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दोआबा में गोबर से बरसेगा पैसा
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 12 Jun 2016 11:51 PM IST
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दोआबा में गोबर से पैसा बरसेगा। घरों में लगने वाले बायोगैस प्लांट का अब कामर्शियल उपयोग करने की तैयारी है। डीएम अखंड प्रताप सिंह की कवायद सफल रही तो वो दिन दूर नहीं जब बायोगैस का सिलेंडर बाजार में बिकेगा। लगभग तैयारी पूरी हो चुकी है। परीक्षण होना बाकी है। ऐसे में जिले के बेरोजगारों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी।
डीएम अखंड प्रताप सिंह की पहल से स्वच्छता मिशन अंतर्गत गांवों में बायोगैस प्लांट लगाए जाने की कवायद तेज हो गई है। ढाई हजार के शुरुआती लक्ष्य को निर्धारित कर डीएम ने गांव-गांव प्लांट की स्थापना शुरू करा दी है। ओडीएफ यानि खुले में गंदगी से मुक्त गांव की योजना में लोगों की रुचि देखते अब बायोगैस प्लांट को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानकारों की मानें तो एक प्लांट से इतनी गैस निकलेगी कि पांच से छह लोगों के परिवार को भोजन बनाने के लिए पर्याप्त होगी। वहीं इसे कमाई का साधन बनाने की भी तैयारी है। प्लांट से बायोगैस को सिलेंडर में रिफिल करने की तैयारी है।
इस गैस को प्लांट मालिक रेस्तरां, चाय और मिष्ठान के दुकानदारों के यहां से आसानी से बेंच सकेंगे। खास बात यह कि दुकानदारों द्वारा प्रयोग में लाई जा रही एलपीजी की तुलना में इस गैस की कीमत कम होगी। ऐसे में प्लांट मालिक के साथ-साथ दुकानदारों को भी फायदा होगा। रिफलिंग सिस्टम को डीएम ने राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड नियोजन विभाग के समन्वयक पीएस ओझा से वार्ता कर मंगवाया है। सिस्टम के आते ही इसका प्रथम परीक्षण डीएम आवास में बने प्लांट में कराया जाएगा। सफलता मिलते ही इसे गांव-गांव में बन रहे प्लांट मालिकों को दिया जाएगा।
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बायोगैस के फिलिंग और उसे बाजार में बेचने के लिए के किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड नियोजन विभाग उत्तर प्रदेश से संस्तुति मिलेगी। इस बावत डीएम अखंड प्रताप सिंह लगातार राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड के सदस्य संयोजक से वार्ता कर रहे हैं। जल्द ही इसे मूर्त रूप देने के लिए बोर्ड के सदस्यों का भ्रमण जिले में होना शुरू हो जाएगा।
गांवों में लोग घरों से निकलने वाले सब्जी, फलों आदि के अपशिष्ट को रास्ते मे फेंक देते हैं। इसके अलावा जानवरों का गोबर भी गली-गली फैला रहता है। इसे कोई भी साफ नहीं करना चाहता। गांवों में लगे पेड़ों की पत्तियां और खर-पतवार भी इधर-उधर फैले रहते हैं लेकिन बायोगैस प्लांट स्थापित होने के बाद इन सबकी खपत होने लगेगी। प्लांट में डालने के बाद इनके सड़ने पर अच्छी बायोगैस निकलेगी जो लोगों का भोजन मुफ्त में तो पकाएगी ही कमाई भी कराएगी।
बायोगैस प्लांट लगाने वाले लोगों के खेतों को मुफ्त में उर्वरा शक्ति मिलेगी। प्लांट में सड़ने के बाद निकलने वाले अपशिष्ट की खाद इतनी ताकतवर होती है कि उसे खेत में डालने से पौधों को नाममात्र की उर्वरक की जरूरत पड़ेगी। यूं कहें कि भोजन पकाने, कमाई कराने के अलावा खेतों की भी सेहत सुधरना शुरू हो जाएगी। ऐसे में एक प्लांट से होने वाले तीन-तीन फायदों को भला कौन नहीं लेना चाहेगा।
बायोगैस प्लांट लगवाना जिले का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसकी सफलता के लिए पुरजोर कोशिश जारी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इसे अंजाम तक पहुंचा दिया जाएगा। बायोगैस प्लांट जिले के लोगों के लिए हर तरह से मुफीद साबित होगा। सबसे ज्यादा फायदा ये है कि बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। लोगों की आय में वृद्धि होगी।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम
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डीएम अखंड प्रताप सिंह की पहल से स्वच्छता मिशन अंतर्गत गांवों में बायोगैस प्लांट लगाए जाने की कवायद तेज हो गई है। ढाई हजार के शुरुआती लक्ष्य को निर्धारित कर डीएम ने गांव-गांव प्लांट की स्थापना शुरू करा दी है। ओडीएफ यानि खुले में गंदगी से मुक्त गांव की योजना में लोगों की रुचि देखते अब बायोगैस प्लांट को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानकारों की मानें तो एक प्लांट से इतनी गैस निकलेगी कि पांच से छह लोगों के परिवार को भोजन बनाने के लिए पर्याप्त होगी। वहीं इसे कमाई का साधन बनाने की भी तैयारी है। प्लांट से बायोगैस को सिलेंडर में रिफिल करने की तैयारी है।
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इस गैस को प्लांट मालिक रेस्तरां, चाय और मिष्ठान के दुकानदारों के यहां से आसानी से बेंच सकेंगे। खास बात यह कि दुकानदारों द्वारा प्रयोग में लाई जा रही एलपीजी की तुलना में इस गैस की कीमत कम होगी। ऐसे में प्लांट मालिक के साथ-साथ दुकानदारों को भी फायदा होगा। रिफलिंग सिस्टम को डीएम ने राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड नियोजन विभाग के समन्वयक पीएस ओझा से वार्ता कर मंगवाया है। सिस्टम के आते ही इसका प्रथम परीक्षण डीएम आवास में बने प्लांट में कराया जाएगा। सफलता मिलते ही इसे गांव-गांव में बन रहे प्लांट मालिकों को दिया जाएगा।
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बायोगैस के फिलिंग और उसे बाजार में बेचने के लिए के किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड नियोजन विभाग उत्तर प्रदेश से संस्तुति मिलेगी। इस बावत डीएम अखंड प्रताप सिंह लगातार राज्य ऊर्जा विकास बोर्ड के सदस्य संयोजक से वार्ता कर रहे हैं। जल्द ही इसे मूर्त रूप देने के लिए बोर्ड के सदस्यों का भ्रमण जिले में होना शुरू हो जाएगा।
गांवों में लोग घरों से निकलने वाले सब्जी, फलों आदि के अपशिष्ट को रास्ते मे फेंक देते हैं। इसके अलावा जानवरों का गोबर भी गली-गली फैला रहता है। इसे कोई भी साफ नहीं करना चाहता। गांवों में लगे पेड़ों की पत्तियां और खर-पतवार भी इधर-उधर फैले रहते हैं लेकिन बायोगैस प्लांट स्थापित होने के बाद इन सबकी खपत होने लगेगी। प्लांट में डालने के बाद इनके सड़ने पर अच्छी बायोगैस निकलेगी जो लोगों का भोजन मुफ्त में तो पकाएगी ही कमाई भी कराएगी।
बायोगैस प्लांट लगाने वाले लोगों के खेतों को मुफ्त में उर्वरा शक्ति मिलेगी। प्लांट में सड़ने के बाद निकलने वाले अपशिष्ट की खाद इतनी ताकतवर होती है कि उसे खेत में डालने से पौधों को नाममात्र की उर्वरक की जरूरत पड़ेगी। यूं कहें कि भोजन पकाने, कमाई कराने के अलावा खेतों की भी सेहत सुधरना शुरू हो जाएगी। ऐसे में एक प्लांट से होने वाले तीन-तीन फायदों को भला कौन नहीं लेना चाहेगा।
बायोगैस प्लांट लगवाना जिले का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसकी सफलता के लिए पुरजोर कोशिश जारी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इसे अंजाम तक पहुंचा दिया जाएगा। बायोगैस प्लांट जिले के लोगों के लिए हर तरह से मुफीद साबित होगा। सबसे ज्यादा फायदा ये है कि बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। लोगों की आय में वृद्धि होगी।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम