{"_id":"1bda3a3e2f118e2ee2ad409c3a3d1644","slug":"crime-news-hindi-news-518","type":"story","status":"publish","title_hn":"जच्चा-बच्चा की मौत, चायल में हंगामा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जच्चा-बच्चा की मौत, चायल में हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:11 PM IST
विज्ञापन
पीएचसी चायल में रविवार की रात जच्चा-बच्चा की मौत पर सोमवार को घरवालों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीण और परिजन चिकित्सकों पर लापरवाही का इल्जाम लगाते हुए सड़क पर उतर आए। मनौरी में रास्ता जाम कर दिया। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने पीड़ित परिवार को पारिवारिक जीवनबीमा के साथ कृषि भूमि का पट्टा दिलाने का भरोसा देकर शांत कराया। प्रसूता और बच्चे की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा है।
चायल तहसील क्षेत्र के गिरिया खालसा गांव निवासी चंदन की पत्नी सुगनी देवी (30) को रविवार रात प्रसव पीड़ा होने लगी। रात में ही परिवार के लोग सुरक्षित प्रसव के लिए उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चायल आए और भर्ती करा दिया। देर रात उसने बेटी को जन्म दिया। बताया जाता है कि पैदा होते ही नवजात की सांसें थम गईं। वहीं विवाहिता की भी हालत बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद भी डॉक्टरों ने इलाज करने के बजाय उसे ठीक बताकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। परिजन विवाहिता को लेकर घर जा रहे थे कि रास्ते में उसकी भी मौत हो गई। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर सोमवार की सुबह परिजनों और गांववालों का गुस्सा फूट पड़ा। डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए लोग सड़क पर उतर आए।
आक्रोशित ग्रामीणों ने शव अस्पताल के समीप सड़क पर रखकर मनौरी-सरायअकिल मार्ग पर जाम लगा दिया। चक्काजाम की खबर लगते ही एसडीएम, सीओ चायल फोर्स लेकर पहुंचे। एसडीएम ने मामले की जांच कराने और पीड़ित परिवार को पारिवारिक बीमा और कृषि भूमि का पट्टा दिलाए जाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए। देर शाम परिजनों ने मृत विवाहिता और नवजात का अंतिम संस्कार कर दिया। जच्चा-बच्चा की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चायल तहसील क्षेत्र के गिरिया खालसा गांव निवासी चंदन की पत्नी सुगनी देवी (30) को रविवार रात प्रसव पीड़ा होने लगी। रात में ही परिवार के लोग सुरक्षित प्रसव के लिए उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चायल आए और भर्ती करा दिया। देर रात उसने बेटी को जन्म दिया। बताया जाता है कि पैदा होते ही नवजात की सांसें थम गईं। वहीं विवाहिता की भी हालत बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद भी डॉक्टरों ने इलाज करने के बजाय उसे ठीक बताकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। परिजन विवाहिता को लेकर घर जा रहे थे कि रास्ते में उसकी भी मौत हो गई। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर सोमवार की सुबह परिजनों और गांववालों का गुस्सा फूट पड़ा। डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए लोग सड़क पर उतर आए।
विज्ञापन
आक्रोशित ग्रामीणों ने शव अस्पताल के समीप सड़क पर रखकर मनौरी-सरायअकिल मार्ग पर जाम लगा दिया। चक्काजाम की खबर लगते ही एसडीएम, सीओ चायल फोर्स लेकर पहुंचे। एसडीएम ने मामले की जांच कराने और पीड़ित परिवार को पारिवारिक बीमा और कृषि भूमि का पट्टा दिलाए जाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए। देर शाम परिजनों ने मृत विवाहिता और नवजात का अंतिम संस्कार कर दिया। जच्चा-बच्चा की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा है।
विज्ञापन