{"_id":"5a65f94c4f1c1b82268b5bd4","slug":"consumers-roulette-electric-roster","type":"story","status":"publish","title_hn":"उपभोक्ताओं को रुला रहा बिजली का रोस्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उपभोक्ताओं को रुला रहा बिजली का रोस्टर
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में बिजली आपूर्ति के रोस्टर ने माह भर से उपभोक्ताओं को रुला रखा है। अलग-अलग स्थानों पर शाम के सात से साढ़े आठ बजे तक आपूर्ति बाधित कर दी जाती है। इसके बाद रात 11 से बारह बजे तक आपूर्ति दी जाती है। इसका सीधा असर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं पर पड़ता है। इसके अलावा घरों में गृहणियों को अंधेरे में भोजन पकाना व परोसना पड़ता है।
बिजली विभाग ने जिले में आपूर्ति के लिए रोस्टर निर्धारित कर रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे बिजली देने के लिए रोस्टर है लेकिन 18 घंटे बिजली मिलती नहीं है। रोस्टर ने ही उपभोक्ताओं माह भर से रुला रखा है। मनौरी, भरवारी व सिराथू उपकेंद्र के रोस्टर पर जाएं तो इलाके के उपभोक्ताओं की रात आठ से साढ़े आठ के बीच आपूर्ति ठप कर दी जाती है। इसके बाद साढ़े दस से 12 बजे रात बिजली दी जाती है।
छात्रों की पढ़ाई व गृहणियों के खाना बनाने के समय आपूर्ति कटने से बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर तो असर पड़ ही रहा है घर की महिलाओं को मोबाइल या फिर लालटेन की रोशनी में भोजन बनाना पड़ता है।
विज्ञापन
कमालपुर के 30 व दारानगर के 15 गांवों के उपभोक्ताओं में नाराजगी
सिराथू बिजली घर से आपूर्ति पा रहे कमालपुर व दारानगर गांवों के 45 गांवों के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। कमालपुर उपकेंद्र के फरीदगंज निवासी जूली सहगल का आरोप है कि शाम के सात बजते ही बिजली आपूर्ति कट जाती है। इसके बाद रात साढ़े दस के बाद सोने के समय आती है। खाना बनाने के ऐन वक्त पर बिजली आपूर्ति कटने से अंधेरे में काम करना पड़ता है। इसके अलावा बच्चे बगैर पढ़ाई किए ही सो जाते हैं। दारानगर उपकेंद्र की उपभोक्ता सविता अग्रहरी व देवीगंज के छात्र शुभम वर्मा का कहना है कि इस समय तो ठंड का मौसम है रात में पंखे की ज्यादा जरूरत नहीं है लेकिन अगर अंधेरे में बिजली न मिली तो बिजली किस काम की, सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
एसडीएम से शिकायत के बाद भी नहीं सुधरा रोस्टर
मनौरी पावर हाउस से इलाके के चायल, सरायअकिल, म्योहर, पेरवा, पुरखास सहित आधा दर्जन उपकेंद्र को 33 हजार केवीए की आपूर्ति की जाती है। यहां से उपकेंद्र की आपूर्ति रात के आठ बजते ही काट दी जाती है। इससे उपकेंद्र से जुड़े सैकड़ों गांवों में अंधेरा छा जाता है। इसके बाद बिजली की आपूर्ति रात के 11 से 12 बजे के बीच की जाती है। इस रोस्टर के चलते छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का काम तो प्रभावित होता ही है खेतों की सिंचाई करने वाले किसानों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। मामले की शिकायत सप्ताह भर पहले चायल खास के लोगों ने एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव से किया पर कोई बदलाव नहीं हो सका है। इसे लेकर इलाके के उपभोक्ताओं में नाराजगी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बिजली आपूर्ति का रोस्टर पावर कार्पोरेशन निर्धारित करता है। जिले स्तर से कोई निर्धारण नहीं है। रोस्टर बदलवाने के लिए विभाग के चेयरमैन से कहना होगा। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के मद्देनजर रिपोर्ट चेयरमैन को भेज दी गई है।
प्रभाकर पांडेय, एक्सईएन
विज्ञापन
बिजली विभाग ने जिले में आपूर्ति के लिए रोस्टर निर्धारित कर रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे बिजली देने के लिए रोस्टर है लेकिन 18 घंटे बिजली मिलती नहीं है। रोस्टर ने ही उपभोक्ताओं माह भर से रुला रखा है। मनौरी, भरवारी व सिराथू उपकेंद्र के रोस्टर पर जाएं तो इलाके के उपभोक्ताओं की रात आठ से साढ़े आठ के बीच आपूर्ति ठप कर दी जाती है। इसके बाद साढ़े दस से 12 बजे रात बिजली दी जाती है।
विज्ञापन
छात्रों की पढ़ाई व गृहणियों के खाना बनाने के समय आपूर्ति कटने से बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर तो असर पड़ ही रहा है घर की महिलाओं को मोबाइल या फिर लालटेन की रोशनी में भोजन बनाना पड़ता है।
विज्ञापन
कमालपुर के 30 व दारानगर के 15 गांवों के उपभोक्ताओं में नाराजगी
सिराथू बिजली घर से आपूर्ति पा रहे कमालपुर व दारानगर गांवों के 45 गांवों के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। कमालपुर उपकेंद्र के फरीदगंज निवासी जूली सहगल का आरोप है कि शाम के सात बजते ही बिजली आपूर्ति कट जाती है। इसके बाद रात साढ़े दस के बाद सोने के समय आती है। खाना बनाने के ऐन वक्त पर बिजली आपूर्ति कटने से अंधेरे में काम करना पड़ता है। इसके अलावा बच्चे बगैर पढ़ाई किए ही सो जाते हैं। दारानगर उपकेंद्र की उपभोक्ता सविता अग्रहरी व देवीगंज के छात्र शुभम वर्मा का कहना है कि इस समय तो ठंड का मौसम है रात में पंखे की ज्यादा जरूरत नहीं है लेकिन अगर अंधेरे में बिजली न मिली तो बिजली किस काम की, सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
एसडीएम से शिकायत के बाद भी नहीं सुधरा रोस्टर
मनौरी पावर हाउस से इलाके के चायल, सरायअकिल, म्योहर, पेरवा, पुरखास सहित आधा दर्जन उपकेंद्र को 33 हजार केवीए की आपूर्ति की जाती है। यहां से उपकेंद्र की आपूर्ति रात के आठ बजते ही काट दी जाती है। इससे उपकेंद्र से जुड़े सैकड़ों गांवों में अंधेरा छा जाता है। इसके बाद बिजली की आपूर्ति रात के 11 से 12 बजे के बीच की जाती है। इस रोस्टर के चलते छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का काम तो प्रभावित होता ही है खेतों की सिंचाई करने वाले किसानों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। मामले की शिकायत सप्ताह भर पहले चायल खास के लोगों ने एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव से किया पर कोई बदलाव नहीं हो सका है। इसे लेकर इलाके के उपभोक्ताओं में नाराजगी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बिजली आपूर्ति का रोस्टर पावर कार्पोरेशन निर्धारित करता है। जिले स्तर से कोई निर्धारण नहीं है। रोस्टर बदलवाने के लिए विभाग के चेयरमैन से कहना होगा। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के मद्देनजर रिपोर्ट चेयरमैन को भेज दी गई है।
प्रभाकर पांडेय, एक्सईएन