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Kaushambi News: आवास न पेंशन... सरकारी योजनाओं से कोसों दूर है एथलीट कौशल्या का परिवार
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। एथलीट कौशल्या का परिवार सरकारी योजनाओं से पूरी तरह से बेजार है। परिवार को न तो प्रधानमंत्री आवास मिला और न ही बीमार मां-बाप को पेंशन योजना का लाभ। गोल्डन कार्ड भी अब तक नहीं जारी किया जा सका। सरकारी योजना के नाम पर सिर्फ राशनकार्ड ही बनाया गया है।
पश्चिमशरीरा के भरोसे का डेरा निवासी 17 वर्षीय कौशल्या ने 2022 में सांसद खेल स्पर्धा में 3000 मीटर दौड़ में पहला स्थान प्राप्त किया था। साल भर बाद 1500 मीटर दौड़ में ओपन स्टेट लेवल चैंपियनशिप में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया। खेल के अभ्यास के लिए वह रोजाना सुबह साढ़े चार बजे साइकिल से 15 किमी का सफर तय कर टेंवा स्थित स्टेडियम आती-जाती हैं। ईंट-भट्ठे व खेत में मजदूरी करती हैं।
पिता बच्चीलाल लकवा से ग्रसित हैं तो मां हृदय रोग से पीड़ित हैं। सरकारी सुविधा के नाम पर कौशल्या के परिवार के पास केवल राशन कार्ड है। इसके अलावा कुछ नहीं है। आज भी वह कच्चे घर में रहती है। कौशल्या ने बताया कि आवास के लिए चेयरमैन से कहा था, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
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मंझनपुर। एथलीट कौशल्या का परिवार सरकारी योजनाओं से पूरी तरह से बेजार है। परिवार को न तो प्रधानमंत्री आवास मिला और न ही बीमार मां-बाप को पेंशन योजना का लाभ। गोल्डन कार्ड भी अब तक नहीं जारी किया जा सका। सरकारी योजना के नाम पर सिर्फ राशनकार्ड ही बनाया गया है।
पश्चिमशरीरा के भरोसे का डेरा निवासी 17 वर्षीय कौशल्या ने 2022 में सांसद खेल स्पर्धा में 3000 मीटर दौड़ में पहला स्थान प्राप्त किया था। साल भर बाद 1500 मीटर दौड़ में ओपन स्टेट लेवल चैंपियनशिप में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया। खेल के अभ्यास के लिए वह रोजाना सुबह साढ़े चार बजे साइकिल से 15 किमी का सफर तय कर टेंवा स्थित स्टेडियम आती-जाती हैं। ईंट-भट्ठे व खेत में मजदूरी करती हैं।
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पिता बच्चीलाल लकवा से ग्रसित हैं तो मां हृदय रोग से पीड़ित हैं। सरकारी सुविधा के नाम पर कौशल्या के परिवार के पास केवल राशन कार्ड है। इसके अलावा कुछ नहीं है। आज भी वह कच्चे घर में रहती है। कौशल्या ने बताया कि आवास के लिए चेयरमैन से कहा था, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
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