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Kaushambi News: सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गईं एफआरयू का दर्जा रखने वाली तीनों सीएचसी
Mon, 15 Jan 2024 03:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 15 Jan 2024 03:46 AM IST
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सरायअकिल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
जिले में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा रखने वाली तीनों सीएचसी रेफरल सेंटर बनकर रह गई हैं। यहां विशेषज्ञों के साथ ही मशीनों की कमी है। इसके चलते रोगियों को संयुक्त जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है।
जिले में कड़ा, चायल, सिराथू, करारी, सरसवां, मूरतगंज, सरायअकिल और कनैली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।इसके अलावा 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सरायअकिल, कनैली और सिराथू सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट घोषित किया गया है। पीएचसी से रेफर होने वाले मरीज जिला अस्पताल की जगह पहले इन एफआरयू में भेजे जाते हैं।
एफ आरयू सेंटर में पर एक सर्जन, एक एनेस्थेटिक, एक पीडियाट्रिक, एक गाइनोकोलॉजिस्ट के अलावा इमरजेंसी के लिए चार-चार ईएमओ तैनात होती है। लेकिन तीनों ही सीएचसी चिकित्सकों की उपलब्धता के मानक पर खरी नहीं उतरतीं। किसी न किसी विशेषज्ञ का पद खाली ही रहता है। इसके अलावा इनमें रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं हैं।
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इसकी वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। कनैली में तो अल्ट्रासाउंड मशीन ही खराब पड़ी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने के कारण यहां से भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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केस एक
सर्जन ही नहीं, कैसे हो ऑपरेशन
सीएचसी सरायअकिल में सर्जन की कुर्सी खाली है। इसकी वजह से हॉर्निया और हाईड्रोशील जैसे रोगों का उपचार नहीं होता। कस्बे के दीनबंधु द्विवेदी ने बताया कि 15 दिन पहले हाॅर्निया का ऑपरेशन होना था। यहां पर चिकित्सक नहीं मिले तो जिला अस्पताल जाना पड़ा। नेवादा के सुसरेनी निवासी सुधीर मिश्रा ने बताया कि एक सप्ताह पहले अलाव तापते समय जल गया था। सर्जन को दिखाने प्रयागराज जाना पड़ा।
केस दो
बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त
सीएचसी सिराथू में सर्जन के साथ बाल रोग विशेषज्ञ की कुर्सी भी खाली है। चार की जगह सिर्फ एक ही ईएमओ तैनात हैं। सैनी के विवेक त्रिपाठी और अंशुमान केसरवानी ने बताया कि जब बच्चे बीमार होते हैं तो निजी चिकित्सक की क्लीनिक जाना पड़ता है, जहां उपचार काफी महंगा है। सीएचसी में डॉक्टर होगा तो निशुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी।
केस तीन
बच्चों को दिखाना है तो मंझनपुर जाइए
सीएचसी कनैली में ईएमओ के साथ ही बाल रोग विशेषज्ञ की कमी है। भखंदा के सुबोध पाल, कनैली के अमृतलाल दिवाकर और बारा के मो. हाफिज ने कहा कि जब कभी बच्चों को लेकर उपचार कराने सीएचसी जाओ तो वहां से मंझनपुर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
प्राथमिकता पर रहती हैं सुविधाएं
चिकित्सकों की तैनाती तो लगभग सभी सीएचसी में समान रहती है, लेकिन सुविधाओं के मामले में एफआरयू को हमेशा प्राथमिकता पर रखा जाता है। शासन का आदेश है कि एफआरयू वाली सीएचसी में किसी भी चिकित्सक का पद रिक्त न हो। जबकि, हर एफआरयू में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है।
कुछ विशेषज्ञों की जिले में कमी है। इसकी वजह से सीएचसी में तैनाती नहीं हो पा रही है। जो पद रिक्त हैं, उनकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। चिकित्सकों की तैनाती होने के बाद उन्हें सीएचसी में नियुक्त किया जाएगा।
डॉ. सुष्पेंद्र कुमार
सीएमओ
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जिले में कड़ा, चायल, सिराथू, करारी, सरसवां, मूरतगंज, सरायअकिल और कनैली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।इसके अलावा 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सरायअकिल, कनैली और सिराथू सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट घोषित किया गया है। पीएचसी से रेफर होने वाले मरीज जिला अस्पताल की जगह पहले इन एफआरयू में भेजे जाते हैं।
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एफ आरयू सेंटर में पर एक सर्जन, एक एनेस्थेटिक, एक पीडियाट्रिक, एक गाइनोकोलॉजिस्ट के अलावा इमरजेंसी के लिए चार-चार ईएमओ तैनात होती है। लेकिन तीनों ही सीएचसी चिकित्सकों की उपलब्धता के मानक पर खरी नहीं उतरतीं। किसी न किसी विशेषज्ञ का पद खाली ही रहता है। इसके अलावा इनमें रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं हैं।
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इसकी वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। कनैली में तो अल्ट्रासाउंड मशीन ही खराब पड़ी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने के कारण यहां से भी मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
केस एक
सर्जन ही नहीं, कैसे हो ऑपरेशन
सीएचसी सरायअकिल में सर्जन की कुर्सी खाली है। इसकी वजह से हॉर्निया और हाईड्रोशील जैसे रोगों का उपचार नहीं होता। कस्बे के दीनबंधु द्विवेदी ने बताया कि 15 दिन पहले हाॅर्निया का ऑपरेशन होना था। यहां पर चिकित्सक नहीं मिले तो जिला अस्पताल जाना पड़ा। नेवादा के सुसरेनी निवासी सुधीर मिश्रा ने बताया कि एक सप्ताह पहले अलाव तापते समय जल गया था। सर्जन को दिखाने प्रयागराज जाना पड़ा।
केस दो
बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त
सीएचसी सिराथू में सर्जन के साथ बाल रोग विशेषज्ञ की कुर्सी भी खाली है। चार की जगह सिर्फ एक ही ईएमओ तैनात हैं। सैनी के विवेक त्रिपाठी और अंशुमान केसरवानी ने बताया कि जब बच्चे बीमार होते हैं तो निजी चिकित्सक की क्लीनिक जाना पड़ता है, जहां उपचार काफी महंगा है। सीएचसी में डॉक्टर होगा तो निशुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी।
केस तीन
बच्चों को दिखाना है तो मंझनपुर जाइए
सीएचसी कनैली में ईएमओ के साथ ही बाल रोग विशेषज्ञ की कमी है। भखंदा के सुबोध पाल, कनैली के अमृतलाल दिवाकर और बारा के मो. हाफिज ने कहा कि जब कभी बच्चों को लेकर उपचार कराने सीएचसी जाओ तो वहां से मंझनपुर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
प्राथमिकता पर रहती हैं सुविधाएं
चिकित्सकों की तैनाती तो लगभग सभी सीएचसी में समान रहती है, लेकिन सुविधाओं के मामले में एफआरयू को हमेशा प्राथमिकता पर रखा जाता है। शासन का आदेश है कि एफआरयू वाली सीएचसी में किसी भी चिकित्सक का पद रिक्त न हो। जबकि, हर एफआरयू में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है।
कुछ विशेषज्ञों की जिले में कमी है। इसकी वजह से सीएचसी में तैनाती नहीं हो पा रही है। जो पद रिक्त हैं, उनकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। चिकित्सकों की तैनाती होने के बाद उन्हें सीएचसी में नियुक्त किया जाएगा।
डॉ. सुष्पेंद्र कुमार
सीएमओ