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कोहरे की धुंध से सड़कों पर छाया रहा अंधेरा
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 05 Jan 2017 12:45 AM IST
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दोआबा में पांच दिन से लगातार शीत लहर का प्रकोप जारी रहा। बुधवार की सुबह घने कोहरे के कारण लोगों को सड़क पर वाहनों की लाइट जलाकर चलना पड़ा। ठंड से कांप रहे लोगों को दोपहर के बाद अचानक राहत मिली। कोहरा छंटते ही पांच दिन बाद भगवान सूर्य के दर्शन हुए तो लोगों को भारी राहत मिली।
जिला पिछले पांच दिनों से कड़ाके की ठंड के आगोश में था। दिन में धूप न खिलने और सर्द हवाओं के चलने से लोग थर-थर कांप रहे थे। दिन हो या रात ठंड से राहत मिलती नहीं दिख रही थी। पांचवें दिन बुधवार की सुबह स्थिति और नाजुक हो गई। रात से शुरू हुआ घना कोहरा सुबह और तेज हो गया। दस से 11 बजे के बीच तो सड़क पर चलने वाले लोगों को बाइक और कार की लाइट जलाकर चलना पड़ रहा था।
12 बजे के बाद अचानक कोहरा धीरे-धीरे छंटने लगा। दोपहर लगभग एक बजे पांच दिन बाद अचानक खिली धूप दिखाई दी तो लोगों ने ठंड से राहत की सांस ली। सड़कों और बाजारों में धूप खिलते ही चहल-पहल बढ़ी तो दफ्तरों का सन्नाटा भी अचानक दूर होता नजर आया। इसके अलावा घरों में रजाई और अलाव में दुबके रहने वाले लोगों ने छत और दरवाजे पर बैठकर खिली धूप का भरपूर आनंद उठाया।
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नुकसान से बचेंगी फसलें
पांच दिन से लगातार पड़ रहे कोहरे और धूप न निकलने से रबी की फसलों पर मौसम की मार भारी पड़ रही थी। हालांकि पांच दिन में अधिक नुकसान फसलों का नहीं हो सका है। उप कृषि निदेशक सत्येंद्र सिंह चौहान की माने तो पांच दिन के भीतर आलू सहित सरसों, अरहर व चना की फसलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। यदि अब मौसम साफ हो जाता है और प्रतिदिन धूप खिली रहेगी तो इन फसलों में ठंड और पाले चलते होने वाले नुकसान में कमी आएगी। किसानों को फसलों का अधिक नुकसान नहीं उठाना होगा। आलू की पछेती खेती पर पाले और कोहरे का प्रभाव कुछ अधिक पड़ सकता है।
पशुपालकों को मिली राहत
दोआबा में खेती के बाद पशुपालन आय का प्रमुख साधन है। दूध का कारोबार यहां बड़े पैमाने पर होता है। पांच दिन से खराब हुए मौसम और शीतलहरी ने पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी थी। ठंड के चलते पशु जहां ठीक से चारा नहीं खा रहे थे वहीं दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा था। बुधवार की दोपहर धूप निकली तो ठंड से कांप रहे मवेशियों को बंद कमरों से बाहर निकाला गया। मवेशियों को धूप मिली तो उनके चेहरों की रौनक धीरे-धीरे लौटती नजर आई।
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जिला पिछले पांच दिनों से कड़ाके की ठंड के आगोश में था। दिन में धूप न खिलने और सर्द हवाओं के चलने से लोग थर-थर कांप रहे थे। दिन हो या रात ठंड से राहत मिलती नहीं दिख रही थी। पांचवें दिन बुधवार की सुबह स्थिति और नाजुक हो गई। रात से शुरू हुआ घना कोहरा सुबह और तेज हो गया। दस से 11 बजे के बीच तो सड़क पर चलने वाले लोगों को बाइक और कार की लाइट जलाकर चलना पड़ रहा था।
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12 बजे के बाद अचानक कोहरा धीरे-धीरे छंटने लगा। दोपहर लगभग एक बजे पांच दिन बाद अचानक खिली धूप दिखाई दी तो लोगों ने ठंड से राहत की सांस ली। सड़कों और बाजारों में धूप खिलते ही चहल-पहल बढ़ी तो दफ्तरों का सन्नाटा भी अचानक दूर होता नजर आया। इसके अलावा घरों में रजाई और अलाव में दुबके रहने वाले लोगों ने छत और दरवाजे पर बैठकर खिली धूप का भरपूर आनंद उठाया।
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नुकसान से बचेंगी फसलें
पांच दिन से लगातार पड़ रहे कोहरे और धूप न निकलने से रबी की फसलों पर मौसम की मार भारी पड़ रही थी। हालांकि पांच दिन में अधिक नुकसान फसलों का नहीं हो सका है। उप कृषि निदेशक सत्येंद्र सिंह चौहान की माने तो पांच दिन के भीतर आलू सहित सरसों, अरहर व चना की फसलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। यदि अब मौसम साफ हो जाता है और प्रतिदिन धूप खिली रहेगी तो इन फसलों में ठंड और पाले चलते होने वाले नुकसान में कमी आएगी। किसानों को फसलों का अधिक नुकसान नहीं उठाना होगा। आलू की पछेती खेती पर पाले और कोहरे का प्रभाव कुछ अधिक पड़ सकता है।
पशुपालकों को मिली राहत
दोआबा में खेती के बाद पशुपालन आय का प्रमुख साधन है। दूध का कारोबार यहां बड़े पैमाने पर होता है। पांच दिन से खराब हुए मौसम और शीतलहरी ने पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी थी। ठंड के चलते पशु जहां ठीक से चारा नहीं खा रहे थे वहीं दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा था। बुधवार की दोपहर धूप निकली तो ठंड से कांप रहे मवेशियों को बंद कमरों से बाहर निकाला गया। मवेशियों को धूप मिली तो उनके चेहरों की रौनक धीरे-धीरे लौटती नजर आई।