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सदमे में बीमार किसान की टूटी सांसें
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Mon, 13 Apr 2015 12:47 AM IST
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नेवादा (कौशाम्बी)। मौसम की मार से तबाह हुई फसलों के सदमे में किसानों की मौत का सिलसिल थम नहीं रहा है। बर्बाद हुई खेती को देखकर बीमार पड़े कौशाम्बी के मढ़ी गांव के किसान रामभजन की भी रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे कौशाम्बी में फसलों की तबाही के सदमे में मरने वाले किसानों की संख्या चार हो गई है।
मंझनपुर तहसील के कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के मढ़ी गांव निवासी रामभजन (58) किसान था। साथ ही वह गांव का चौकीदार भी था। किसान के बड़े बेटे विजय कुमार ने बताया कि उसके पास कुल 10 बीघा जमीन है। इसमें से आठ बीघे में गेहूं की खेती की गई थी। मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ हुई जोरदार बरसात में उसकी सारी गेहूं की फसल गिरकर चौपट हो गई। रात में गिरी फसल सुबह देखने उनके पिता खेत की ओर गए थे। खेत में बर्बाद हुई फसल देखकर उनके पिता की तबीयत बिगड़ गई।
उन्हें इलाहाबाद के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां से वे 30 मार्च को ठीक होकर घर चले आए थे। बताया कि दो अप्रैल को घूमते-घूमते फिर वे खेत की ओर चले गए थे। खेतों बर्बाद होकर पड़ी फसल देखते ही दुबारा उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें उठाकर घर लाया गया। साथ ही उन्हें ले जाकर दुबारा इलाहाबाद के प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती कराया गया।
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जहां इलाज के दौरान रविवार की शाम उनकी सांसें थम गई। बड़े बेटे विजय के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल के गम में ही रामभजन की जान गई है। मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बता दें कि बर्बाद फसल के सदमें में जिले में हुई यह चौथी मौत है। इससे पहले मखऊपुर गांव के किसान त्रिलोक सिंह, पन्नोई गांव के किसान बचईलाल और काजीपुर गांव किसान अर्जुन सिंह भी मौत हो चुकी है। मामले में एसडीएम मंझनपुर नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मौत की सूचना मिली है। घटना की जांच कराई जा रही है।
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मंझनपुर तहसील के कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के मढ़ी गांव निवासी रामभजन (58) किसान था। साथ ही वह गांव का चौकीदार भी था। किसान के बड़े बेटे विजय कुमार ने बताया कि उसके पास कुल 10 बीघा जमीन है। इसमें से आठ बीघे में गेहूं की खेती की गई थी। मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ हुई जोरदार बरसात में उसकी सारी गेहूं की फसल गिरकर चौपट हो गई। रात में गिरी फसल सुबह देखने उनके पिता खेत की ओर गए थे। खेत में बर्बाद हुई फसल देखकर उनके पिता की तबीयत बिगड़ गई।
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उन्हें इलाहाबाद के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां से वे 30 मार्च को ठीक होकर घर चले आए थे। बताया कि दो अप्रैल को घूमते-घूमते फिर वे खेत की ओर चले गए थे। खेतों बर्बाद होकर पड़ी फसल देखते ही दुबारा उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें उठाकर घर लाया गया। साथ ही उन्हें ले जाकर दुबारा इलाहाबाद के प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती कराया गया।
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जहां इलाज के दौरान रविवार की शाम उनकी सांसें थम गई। बड़े बेटे विजय के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल के गम में ही रामभजन की जान गई है। मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बता दें कि बर्बाद फसल के सदमें में जिले में हुई यह चौथी मौत है। इससे पहले मखऊपुर गांव के किसान त्रिलोक सिंह, पन्नोई गांव के किसान बचईलाल और काजीपुर गांव किसान अर्जुन सिंह भी मौत हो चुकी है। मामले में एसडीएम मंझनपुर नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मौत की सूचना मिली है। घटना की जांच कराई जा रही है।