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Kaushambi News: मुंडन शादी के लिए चार तो उपनयन संस्कार के लिए सात महीने का इंतजार
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यदि आप मांगलिक कार्य करना चाह रहे हैं तो आज शाम तक कर सकते हैं। कल यानि 12 जुलाई के बाद गुरुवार्धक्य और मासांत दोष होने से मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके बाद मुंडन व शादी के लिए चार महीने तो उपनयन संस्कार के लिए सात का इंतजार करना होगा।
पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग में हर तीन साल में अधिकमास आता है। इस बार अधिकमास के चलते व्रत, त्योहार और तिथियों में 10 से 15 दिनों का अंतर आया है। इस वजह से विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन, गृहप्रवेश, गृहारंभ, गौना आदि संस्कारों के लिए लंबे समय तक शुभमुहूर्त नहीं मिल रहे हैं।
12 जुलाई से गुरुवार्धक्य और मासांत दोष के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इस एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस बीच कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। शुक्र और गुरु भी अस्त हो जाएंगे। गुरु 15 जुलाई को पश्चिम में 10 अगस्त तक अस्त रहेंगे। इसके बाद 12 दिसंबर तक वक्री रहेंगे।
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जबकि शुक्र 13 अक्तूबर को पश्चिम में अस्त होंगे और 28 अक्तूबर को उदय होंगे। इन दोनों ग्रहों के अस्त व वक्री होने की दशा में कोई मांगलिक कार्य नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि उपनयन संस्कार सावन, भादो और आश्विन मास में नहीं होता है। इसके चलते चातुर्मास खत्म होने के बाद भी इसके योग नहीं बन पा रहे हैं। अगले साल नौ फरवरी से यह संस्कार शुरू होगा।
शादी के शुभमुहूर्त
नवंबर 21, 24, 25, 26:
दिसंबर 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12:
मुंडन के मुहूर्त
नवंबर में 26, दिसंबर में 14,
गृह प्रवेश के मुहूर्त
अक्तूबर 24,
नवंबर 14, 19, 20 21
दिसंबर में 14
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पंडित ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग में हर तीन साल में अधिकमास आता है। इस बार अधिकमास के चलते व्रत, त्योहार और तिथियों में 10 से 15 दिनों का अंतर आया है। इस वजह से विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन, गृहप्रवेश, गृहारंभ, गौना आदि संस्कारों के लिए लंबे समय तक शुभमुहूर्त नहीं मिल रहे हैं।
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12 जुलाई से गुरुवार्धक्य और मासांत दोष के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इस एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस बीच कोई शुभ कार्य नहीं होंगे। शुक्र और गुरु भी अस्त हो जाएंगे। गुरु 15 जुलाई को पश्चिम में 10 अगस्त तक अस्त रहेंगे। इसके बाद 12 दिसंबर तक वक्री रहेंगे।
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जबकि शुक्र 13 अक्तूबर को पश्चिम में अस्त होंगे और 28 अक्तूबर को उदय होंगे। इन दोनों ग्रहों के अस्त व वक्री होने की दशा में कोई मांगलिक कार्य नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि उपनयन संस्कार सावन, भादो और आश्विन मास में नहीं होता है। इसके चलते चातुर्मास खत्म होने के बाद भी इसके योग नहीं बन पा रहे हैं। अगले साल नौ फरवरी से यह संस्कार शुरू होगा।
शादी के शुभमुहूर्त
नवंबर 21, 24, 25, 26:
दिसंबर 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12:
मुंडन के मुहूर्त
नवंबर में 26, दिसंबर में 14,
गृह प्रवेश के मुहूर्त
अक्तूबर 24,
नवंबर 14, 19, 20 21
दिसंबर में 14