की ओर ले जाने की पुलिस ने सारी तैयारी तेज कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुए खिलवाड़ के बाद परिजनों से पूछे जा रहे बेतुके सवाल इसकी तस्दीक कर रहे हैं। इससे परिजन आक्रोशित हैं। ग्रामीण भी नाराज हैं। शुक्रवार को हद तो तब पार हो गई जब मृतक के मझले बेटे से कई चक्रों में पूछताछ हुई। इसके बाद घर के बाहर दो सिपाही तैनात कर दिए गए। वह भी दोपहर बाद अपने असलहों के साथ गायब हो गए। पुलिस के सवालों से परेशान मझले बेटे ने अमर उजाला को खुद इसकी जानकारी दी।
सैनी के चक बख्तियारा निवासी रामबाबू ने मंगलवार की देर रात गांव के बाहर आम की बाग में फांसी लगा ली थी। बुधवार की सुबह शव पेड़ पर लटकता मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। कर्ज में डूबे रामबाबू की आत्महत्या की घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार को घेरना शुरू किया तो अधिकारियों ने आत्महत्या पर पर्दा डालने का खेल भी शुरू कर दिया। इसकी शुरूआत पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई। पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग नहीं लिखा गया। दबी जुबान और चोट की भी बात सामने आई थी। इसकी जानकारी होते ही पुलिस विभाग एकदम से सक्रिय हो गया। इसके बाद पीएम करने वाले डॉक्टर से इंस्पेक्टर ने बातचीत की। डॉक्टर ने माना कि हैंगिंग गलती से नहीं लिखा गया था। वह इसे दोबारा चेक कर रहे हैं।
प्रशासनिक गलियारे में चर्चा है कि इस मामले में डॉक्टर तलब भी हुए थे। पुलिस इसे दूसरा रूप देने जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त विपक्षी दलों और परिजनों के दबाव के बाद अधिकारियों ने अपने कदम खींच लिए। रामबाबू के घर में नेताओं का जमावड़ा लगा है। शुक्रवार दोपहर सैनी कोतवाली पुलिस दोबारा रामबाबू के घर पहुंची। मृतक के मझले बेटे बृजेंद्र द्विवेदी से पुलिस ने कई बिंदुओं पर सवाल-जवाब किया। बृजेंद्र से पुलिस ने पुराना सवाल ही दोहराया। इससे बृजेंद्र झुंझला गया। बृजेंद्र ने फोन करके अमर उजाला को बताया कि उसको पुलिस परेशान कर रही है। बेटे ने बताया कि पुलिस पूछ रही है कि रामबाबू कितने बजे रात को घर से निकला, मौत की खबर उनको सबसे पहले किसने दी, फांसी में कितनी गांठ लगी थी, कितनी दूरी पर शव लटक रहा था? परिजनों का कहना है कि सूचना पर पुलिस आई थी। पंचनामा भरा तब यह सवाल नहीं किया गया। अब बड़े नेता व अधिकारी आ रहे हैं, तो पुलिस परेशान कर रही है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, आत्महत्या का डॉक्टरों ने जिक्र किया है। पहले हैंगिंग न लिखने की बात बताई गई थी। अब पीएम रिपोर्ट का सत्यापन हो रहा है। इसी संबंध में परिजनों व ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है।
राकेश चौरसिया, इंस्पेक्टर (सैनी कोतवाली)
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सैनी के चक बख्तियारा निवासी रामबाबू ने मंगलवार की देर रात गांव के बाहर आम की बाग में फांसी लगा ली थी। बुधवार की सुबह शव पेड़ पर लटकता मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। कर्ज में डूबे रामबाबू की आत्महत्या की घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार को घेरना शुरू किया तो अधिकारियों ने आत्महत्या पर पर्दा डालने का खेल भी शुरू कर दिया। इसकी शुरूआत पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई। पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग नहीं लिखा गया। दबी जुबान और चोट की भी बात सामने आई थी। इसकी जानकारी होते ही पुलिस विभाग एकदम से सक्रिय हो गया। इसके बाद पीएम करने वाले डॉक्टर से इंस्पेक्टर ने बातचीत की। डॉक्टर ने माना कि हैंगिंग गलती से नहीं लिखा गया था। वह इसे दोबारा चेक कर रहे हैं।
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प्रशासनिक गलियारे में चर्चा है कि इस मामले में डॉक्टर तलब भी हुए थे। पुलिस इसे दूसरा रूप देने जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त विपक्षी दलों और परिजनों के दबाव के बाद अधिकारियों ने अपने कदम खींच लिए। रामबाबू के घर में नेताओं का जमावड़ा लगा है। शुक्रवार दोपहर सैनी कोतवाली पुलिस दोबारा रामबाबू के घर पहुंची। मृतक के मझले बेटे बृजेंद्र द्विवेदी से पुलिस ने कई बिंदुओं पर सवाल-जवाब किया। बृजेंद्र से पुलिस ने पुराना सवाल ही दोहराया। इससे बृजेंद्र झुंझला गया। बृजेंद्र ने फोन करके अमर उजाला को बताया कि उसको पुलिस परेशान कर रही है। बेटे ने बताया कि पुलिस पूछ रही है कि रामबाबू कितने बजे रात को घर से निकला, मौत की खबर उनको सबसे पहले किसने दी, फांसी में कितनी गांठ लगी थी, कितनी दूरी पर शव लटक रहा था? परिजनों का कहना है कि सूचना पर पुलिस आई थी। पंचनामा भरा तब यह सवाल नहीं किया गया। अब बड़े नेता व अधिकारी आ रहे हैं, तो पुलिस परेशान कर रही है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, आत्महत्या का डॉक्टरों ने जिक्र किया है। पहले हैंगिंग न लिखने की बात बताई गई थी। अब पीएम रिपोर्ट का सत्यापन हो रहा है। इसी संबंध में परिजनों व ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है।
राकेश चौरसिया, इंस्पेक्टर (सैनी कोतवाली)