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ठर्रा के धंधेबाजों की धरपकड़, ठेकों की जांच नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 08 Feb 2015 12:32 AM IST
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सिराथू/अजुहा(ब्यूरो)। जहरीली शराब पीने से बुधवार की रात बिदनपुर गांव के चार मजदूरों की मौत हो गई थी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन मजदूरों ने देशी मिलावटी शराब पी थी। शराब पीने से आए दिन होने वाली मौतोेें के बाद भी पुलिस और आबकारी विभाग की जांच सिर्फ गांवों में देशी महुआ की शराब बनाने वाले धंधेबाजों की धरपकड़ तक ही सिमटी रहती है। जबकि ठेके पर बिकने वाली देशी दारू पीकर भी आए दिन नशेड़ी बेसुध पड़े मिलते हैं।
मलिहाबाद में 12 जनवरी को शराब पीने से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं चार फरवरी की रात जहरीली शराब के सेवन से बिदनपुर (कौशाम्बी) के भी चार मजदूर महेंद्र कुमार, अमरनाथ, श्रीपति और विशेषर की मौत हो गई थी। कौशाम्बी के 4 युवकों की मौत के बाद जांच में जुटी आबकारी और पुलिस की टीम ने मजदूरों के कमरों की जांच के लिए चकेरी (कानपुर) में दबिश दी थी। पुलिस और आबकारी टीम को मजदूरों के कमरे से देशी शराब की शीशी मिली थी। जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
उधर, हादसों के बाद पुलिस शराब के धंधेबाजों के खिलाफ फिर से अभियान छेड़ रखा है। पर, यह अभियान भी हमेशा की तरह इस बार भी केवल गांव में भट्ठी बनाकर महुआ की कच्ची शराब बनाने वालों की धरपकड़ तक ही सिमटा है। क्षेत्र के सरकारी ठेकों पर मिलावटी देशी और अंग्रेजी शराब की जांच नहीं की जाती है। जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन ठेकों पर भी मिलावटी शराब की धड़ल्ले से बिकवाली होती है।
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इतना ही नहीं आए दिन सरकारी ठेकों पर ही देशी दारू पीकर नशेड़ी अचेत पड़े मिलते हैं। शनिवार को सैनी स्थित ठेके पर भी पीकर एक युवक घंटो अचेत पड़ा रहा। जबकि विभागीय नियम देखें तो सरकारी ठेके पर शराब बेचने की अनुमति होती है, पीने की नहीं। इसके बावजूद शराब माफियाओं के इशारे पर ये ठेके में पीने-पिलाने का खेल भी बदस्तूर जारी है।
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मलिहाबाद में 12 जनवरी को शराब पीने से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं चार फरवरी की रात जहरीली शराब के सेवन से बिदनपुर (कौशाम्बी) के भी चार मजदूर महेंद्र कुमार, अमरनाथ, श्रीपति और विशेषर की मौत हो गई थी। कौशाम्बी के 4 युवकों की मौत के बाद जांच में जुटी आबकारी और पुलिस की टीम ने मजदूरों के कमरों की जांच के लिए चकेरी (कानपुर) में दबिश दी थी। पुलिस और आबकारी टीम को मजदूरों के कमरे से देशी शराब की शीशी मिली थी। जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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उधर, हादसों के बाद पुलिस शराब के धंधेबाजों के खिलाफ फिर से अभियान छेड़ रखा है। पर, यह अभियान भी हमेशा की तरह इस बार भी केवल गांव में भट्ठी बनाकर महुआ की कच्ची शराब बनाने वालों की धरपकड़ तक ही सिमटा है। क्षेत्र के सरकारी ठेकों पर मिलावटी देशी और अंग्रेजी शराब की जांच नहीं की जाती है। जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन ठेकों पर भी मिलावटी शराब की धड़ल्ले से बिकवाली होती है।
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इतना ही नहीं आए दिन सरकारी ठेकों पर ही देशी दारू पीकर नशेड़ी अचेत पड़े मिलते हैं। शनिवार को सैनी स्थित ठेके पर भी पीकर एक युवक घंटो अचेत पड़ा रहा। जबकि विभागीय नियम देखें तो सरकारी ठेके पर शराब बेचने की अनुमति होती है, पीने की नहीं। इसके बावजूद शराब माफियाओं के इशारे पर ये ठेके में पीने-पिलाने का खेल भी बदस्तूर जारी है।