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प्रधानाध्यापक ने बेंच डाली प्राथमिक विद्यालय की भूमि
Updated Fri, 15 Sep 2017 07:03 PM IST
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प्रधानाध्यापक ने बेच डाली प्राथमिक विद्यालय की भूमि
प्रभारीमंत्री से शिकायत के बाद एबीएसए की जांच में खुलासा
-बीएसए ने प्रधानाध्यापक से मांगा स्पष्टीकरण, हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बीआरसी नेवादा के नूरपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की भूमि प्रधानाध्यापक ने ही बेच डाली। प्रधानाध्यापक को मोटी रकम देकर ग्रामीणों ने भूमि पर निर्माण करा लिया। इसका खुलासा एबीएसए नेवादा की जांच में हुआ तो बीएसए ने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया है। खुलासा होने के बाद से भूमि खरीददारों व प्रधानाध्यापक के होश उड़े हुए हैं।
बीआरसी नेवादा के नूरपुर प्राथमिक विद्यालय के नाम 0.2170 हेक्टेयर भूमि है। इस भूमि पर विद्यालय का निर्माण महज छह बिस्वा में है। आठ बिस्वा भूमि शेष पड़ी हुई है। बाकी बची विद्यालय की भूमि को प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सिंह ने गांव के दर्जनभर लोगों के हाथ बेच दिया। प्रधानाध्यापक को पैसा देकर ग्रामीणों ने भूमि पर कब्जा करते हुए निर्माण करा लिया। इसकी शिकायत गांव के राजेश कुमार दिवाकर ने प्रभारी मंत्री से किया तो उन्होंने जांच कराने का निर्देश डीएम मनीष कुमार वर्मा को दिया। डीएम के निर्देश पर बीएसए ने एबीएसए नेवादा से जांच कराया तो विद्यालय की भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा पाया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद बीएसए एमआर स्वामी दंग रह गए। उन्होेंने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया कि तैनाती के दौरान आखिरकर भूमि पर ग्रामीणों ने कब्जा कैसे किया। इस दौरान प्रधानाध्यापक द्वारा मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों व तहसील प्रशासन से क्यों नहीं की गई। बहरहाल भूमि बेचे जाने के प्रकरण का खुलासा होने के बाद प्रधानाध्यापक व खरीदारों में हड़कंप है।
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जिले के कई स्कूलों की भूमि पर है कब्जा
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की भूमि पर पैसा लेकर कब्जा कराने का नूरपुर में कोई नया मामला नहीं है। जिले भर के सैकड़ों प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों की भूमि पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इसकी बानगी प्राथमिक विद्यालय म्योहर खास की भूमि से लिया जा सकता है। माह भर पहले हलका लेखपाल ने एक भूमि विवाद की पैमाइश की। इस दौरान स्कूल की भूमि निकाली गई तो उस पर कई लोगों के घर बने पाए गए। निर्माण हो जाने के कारण हलका लेखपाल ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से न करते हुए प्रकरण को पूरी तरह से दबा दिया। यह हाल जिले भर के कई प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की भूमि का है। मामला सरकारी भूमि का होने की वजह से ग्रामीण भी इसकी शिकायत करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़े हैं।
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बीएसए कार्यालय भूमि पर भी बोला गया था धावा
प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल ही नहीं बल्कि बीएसए कार्यालय की भूमि तक असुरक्षित है। पांच साल पहले भू-माफियाओं ने बीएसए कार्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने का प्रयास किया था। मामला मुख्यालय का होने की वजह से प्रकरण जल्द प्रकाश में आ गया। प्रशासन के सख्त रुख अपनाने पर भू-माफियाओं को कार्यालय की भूमि से कब्जा छोड़ना पड़ा। इससे साफ है कि जब बीएसए दफ्तर की भूमि असुरक्षित है तो प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की भूमि का हाल क्या होगा? सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
प्राथमिक विद्यालय नूरपुर की भूमि पर ग्रामीणों के कब्जे की पुष्टि हुई है। कुछ लोगों ने निर्माण भी करा लिया है। मामले में प्रधानाध्यापक की भूमिका संदिग्ध है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। कब्जा हटवाने के लिए एसडीएम चायल को रिपोर्ट भेज दी गई है।
एमआर स्वामी, बीएसए कौशांबी
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प्रभारीमंत्री से शिकायत के बाद एबीएसए की जांच में खुलासा
-बीएसए ने प्रधानाध्यापक से मांगा स्पष्टीकरण, हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बीआरसी नेवादा के नूरपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की भूमि प्रधानाध्यापक ने ही बेच डाली। प्रधानाध्यापक को मोटी रकम देकर ग्रामीणों ने भूमि पर निर्माण करा लिया। इसका खुलासा एबीएसए नेवादा की जांच में हुआ तो बीएसए ने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया है। खुलासा होने के बाद से भूमि खरीददारों व प्रधानाध्यापक के होश उड़े हुए हैं।
बीआरसी नेवादा के नूरपुर प्राथमिक विद्यालय के नाम 0.2170 हेक्टेयर भूमि है। इस भूमि पर विद्यालय का निर्माण महज छह बिस्वा में है। आठ बिस्वा भूमि शेष पड़ी हुई है। बाकी बची विद्यालय की भूमि को प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सिंह ने गांव के दर्जनभर लोगों के हाथ बेच दिया। प्रधानाध्यापक को पैसा देकर ग्रामीणों ने भूमि पर कब्जा करते हुए निर्माण करा लिया। इसकी शिकायत गांव के राजेश कुमार दिवाकर ने प्रभारी मंत्री से किया तो उन्होंने जांच कराने का निर्देश डीएम मनीष कुमार वर्मा को दिया। डीएम के निर्देश पर बीएसए ने एबीएसए नेवादा से जांच कराया तो विद्यालय की भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा पाया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद बीएसए एमआर स्वामी दंग रह गए। उन्होेंने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण तलब किया कि तैनाती के दौरान आखिरकर भूमि पर ग्रामीणों ने कब्जा कैसे किया। इस दौरान प्रधानाध्यापक द्वारा मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों व तहसील प्रशासन से क्यों नहीं की गई। बहरहाल भूमि बेचे जाने के प्रकरण का खुलासा होने के बाद प्रधानाध्यापक व खरीदारों में हड़कंप है।
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जिले के कई स्कूलों की भूमि पर है कब्जा
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की भूमि पर पैसा लेकर कब्जा कराने का नूरपुर में कोई नया मामला नहीं है। जिले भर के सैकड़ों प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों की भूमि पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इसकी बानगी प्राथमिक विद्यालय म्योहर खास की भूमि से लिया जा सकता है। माह भर पहले हलका लेखपाल ने एक भूमि विवाद की पैमाइश की। इस दौरान स्कूल की भूमि निकाली गई तो उस पर कई लोगों के घर बने पाए गए। निर्माण हो जाने के कारण हलका लेखपाल ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से न करते हुए प्रकरण को पूरी तरह से दबा दिया। यह हाल जिले भर के कई प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की भूमि का है। मामला सरकारी भूमि का होने की वजह से ग्रामीण भी इसकी शिकायत करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़े हैं।
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बीएसए कार्यालय भूमि पर भी बोला गया था धावा
प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल ही नहीं बल्कि बीएसए कार्यालय की भूमि तक असुरक्षित है। पांच साल पहले भू-माफियाओं ने बीएसए कार्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने का प्रयास किया था। मामला मुख्यालय का होने की वजह से प्रकरण जल्द प्रकाश में आ गया। प्रशासन के सख्त रुख अपनाने पर भू-माफियाओं को कार्यालय की भूमि से कब्जा छोड़ना पड़ा। इससे साफ है कि जब बीएसए दफ्तर की भूमि असुरक्षित है तो प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की भूमि का हाल क्या होगा? सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
प्राथमिक विद्यालय नूरपुर की भूमि पर ग्रामीणों के कब्जे की पुष्टि हुई है। कुछ लोगों ने निर्माण भी करा लिया है। मामले में प्रधानाध्यापक की भूमिका संदिग्ध है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। कब्जा हटवाने के लिए एसडीएम चायल को रिपोर्ट भेज दी गई है।
एमआर स्वामी, बीएसए कौशांबी