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ओडीएफ हुए गांवों में घर-घर लगेंगे बायोगैस प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:31 AM IST
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दोआबा में ओडीएफ हो रही ग्राम सभाओं में घर-घर बायोगैस प्लांट लगेंगे। इसके लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने दो माह पहले नई पहल शुरू की थी। पहल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बायोगैस प्लांट की बारीकियों पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने डीपीआरओ को बंगलौर भेजा है। बंगलौर में निर्माण की बारीकियों को समझने के बाद डीपीआरओ के लौटते ही ओडीएफ हुए गांवों में इसका सफल प्रयोग शुरू कर दिया जाएगा।
दोआबा में ग्राम सभाओं को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) कराने के लिए शासन के निर्देश पर अभियान चल रहा है। गांवों में खरपतवार, गोबर और सब्जी आदि के अपशिष्ट की गंदगी बराबर बनी रहेगी। गांव पूरी तरह से साफ सुथरा नजर आए इसके लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने ओडीएफ का दूसरा रूप (ओपेन डर्ट फ्री) लागू किया है। इसे सफल बनाने के लिए उन्होंने ओडीएफ हो रहे गांवों में बायोगैस प्लांट लगवाने की पहल दो माह पहले शुरू की। अपने कैंप कार्यालय में उन्होंने इसका सफल प्रयोग भी किया। इस बीच उन्हें जानकारी हुई कि कर्नाटक राज्य में बायोगैस प्लांट का अच्छा प्रयोग हो रहा है। इस पर उन्होंने डीपीआरओ कमल किशोर को पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेने के लिए बंगलौर भेज दिया है।
बायोगैस प्लांट के लिए दिया जा रहा अनुदान
गांवों को साफ-सुथरा बनाने के लिए शासन पानी की तरह रुपया बहा रहा है। ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हुए गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अंतर्गत बायोगैस प्लांट लगवाए जा रहे हैं। इसके तहत लाभार्थी को स्वच्छ भारत मिशन योजना से 40 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। 53 हजार के प्रोजेक्ट में 13 हजार रुपये लाभार्थी को अपने पास से लगाना होगा। प्लांट स्थापित होने के बाद कूड़ा-कचरा से लाभार्थी को मुफ्त में रसोई गैस मिलना शुरू हो जाएगा। इससे साफ हो गया है कि शासन की पहल से जहां गांव खुले में शौच से मुक्त होंगे वहीं दूसरी ओर डीएम की पहल से इन गांवों को गंदगी से मुक्ति मिलेगी।
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गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के साथ-साथ डर्ट फ्री बनाना भी प्राथमिकता है। इसके लिए बायोगैस प्लांट उत्तम माध्यम साबित होगा। इसकी कवायद जिले में शुरू है। डीपीआरओ के प्रशिक्षण से लौटने के बाद तकनीकी तरीके से निर्माण और प्रयोग शुरू करा दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम कौशाम्बी
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दोआबा में ग्राम सभाओं को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) कराने के लिए शासन के निर्देश पर अभियान चल रहा है। गांवों में खरपतवार, गोबर और सब्जी आदि के अपशिष्ट की गंदगी बराबर बनी रहेगी। गांव पूरी तरह से साफ सुथरा नजर आए इसके लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने ओडीएफ का दूसरा रूप (ओपेन डर्ट फ्री) लागू किया है। इसे सफल बनाने के लिए उन्होंने ओडीएफ हो रहे गांवों में बायोगैस प्लांट लगवाने की पहल दो माह पहले शुरू की। अपने कैंप कार्यालय में उन्होंने इसका सफल प्रयोग भी किया। इस बीच उन्हें जानकारी हुई कि कर्नाटक राज्य में बायोगैस प्लांट का अच्छा प्रयोग हो रहा है। इस पर उन्होंने डीपीआरओ कमल किशोर को पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेने के लिए बंगलौर भेज दिया है।
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बायोगैस प्लांट के लिए दिया जा रहा अनुदान
गांवों को साफ-सुथरा बनाने के लिए शासन पानी की तरह रुपया बहा रहा है। ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हुए गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अंतर्गत बायोगैस प्लांट लगवाए जा रहे हैं। इसके तहत लाभार्थी को स्वच्छ भारत मिशन योजना से 40 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। 53 हजार के प्रोजेक्ट में 13 हजार रुपये लाभार्थी को अपने पास से लगाना होगा। प्लांट स्थापित होने के बाद कूड़ा-कचरा से लाभार्थी को मुफ्त में रसोई गैस मिलना शुरू हो जाएगा। इससे साफ हो गया है कि शासन की पहल से जहां गांव खुले में शौच से मुक्त होंगे वहीं दूसरी ओर डीएम की पहल से इन गांवों को गंदगी से मुक्ति मिलेगी।
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गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के साथ-साथ डर्ट फ्री बनाना भी प्राथमिकता है। इसके लिए बायोगैस प्लांट उत्तम माध्यम साबित होगा। इसकी कवायद जिले में शुरू है। डीपीआरओ के प्रशिक्षण से लौटने के बाद तकनीकी तरीके से निर्माण और प्रयोग शुरू करा दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम कौशाम्बी