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Kaushambi News: आयुष अस्पताल में आयुर्वेदिक व यूनानी दवाओं की कमी, बाहर से खरीदनी पड़ रही
Fri, 17 Apr 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 17 Apr 2026 12:29 AM IST
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50 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय सिराथू संवाद
50 बेड के आयुष अस्पताल में डेढ़ साल से आयुर्वेदिक व यूनानी दवाओं की कमी से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। लगभग एक साल से जरूरी दवाइयां न मिलने से मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है। हालांकि डॉक्टरों का दावा है आयुर्वेदिक व यूनानी की कुछ दवा भेजी गई हैं। फिर भी महत्वपूर्ण दवाओं अभाव है। सिराथू धाता रोड पर स्थित एकीकृत आयुष चिकित्सालय में आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक, योगा, फिजियोथैरेपी से उपचार पद्धति की व्यवस्था के साथ पंचकर्मा, क्षारसूत्र व पैथोलॉजी की सुविधा है। अधीक्षक सहित छह अन्य चिकित्सकों की नियुक्ति है। ओपीडी में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
इसके बावजूद आयुर्वेदिक में पेट की बीमारी के लिए, अग्नि टुंडी वटी, त्रिफला चूर्ण ,चित्रकादि वटी आरोग्यवर्धनी वटी, ब्लड प्रेशर के लिए सर्पगंधा वटी, प्रसुताओं के लिए दशमूलारिष्ट, बुखार व मधुमेह के लिए चिरायता, सहित अन्य महत्वपूर्ण दवाई नहीं है।
वहीं, यूनानी में सर्दी जुकाम खांसी के लिए शरवते उन्नाव, बुखार के लिए शरवते बरियान, जोड़ों के दर्द का रोगन सुर्ख तेल आदि जरूरी दवा स्टाॅक में नहीं है। ऐसे में अस्पताल पहुंचे मरीजों का होम्योपैथिक पद्धति से इलाज कर वापस लौटा दिया जाता है।
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रामपुर धमावां गांव की कल्पना तिवारी, बालीपुर नारा के अर्जुन पाल ने बताया सांस की बीमारी के लिए आयुर्वेदिक इलाज कारगर साबित हो रहा था, लेकिन साल भर से दवाई न मिलने से परेशानी हो रही है ऐसे में मजबूरन बाजार से दवा खरीदने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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इसके बावजूद आयुर्वेदिक में पेट की बीमारी के लिए, अग्नि टुंडी वटी, त्रिफला चूर्ण ,चित्रकादि वटी आरोग्यवर्धनी वटी, ब्लड प्रेशर के लिए सर्पगंधा वटी, प्रसुताओं के लिए दशमूलारिष्ट, बुखार व मधुमेह के लिए चिरायता, सहित अन्य महत्वपूर्ण दवाई नहीं है।
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वहीं, यूनानी में सर्दी जुकाम खांसी के लिए शरवते उन्नाव, बुखार के लिए शरवते बरियान, जोड़ों के दर्द का रोगन सुर्ख तेल आदि जरूरी दवा स्टाॅक में नहीं है। ऐसे में अस्पताल पहुंचे मरीजों का होम्योपैथिक पद्धति से इलाज कर वापस लौटा दिया जाता है।
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रामपुर धमावां गांव की कल्पना तिवारी, बालीपुर नारा के अर्जुन पाल ने बताया सांस की बीमारी के लिए आयुर्वेदिक इलाज कारगर साबित हो रहा था, लेकिन साल भर से दवाई न मिलने से परेशानी हो रही है ऐसे में मजबूरन बाजार से दवा खरीदने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।