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दुराचार के आरोपी को सात वर्ष की कैद
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:20 AM IST
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दुराचार के एक मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी को सात वर्ष के कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 19 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। पीड़िता को क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया गया है। यह फैसला अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/ फास्ट ट्रैक के न्यायाधीश डॉ. हुमायू रशीद खान ने सुनाया।
अभियोजन के अनुसार कोखराज थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने दो जून वर्ष 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई की उसकी बेटी गांव के ही राजगीर के साथ काम करने गई थी। लेकिन वह घर वापस नहीं आई। प्राथमिकी में राजगीर पर वादिनी ने बेटी को गायब करने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की तो राजगीर की भूमिका संदिग्ध मिली। पीड़िता को मंझनपुर थाना क्षेत्र के मंगरोहनी से बरामद किया गया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि उसे सैनी के गड़रियन का पुरवा निवासी ऊदल नट ने मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर भगा ले गया था और मंगरोहनी में बंधक बनाकर रखा था, जहां उससे दुराचार किया गया।
पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 में हुई। शासकीय अधिवक्ता रोहित कुमार यादव ने पीड़िता समेत कुल नौ गवाहों को परीक्षित कराया। उभय पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। आरोप साबित होने पर न्यायालय ने सात वर्ष के कैद की सजा सुनाते हुए 19 हजार का अर्थदंड लगाया।
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अभियोजन के अनुसार कोखराज थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने दो जून वर्ष 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई की उसकी बेटी गांव के ही राजगीर के साथ काम करने गई थी। लेकिन वह घर वापस नहीं आई। प्राथमिकी में राजगीर पर वादिनी ने बेटी को गायब करने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की तो राजगीर की भूमिका संदिग्ध मिली। पीड़िता को मंझनपुर थाना क्षेत्र के मंगरोहनी से बरामद किया गया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि उसे सैनी के गड़रियन का पुरवा निवासी ऊदल नट ने मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर भगा ले गया था और मंगरोहनी में बंधक बनाकर रखा था, जहां उससे दुराचार किया गया।
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पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 में हुई। शासकीय अधिवक्ता रोहित कुमार यादव ने पीड़िता समेत कुल नौ गवाहों को परीक्षित कराया। उभय पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। आरोप साबित होने पर न्यायालय ने सात वर्ष के कैद की सजा सुनाते हुए 19 हजार का अर्थदंड लगाया।
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