फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   सूदखोर के कर्ज में दबे किसान ने छोड़ा दाना-पानी 20-32-50

सूदखोर के कर्ज में दबे किसान ने छोड़ा दाना-पानी 20-32-50

Sat, 15 Jul 2017 08:58 PM IST
Updated Sat, 15 Jul 2017 08:58 PM IST
विज्ञापन
सूदखोर के कर्ज में दबे किसान ने छोड़ा दाना-पानी 20-32-50
दरवाजे बर बंधी भैंस खोल ले गया सूदखोर
विज्ञापन

प्राईवेट कर्जदार के बोझ से दबे किसान ने छोड़ा भोजन-पानी
दस हजार रुपए देकर कर रहा है पचास हजार की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
बारा।
किसानों का कर्जा माफ करने का सरकार घोषणा कर रही है। मगर सूदखोर किसानों को प्रताड़ित कर रहे हैं। पूरी व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक सूदखोर ने किसान से पांच गुना ब्याज मांगा तो उसकी हालत बिगड़ गई। उसे इलाहाबाद के एक अस्पताल ले जाना पड़ा। जब तक वह लौटकर आता सूदखोर उसके घर के बाहर बंधी भैंस व पड़िया खोल ले गया। अस्पताल से शुक्रवार को लौटकर आए किसान को इसकी जानकारी हुई तो वह परेशान हो गया। घटना से आहत किसान ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
खुंदमीरपुर निवासी धर्मराज विश्वकर्मा ने पिछले साल खेती-किसानी के लिए बड़ा गढ़वा के एक सूदखोर से दस हजार रुपए कर्ज लिया था। खेती से फायदा नहीं होने पर वह समय पर कर्ज अदा नहीं कर सका। रबी की फसल काटने के बाद किसान दस हजार रुपया व डेढ़ कुंतल गेहूं देने के लिए सूदखोर के घर पहुंचा। आरोप है कि कर्जदाता ने किसान को बताया कि उसका ब्याज 50 हजार रुपए हो गया है। अब उसको पचास हजार रुपए देना होगा। सूदखोर की बात सुनकर किसान की हालत बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए इलाहाबाद स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान किसान की पत्नी घर में अकेली थी। इस दौरान सूदखोर अपने साथियों के साथ किसान के घर पहुंचा और दरवाजे पर बंधी 50 हजार रुपए कीमत की भैंस व पड़िया जबरन खोल ले गया। अस्पताल से आने के बाद किसान को इसकी जानकारी हुई तो उसे गहरा सदमा लगा। सूदखोर की करतूत से दुखी किसान ने खाना-पीना छोड़ दिया है। किसान ने बताया कि वह शुक्रवार को ही अस्पताल से लौटा है। इसकी शिकायत अब वह अधिकारियों से करेगा।
विज्ञापन



इनसेट---
गांव-गांव फैला है सूदखोरों का जाल
जिले में सूदखोरों का जाल फैला है। ब्याज पर रुपया देकर लोगों का शोषण करने वाले गांव-गांव हैं। वे मजबूर व परेशान लोगों की तलाश में रहते हैं। ब्याज पर रकम देने के बाद ऐसे लोगों की निगाह उनकी संपति पर रहती है। समय पर ब्याज न देने पर वे जमीन व घर तक बैनामा करा लेते हैं। यदि किसी ने इंकार कर दिया तो ब्याज इतना बढ़ा दिया जाता है कि कर्ज लेने वाला खुद ब खुद सूदखोरों के आगे गिड़गिड़ाने लगता है। रजिस्टर्ड सूदखोरों की तुलना में जनपद में कई गुना प्राईवेट सूदखोर हैं। जिनकी वजह से लोग परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो मामला गंभीर है। इसमें वह तत्काल कार्रवाई कराएंगे और सूदखोर के खिलाफ मामला दर्ज करवाकर उसे जेल भिजवाएंगे। संबंधित थाने की पुलिस से जांच रिपोर्ट मंगाकर कार्रवाई कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed