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कौशाम्बी में स्थापित हो रही नई ब्लड बैंक यूनिट
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जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में होने वाले रक्तदान में अब खून का हर कतरा मरीजों के काम आएगा। ब्लड बैंक के बगल में ही कंपोनेंट यूनिट बनाई जा रही है। आगामी सत्र से यूनिट के चालू होने की संभावना है। यूनिट बन जाने के बाद एक यूनिट ब्लड से विभिन्न कंपोनेंट निकालकर अन्य-अन्य मर्जों से पीड़ित मरीजों को दिए जाएंगे।
जिला अस्पताल में सौ बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा इसी परिसर में महिला विंग भी बनाया गया है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को अगर खून की जरूरत होती है तो उनके तीमारदार को अस्पताल परिसर में ही स्थित ब्लड बैंक एक यूनिट खून का दान करने पर मरीज के ब्लड ग्रुप का खून दे दिया जाता है। यह ब्लड होल होता है। ब्लड में शामिल पीआरवीसी (पैक्ड ब्लड सेल), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स सहित चार तत्व कंपोनेंट यूनिट नहीं होने के कारण फिल्टर करके नहीं निकाले जाते हैं। इसके कारण अगर मरीज को सिर्फ पीआरवीसी की जरूरत है तो उसे भी पूरा (सारे तत्व सहित) खून चढ़ाया जाता है।
अब प्रदेश सरकार ने ब्लड बैंक के पास ही कंपोनेंट बनाने की मंजूरी दे दी हैं। कंपोनेंट यूनिट के भवन बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। ब्लड बैंक के प्रभारी मोती लाल सिंह का कहना है कि कंपोनेंट यूनिट बनने से एक यूनिट ब्लड कम से कम तीन से चार मरीजों के काम आएगा। साथ ही मरीजों को इंफेक्शन का भी खतरा काफी कम होगा। अगर सब ठीक रहा तो आगामी सत्र से यूनिट शुरू हो जाएगी।
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जिला अस्पताल में भर्ती अगर किसी मरीज को प्लाज्मा की जरूरत होती थी तो उसके तीमारदार को प्रयागराज के ब्लड बैंक में रक्तदान करके वहां से प्लाज्मा लाना होता है। इसके अलावा डेंगू के गंभीर रोगियों (जिनकी प्लेटलेट्स लगातार कम हो रही हो) को प्रयागराज के अस्पताल रेफर करने की मजबूरी होती थी। ब्लड बैंक के आंकड़ों की माने तो गर्मी के दिनों में हर महीने करीब 130 से 140 लोग खून के लिए आते हैं। इसके अलावा आम दिनों में भी हर महीने करीब सौ यूनिट खून का अदान-प्रदान होता है। कंपोनेंट यूनिट बनने के बाद यहीं खून कई लोगों की जान बचाने में कारगर होगा।
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जिला अस्पताल में सौ बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा इसी परिसर में महिला विंग भी बनाया गया है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को अगर खून की जरूरत होती है तो उनके तीमारदार को अस्पताल परिसर में ही स्थित ब्लड बैंक एक यूनिट खून का दान करने पर मरीज के ब्लड ग्रुप का खून दे दिया जाता है। यह ब्लड होल होता है। ब्लड में शामिल पीआरवीसी (पैक्ड ब्लड सेल), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स सहित चार तत्व कंपोनेंट यूनिट नहीं होने के कारण फिल्टर करके नहीं निकाले जाते हैं। इसके कारण अगर मरीज को सिर्फ पीआरवीसी की जरूरत है तो उसे भी पूरा (सारे तत्व सहित) खून चढ़ाया जाता है।
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अब प्रदेश सरकार ने ब्लड बैंक के पास ही कंपोनेंट बनाने की मंजूरी दे दी हैं। कंपोनेंट यूनिट के भवन बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। ब्लड बैंक के प्रभारी मोती लाल सिंह का कहना है कि कंपोनेंट यूनिट बनने से एक यूनिट ब्लड कम से कम तीन से चार मरीजों के काम आएगा। साथ ही मरीजों को इंफेक्शन का भी खतरा काफी कम होगा। अगर सब ठीक रहा तो आगामी सत्र से यूनिट शुरू हो जाएगी।
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जिला अस्पताल में भर्ती अगर किसी मरीज को प्लाज्मा की जरूरत होती थी तो उसके तीमारदार को प्रयागराज के ब्लड बैंक में रक्तदान करके वहां से प्लाज्मा लाना होता है। इसके अलावा डेंगू के गंभीर रोगियों (जिनकी प्लेटलेट्स लगातार कम हो रही हो) को प्रयागराज के अस्पताल रेफर करने की मजबूरी होती थी। ब्लड बैंक के आंकड़ों की माने तो गर्मी के दिनों में हर महीने करीब 130 से 140 लोग खून के लिए आते हैं। इसके अलावा आम दिनों में भी हर महीने करीब सौ यूनिट खून का अदान-प्रदान होता है। कंपोनेंट यूनिट बनने के बाद यहीं खून कई लोगों की जान बचाने में कारगर होगा।