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Kaushambi News: ककहरा सीखने की उम्र में श्रीहरि पढ़ने लगे सामने वाले की सोच
Tue, 18 Jun 2024 05:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 18 Jun 2024 05:16 AM IST
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शतरंज खिलाड़ी श्रीहरि।
शतरंज के 64 खाने और उस पर 16 गोटियों की चाल को समझने में पूरी एक उम्र बीत जाती है। लेकिन, कौशाम्बी के श्रीहरि ने महज तीन वर्ष की उम्र में ही इनकी चाल को ही नहीं समझा, बल्कि सामने वाले खिलाड़ी की सोच को समझकर उसे मात देना भी सीख लिया। महज सात वर्ष की उम्र में श्रीहरि ने छह से अधिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इनका सपना गैंड मास्टर बनने का है।
मंझनपुर कस्बा निवासी अश्वनी कुमार व रंजना देवी के तीन संतान हैं। बड़ा बेटा लोकेश मिश्रा क्रिकेट खेलता है। बेटी रिद्धि सरकारी नौकरी करना चाहती है। जबकि, सात वर्षीय सबसे छोटा बेटा श्रीहरि शतरंज में गैंड मास्टर बनना चाहता है। करीब तीन वर्ष की उम्र से ही श्रीहरि शतरंज से जुड़ गए।
जिस उम्र में बच्चे ठीक से ककहरा नहीं पढ़ पाते, श्रीहरि सामने बैठे खिलाड़ी का दिमाग पढ़ने लगा। शतरंज की 16 गोटियों का 64 खाने में किस तरह दौड़ाना है। श्रीहरि इसमें माहिर हो चुके हैं। रविवार को दो राज्य के 10 जिले के खिलाड़ियों के बीच हुई प्रतियोगिता में श्रीहरि अंडर-7 में चैंपियन बने हैं।
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पिता अश्वनी मिश्र बताते हैं कि मार्च में नोएडा में ओपन शतरंज प्रतियोगिता, बिजनौर में अंडर-9 व अंडर-11, गोरखपुर में अंडर-9 व अंडर -11 प्रतियोगिता में श्रीहरि हिस्सा ले चुके हैं। वहीं, कोच व शतरंज एसेसिएशन के सचिव राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि श्रीहरि में वह स्टेमिना है, जो आमतौर पर कम ही बच्चों में देखने को मिलता है। इनकी सोचने की क्षमता और सामने वाले की चाल को समझने की कला काफी बेहतर है।
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मंझनपुर कस्बा निवासी अश्वनी कुमार व रंजना देवी के तीन संतान हैं। बड़ा बेटा लोकेश मिश्रा क्रिकेट खेलता है। बेटी रिद्धि सरकारी नौकरी करना चाहती है। जबकि, सात वर्षीय सबसे छोटा बेटा श्रीहरि शतरंज में गैंड मास्टर बनना चाहता है। करीब तीन वर्ष की उम्र से ही श्रीहरि शतरंज से जुड़ गए।
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जिस उम्र में बच्चे ठीक से ककहरा नहीं पढ़ पाते, श्रीहरि सामने बैठे खिलाड़ी का दिमाग पढ़ने लगा। शतरंज की 16 गोटियों का 64 खाने में किस तरह दौड़ाना है। श्रीहरि इसमें माहिर हो चुके हैं। रविवार को दो राज्य के 10 जिले के खिलाड़ियों के बीच हुई प्रतियोगिता में श्रीहरि अंडर-7 में चैंपियन बने हैं।
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पिता अश्वनी मिश्र बताते हैं कि मार्च में नोएडा में ओपन शतरंज प्रतियोगिता, बिजनौर में अंडर-9 व अंडर-11, गोरखपुर में अंडर-9 व अंडर -11 प्रतियोगिता में श्रीहरि हिस्सा ले चुके हैं। वहीं, कोच व शतरंज एसेसिएशन के सचिव राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि श्रीहरि में वह स्टेमिना है, जो आमतौर पर कम ही बच्चों में देखने को मिलता है। इनकी सोचने की क्षमता और सामने वाले की चाल को समझने की कला काफी बेहतर है।