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सऊदीअरब की जेल से बाइज्जत बरी हुए पांच कामगार
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:03 AM IST
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सऊदीअरब की जेल से बाइज्जत बरी हुए पांच कामगार
फोटो...
साथी के आत्महत्या करने पर पुलिस ने पांचों को पकड़कर डाल दिया था जेल में
भारतीय दूतावास ने पैरवी कर 33 दिन बाद कराया आजाद, परिजनों ने ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल।
सऊदीअरब के रियाद में काम करने गए जिले के पांच कामगारों को वहां की पुलिस ने साथी के आत्महत्या करने पर जेल में डाल दिया था। जानकारी होने पर भारतीय दूतावास ने पैरवी कर इन बेकसूर लोगों को 33 दिन बाद सोमवार को जेल से बाइज्जत रिहा कराया। जानकारी परिजनों को हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली।
खोंपा निवासी मसरूर अहमद पुत्र फैजान अहमद, मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब और फैजान सऊदीअरब के रियाद शहर के अलशिफा में रहकर काम करते थे। इनके साथ करारी निवासी मो. शमीम भी सऊदीअरब में काम करता है। यह सभी लोग जिस भवन में रहते थे, वहां 28 जून को लखनऊ के एजाज ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। वह मनोरोगी था। एजाज की घटना के बाद सऊदीअरब की पुलिस ने बांग्लादेश के एक युवक समेत मसरूर अहमद, मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब, फैजान और शमीम को जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी पीड़ित कामगारों के दोस्त रईस अहमद निवासी सरायअकिल को हुई तो वह उनसे मिला। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद भारतीय दूतावास से पीड़ितों को आजाद कराने की गुहार लगाई। मामले में मसरूर के रिश्तेदार शाहिद अंसारी ने भी पैरवी शुरू की। भारतीय दूतावास ने प्रकरण की जांच कराई। इसके बाद सऊदीअरब सरकार ने 33 दिन बाद सोमवार को पांचों लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। इसकी जानकारी देर रात परिजनों को मिली तो उन्होंने राहत की सांस ली। परिजन रात-दिन अल्लाह से यही दुआ कर रहे थे कि सही सलामत उनके बेटे जेल से बाहर आएं। अब उनके मुल्क वापसी का इंतजार हो रहा है।
33 दिन बाद कमाऊ पूतों के परिजनों के खिले चेहरे
-परिजनों ने मनाया जश्न, नात-रिश्तेदारों को दी रिहाई की खबर
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल। सरायअकिल के खोंपा के चार घरों में 33 दिन से सन्नाटा पसरा था। सऊदीअरब की जेल में बेटे बंद थे, तो कैसे परिजनों को नींद आती। सुकून छिन चुका था। हलक से रोटी नहीं उतरती थी। सोमवार की शाम रिहाई की खबर आई तो सभी लोग खुशी से झूम उठे। परिजन खिलखिलाकर हंस पड़े। सभी लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।
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खोंपा निवासी मसरूर व उसके साथी मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब, फैजान, मो. शमीम करीब 12 साल से सऊदीअरब के रियाद में रह रहे थे। दो साल बाद एक अप्रैल को मसरूर दोबारा सऊदीअरब गया था। 28 जून को लखनऊ के एजाज ने आत्महत्या कर ली तो मसरूर व उसके साथियों को पुलिस ने जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी मसरूर व उसके साथियों के परिजनों को हुई तो सबके चेहरे का रंग उतर गया। सात समंदर पर बेटों के जेल में होने की खबर से घर में सन्नाटा पसर गया था। मसरूर के पिता फैजान अहमद, मां इस्लामुन निशां, पत्नी तबस्सुम की हालत खराब हो गई। भाई मकसूद अहमद, फहमूद अहमद और मसऊद अहमद भी चिंतित हो गए। परिजनों के जरिए वे सऊदीअरब में भाई का हालचाल लेने लगे। इनके घरों में 33 दिन से वीरानगी फैली थी। परिजन बेबस व लाचार होकर अल्लाह से इनकी रिहाई की दुआ मांगते रहे। बच्चे भी परेशान थे। सऊदीअरब में रहने वाले कमाऊ पूतों के साथियों से हर दिन बातचीत की जाती थी। वहां की सरकार क्या कर रही है और क्या नहीं? इसकी एक-एक जानकारी जुटाई जाती थी। साथियों ने परिजनों को ढांढस बंधा रखा था। साथियों की मेहनत रंग लाई।
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रिहाई में रईस अहमद की रही अहम भूमिका
मसरुर व उसके साथियों को रिहा कराने में सरायअकिल के रईस अहमद ने अहम भूमिका निभाई। रईस अहमद भी सऊदीअरब में रहकर काम करता है। रईस अहमद को जैसे ही गिरफ्तारी की जानकारी हुई वह भागकर एक हजार किमी दूर से जेल पहुंचा। मसरूर व उसके साथियों से पूछताछ करने के बाद उसने भारतीय दूतावास को घटना की सच्चाई बताई। इसके बाद रईस अहमद ने मसरूर के रिश्तेदार शाहिद अंसारी को सूचना दी। शाहिद ने इसके बाद भारतीय दूतावास में पैरवी तेज की। इसका परिणाम रहा कि सभी लोग अब जेल से बाहर हैं।
मुंबई पुलिस कमिश्नर की भी सिफारिश रंग लाई
मसरूर व उसके साथियों को रिहा कराने में मुंबई पुलिस कमिश्नर जावेद अख्तर का भी अहम योगदान है। शाहिद अंसारी ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर जावेद अख्तर से रिश्तेदारों को बचाने की गुहार लगाई थी। पुलिस कमिश्नर ने इसके बाद भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद दूतावास सक्रिय हुआ और जांच कराने के बाद कौशाम्बी के लोगों को रिहा कराया गया।
अब बेटों के मुल्क वापसी का इंतजार
जेल से रिहा हुए लोगों के घर आने का इंतजार अब परिजनों को है। मसरूर के भाई मसऊद ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वह अपने कपिल के पास पहुंच गए हैं। बताया कि भाई से बातचीत हुई है। अभी उन्होंने यह तय नहीं किया है कि घर आएंगे अथवा नहीं। कहा कि बातचीत चल रही है। अब सभी लोग एक साथ वहां से वापस आएंगे।
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साथी के आत्महत्या करने पर पुलिस ने पांचों को पकड़कर डाल दिया था जेल में
भारतीय दूतावास ने पैरवी कर 33 दिन बाद कराया आजाद, परिजनों ने ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल।
सऊदीअरब के रियाद में काम करने गए जिले के पांच कामगारों को वहां की पुलिस ने साथी के आत्महत्या करने पर जेल में डाल दिया था। जानकारी होने पर भारतीय दूतावास ने पैरवी कर इन बेकसूर लोगों को 33 दिन बाद सोमवार को जेल से बाइज्जत रिहा कराया। जानकारी परिजनों को हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली।
खोंपा निवासी मसरूर अहमद पुत्र फैजान अहमद, मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब और फैजान सऊदीअरब के रियाद शहर के अलशिफा में रहकर काम करते थे। इनके साथ करारी निवासी मो. शमीम भी सऊदीअरब में काम करता है। यह सभी लोग जिस भवन में रहते थे, वहां 28 जून को लखनऊ के एजाज ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। वह मनोरोगी था। एजाज की घटना के बाद सऊदीअरब की पुलिस ने बांग्लादेश के एक युवक समेत मसरूर अहमद, मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब, फैजान और शमीम को जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी पीड़ित कामगारों के दोस्त रईस अहमद निवासी सरायअकिल को हुई तो वह उनसे मिला। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद भारतीय दूतावास से पीड़ितों को आजाद कराने की गुहार लगाई। मामले में मसरूर के रिश्तेदार शाहिद अंसारी ने भी पैरवी शुरू की। भारतीय दूतावास ने प्रकरण की जांच कराई। इसके बाद सऊदीअरब सरकार ने 33 दिन बाद सोमवार को पांचों लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। इसकी जानकारी देर रात परिजनों को मिली तो उन्होंने राहत की सांस ली। परिजन रात-दिन अल्लाह से यही दुआ कर रहे थे कि सही सलामत उनके बेटे जेल से बाहर आएं। अब उनके मुल्क वापसी का इंतजार हो रहा है।
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-परिजनों ने मनाया जश्न, नात-रिश्तेदारों को दी रिहाई की खबर
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल। सरायअकिल के खोंपा के चार घरों में 33 दिन से सन्नाटा पसरा था। सऊदीअरब की जेल में बेटे बंद थे, तो कैसे परिजनों को नींद आती। सुकून छिन चुका था। हलक से रोटी नहीं उतरती थी। सोमवार की शाम रिहाई की खबर आई तो सभी लोग खुशी से झूम उठे। परिजन खिलखिलाकर हंस पड़े। सभी लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।
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खोंपा निवासी मसरूर व उसके साथी मोहम्मद मोहसिन, मो. साकिब, फैजान, मो. शमीम करीब 12 साल से सऊदीअरब के रियाद में रह रहे थे। दो साल बाद एक अप्रैल को मसरूर दोबारा सऊदीअरब गया था। 28 जून को लखनऊ के एजाज ने आत्महत्या कर ली तो मसरूर व उसके साथियों को पुलिस ने जेल में डाल दिया। इसकी जानकारी मसरूर व उसके साथियों के परिजनों को हुई तो सबके चेहरे का रंग उतर गया। सात समंदर पर बेटों के जेल में होने की खबर से घर में सन्नाटा पसर गया था। मसरूर के पिता फैजान अहमद, मां इस्लामुन निशां, पत्नी तबस्सुम की हालत खराब हो गई। भाई मकसूद अहमद, फहमूद अहमद और मसऊद अहमद भी चिंतित हो गए। परिजनों के जरिए वे सऊदीअरब में भाई का हालचाल लेने लगे। इनके घरों में 33 दिन से वीरानगी फैली थी। परिजन बेबस व लाचार होकर अल्लाह से इनकी रिहाई की दुआ मांगते रहे। बच्चे भी परेशान थे। सऊदीअरब में रहने वाले कमाऊ पूतों के साथियों से हर दिन बातचीत की जाती थी। वहां की सरकार क्या कर रही है और क्या नहीं? इसकी एक-एक जानकारी जुटाई जाती थी। साथियों ने परिजनों को ढांढस बंधा रखा था। साथियों की मेहनत रंग लाई।
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रिहाई में रईस अहमद की रही अहम भूमिका
मसरुर व उसके साथियों को रिहा कराने में सरायअकिल के रईस अहमद ने अहम भूमिका निभाई। रईस अहमद भी सऊदीअरब में रहकर काम करता है। रईस अहमद को जैसे ही गिरफ्तारी की जानकारी हुई वह भागकर एक हजार किमी दूर से जेल पहुंचा। मसरूर व उसके साथियों से पूछताछ करने के बाद उसने भारतीय दूतावास को घटना की सच्चाई बताई। इसके बाद रईस अहमद ने मसरूर के रिश्तेदार शाहिद अंसारी को सूचना दी। शाहिद ने इसके बाद भारतीय दूतावास में पैरवी तेज की। इसका परिणाम रहा कि सभी लोग अब जेल से बाहर हैं।
मुंबई पुलिस कमिश्नर की भी सिफारिश रंग लाई
मसरूर व उसके साथियों को रिहा कराने में मुंबई पुलिस कमिश्नर जावेद अख्तर का भी अहम योगदान है। शाहिद अंसारी ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर जावेद अख्तर से रिश्तेदारों को बचाने की गुहार लगाई थी। पुलिस कमिश्नर ने इसके बाद भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद दूतावास सक्रिय हुआ और जांच कराने के बाद कौशाम्बी के लोगों को रिहा कराया गया।
अब बेटों के मुल्क वापसी का इंतजार
जेल से रिहा हुए लोगों के घर आने का इंतजार अब परिजनों को है। मसरूर के भाई मसऊद ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वह अपने कपिल के पास पहुंच गए हैं। बताया कि भाई से बातचीत हुई है। अभी उन्होंने यह तय नहीं किया है कि घर आएंगे अथवा नहीं। कहा कि बातचीत चल रही है। अब सभी लोग एक साथ वहां से वापस आएंगे।