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Kaushambi News: अपने काडर मतों को भी सहेज नहीं पाए बसपा के शुभ नारायण
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19 लाख वोटरों वाले कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र में दलित मतदाताओं की संख्या है सात लाख से अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। लोकसभा चुनाव के नतीजों में एक बार फिर बसपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त उठानी पड़ी। ढाई दशक के सियासी सफर में बसपा का कभी इतना खराब प्रदर्शन नहीं रहा। चुनाव में पार्टी प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। साफ है कि पार्टी प्रत्याशी शुभनारायण काडर मतों को भी सहेजने में नाकाम रहे।
अनुसूचित जाति की बहुलता के कारण कौशाम्बी संसदीय सीट इस वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां के 19 लाख वोटरों में तकरीबन सात लाख से अधिक दलित मतदाता हैं। इनमें सर्वाधिक चार लाख के करीब पासी और फिर डेढ़ लाख से अधिक वोटरों के साथ दूसरे नंबर पर चमार बिरादरी की संख्या है। ये सभी बहुजन समाज पार्टी के काडर मतों में गिने जाते थे।
वर्ष 1996 के बाद से 2014 तक हुए चुनाव इसकी गवाही देते हैं। मोदी लहर के बाद हालात बदले जरूर, लेकिन चुनाव में बसपा के इतने खराब प्रदर्शन की उम्मीद किसी को नहीं थी।
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दरअसल, पिछले चुनाव में गठबंधन के तहत कौशाम्बी संसदीय सीट सपा के खाते में चली गई थी। चुनावी समर में पार्टी प्रत्याशी नहीं होने के कारण 2019 के चुनाव में पार्टी का काडर मत बिखर गया था। इसे सहेजने के लिए इस बार बसपा ने सेवानिवृत्त डीएसपी शुभनारायण को मैदान में उतारा। शुभनारायण को काडर कार्यकर्ता माना जाता है। मंगलवार को आए नतीजों के मुताबिक शुभनारायण समूचे काडर मतों को सहेजने की बात तो दूर रही, बिरादरी का भी भरोसा नहीं जीत सके।
इनसेट
सिर्फ एक बार ही बन सका बसपा का सांसद
मंझनपुर। तत्कालीन चायल सुरक्षित (अब कौशाम्बी) संसदीय सीट पर बसपा नौ बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है। पहला चुनाव 1989 में लड़ा था। बसपा के आरडी सरोज ने 13.33 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस के गढ़ में दमदार एंट्री तो की थी। लेकिन हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1996 के आम चुनाव में पार्टी प्रत्याशी शशि प्रकाश तीसरे नंबर पर रहे। लेकिन वह सपा के सुरेश पासी से मात्र 413 वोट पीछे रह गए थे। दो साल बाद हुए मध्यावधि चुनाव में भी पार्टी प्रत्याशी 25.59 फीसदी वोट हासिल कर तीसरे पायदान पर रहे। इसके अगले ही साल हुए आम चुनाव में पार्टी ने दमदार वापसी करते हुए सीट पर कब्जा कर लिया था। संवाद
पांच लोकसभा चुनाव में बसपा को मिले मत पर एक नजर
वर्ष मिले मत प्रतिशत स्थान
1989 48,356 13.39 तीसरा
1991 39,952 11.25 चौथा
1996 99,847 26.89 दूसरा
1998 1,40,457 25.59 तीसरा
1999 1,51,557 29.91 विजयी
2004 1,95,576 35.22 दूसरा
2009 1,90,712 34.59 दूसरा
2014 20,11,96 21.99 तीसरा
2019 सपा गठबंधन के खाते में--
2024-- -- -- - -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। लोकसभा चुनाव के नतीजों में एक बार फिर बसपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त उठानी पड़ी। ढाई दशक के सियासी सफर में बसपा का कभी इतना खराब प्रदर्शन नहीं रहा। चुनाव में पार्टी प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। साफ है कि पार्टी प्रत्याशी शुभनारायण काडर मतों को भी सहेजने में नाकाम रहे।
अनुसूचित जाति की बहुलता के कारण कौशाम्बी संसदीय सीट इस वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां के 19 लाख वोटरों में तकरीबन सात लाख से अधिक दलित मतदाता हैं। इनमें सर्वाधिक चार लाख के करीब पासी और फिर डेढ़ लाख से अधिक वोटरों के साथ दूसरे नंबर पर चमार बिरादरी की संख्या है। ये सभी बहुजन समाज पार्टी के काडर मतों में गिने जाते थे।
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वर्ष 1996 के बाद से 2014 तक हुए चुनाव इसकी गवाही देते हैं। मोदी लहर के बाद हालात बदले जरूर, लेकिन चुनाव में बसपा के इतने खराब प्रदर्शन की उम्मीद किसी को नहीं थी।
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दरअसल, पिछले चुनाव में गठबंधन के तहत कौशाम्बी संसदीय सीट सपा के खाते में चली गई थी। चुनावी समर में पार्टी प्रत्याशी नहीं होने के कारण 2019 के चुनाव में पार्टी का काडर मत बिखर गया था। इसे सहेजने के लिए इस बार बसपा ने सेवानिवृत्त डीएसपी शुभनारायण को मैदान में उतारा। शुभनारायण को काडर कार्यकर्ता माना जाता है। मंगलवार को आए नतीजों के मुताबिक शुभनारायण समूचे काडर मतों को सहेजने की बात तो दूर रही, बिरादरी का भी भरोसा नहीं जीत सके।
इनसेट
सिर्फ एक बार ही बन सका बसपा का सांसद
मंझनपुर। तत्कालीन चायल सुरक्षित (अब कौशाम्बी) संसदीय सीट पर बसपा नौ बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है। पहला चुनाव 1989 में लड़ा था। बसपा के आरडी सरोज ने 13.33 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस के गढ़ में दमदार एंट्री तो की थी। लेकिन हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1996 के आम चुनाव में पार्टी प्रत्याशी शशि प्रकाश तीसरे नंबर पर रहे। लेकिन वह सपा के सुरेश पासी से मात्र 413 वोट पीछे रह गए थे। दो साल बाद हुए मध्यावधि चुनाव में भी पार्टी प्रत्याशी 25.59 फीसदी वोट हासिल कर तीसरे पायदान पर रहे। इसके अगले ही साल हुए आम चुनाव में पार्टी ने दमदार वापसी करते हुए सीट पर कब्जा कर लिया था। संवाद
पांच लोकसभा चुनाव में बसपा को मिले मत पर एक नजर
वर्ष मिले मत प्रतिशत स्थान
1989 48,356 13.39 तीसरा
1991 39,952 11.25 चौथा
1996 99,847 26.89 दूसरा
1998 1,40,457 25.59 तीसरा
1999 1,51,557 29.91 विजयी
2004 1,95,576 35.22 दूसरा
2009 1,90,712 34.59 दूसरा
2014 20,11,96 21.99 तीसरा
2019 सपा गठबंधन के खाते में
2024