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Kaushambi News: सौदेबाजों के शिकंजे को तोड़ बिटिया ने जगाई शिक्षा की अलख
Sat, 22 Nov 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:10 AM IST
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सोनाली सिंह
मंझनपुर। मां बचपन से ही मारती-पीटती थी। पिता विरोध नहीं करते थे। 14 साल की हुई तो मां-बाप ने उसका सौदा कर दिया। उम्रदराज खरीदार जबरन उसे अपने घर ले गया, जहां हर पल उसके बेचैनी में कटे। वह पढ़ना चाहती थी। एक दिन मौका मिला और वह कैदखाने की जंजीरें तोड़ निकल भागी। पुलिस की मदद ली। आज वह स्कूल में भविष्य के सपने बुन रही है। यह कहानी एक साहसी बिटिया की है।
घटना करारी थाना क्षेत्र की है। आश्रम पद्धति विद्यालय में आठवीं की छात्रा ने बताया कि 25 नवंबर 2024 का दिन उसे हमेशा याद रहेगा। मां-बाप ने उसे एक अधेड़ व्यक्ति के हाथों पांच लाख रुपये में बेच दिया था। वह तैयार न थी।
किसी तरह उसे नशीली दवा खिलाकर रात में ले जाया गया। वह विरोध करती रही और रोज शराब के नशे में रस्सी से बांधकर उसे पीटा जाता रहा। रातें डर और चीखों से भरी होती थीं, जिसे कोई सुनने वाला नहीं था। मिन्नतें करती तो जवाब मिलता कि लाखों रुपये देकर लाया हूं, जो कहा जाए वही करो।
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13 मार्च 2025 को उसे मौका मिला, वह घर से निकल भागी। सीधे अलीगंज रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से भरवारी और फिर अपने घर पहुंच गई। लेकिन दुर्भाग्य ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। घर वालों ने फिर उसे मारना-पीटना शुरू कर दिया। होली के दिन सब लोग रंग खेल रहे थे और मां उसी आदमी के पास लौट जाने को कह रही थी। थोड़ी ही देर में वह व्यक्ति तीन लोगों के साथ फिर उसे लेने पहुंच गया। छात्रा ने लोगों से मदद मांगी। निराशा हाथ लगी। मौका देख उसने मां के फोन से 112 नंबर पर
कॉल किया। फोन कटने के थोड़ी देर बाद ही पुलिस पहुंच गई। इधर, सौदेबाज पड़ोसी और माता-पिता फरार हो गए। पुलिस ने छात्रा को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी को सौैंप दिया। दो दिनों में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। संवाद
फूफा ने दिया साथ
छात्रा की मदद के लिए उसके फूफा सामने आए। उनकी पहल से वह तत्कालीन डीएम मधुसूदन हुल्गी से मिली। उसका पंजीकरण आश्रम पद्धति विद्यालय में हो गया। आज वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रही है। छोटा भाई व बहन नानी के घर पर हैं।
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मंझनपुर। मां बचपन से ही मारती-पीटती थी। पिता विरोध नहीं करते थे। 14 साल की हुई तो मां-बाप ने उसका सौदा कर दिया। उम्रदराज खरीदार जबरन उसे अपने घर ले गया, जहां हर पल उसके बेचैनी में कटे। वह पढ़ना चाहती थी। एक दिन मौका मिला और वह कैदखाने की जंजीरें तोड़ निकल भागी। पुलिस की मदद ली। आज वह स्कूल में भविष्य के सपने बुन रही है। यह कहानी एक साहसी बिटिया की है।
घटना करारी थाना क्षेत्र की है। आश्रम पद्धति विद्यालय में आठवीं की छात्रा ने बताया कि 25 नवंबर 2024 का दिन उसे हमेशा याद रहेगा। मां-बाप ने उसे एक अधेड़ व्यक्ति के हाथों पांच लाख रुपये में बेच दिया था। वह तैयार न थी।
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किसी तरह उसे नशीली दवा खिलाकर रात में ले जाया गया। वह विरोध करती रही और रोज शराब के नशे में रस्सी से बांधकर उसे पीटा जाता रहा। रातें डर और चीखों से भरी होती थीं, जिसे कोई सुनने वाला नहीं था। मिन्नतें करती तो जवाब मिलता कि लाखों रुपये देकर लाया हूं, जो कहा जाए वही करो।
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13 मार्च 2025 को उसे मौका मिला, वह घर से निकल भागी। सीधे अलीगंज रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से भरवारी और फिर अपने घर पहुंच गई। लेकिन दुर्भाग्य ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। घर वालों ने फिर उसे मारना-पीटना शुरू कर दिया। होली के दिन सब लोग रंग खेल रहे थे और मां उसी आदमी के पास लौट जाने को कह रही थी। थोड़ी ही देर में वह व्यक्ति तीन लोगों के साथ फिर उसे लेने पहुंच गया। छात्रा ने लोगों से मदद मांगी। निराशा हाथ लगी। मौका देख उसने मां के फोन से 112 नंबर पर
कॉल किया। फोन कटने के थोड़ी देर बाद ही पुलिस पहुंच गई। इधर, सौदेबाज पड़ोसी और माता-पिता फरार हो गए। पुलिस ने छात्रा को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी को सौैंप दिया। दो दिनों में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। संवाद
फूफा ने दिया साथ
छात्रा की मदद के लिए उसके फूफा सामने आए। उनकी पहल से वह तत्कालीन डीएम मधुसूदन हुल्गी से मिली। उसका पंजीकरण आश्रम पद्धति विद्यालय में हो गया। आज वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रही है। छोटा भाई व बहन नानी के घर पर हैं।