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परीक्षा से ऐन पहले शिक्षकों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

Wed, 06 Feb 2019 12:14 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 06 Feb 2019 12:14 AM IST
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परीक्षा से ऐन पहले शिक्षकों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता
परीक्षा से पहले शिक्षकों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता
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कक्ष निरीक्षक के रूप में तैनात किए गए हैं 468 बेसिक शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छह से 12 फरवरी तक महाहड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान कोई भी सरकारी कार्य नहीं करेंगे। कक्ष निरीक्षक के रूप में तैनात शिक्षकों की हड़ताल से नकलविहीन बोर्ड परीक्षा कराने को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अफसर विकल्प की तलाश में जुट गए हैं।
सात फरवरी से यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए सभी 78 केंद्रों पर 2338 कक्ष निरीक्षकों की तैनाती की गई है। इनमें करीब 468 शिक्षक परिषदीय स्कूलों के हैं। दूसरी तरफ राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बेसिक शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर छह फरवरी से महाहड़ताल की घोषणा कर रखी है। महाहड़ताल 12 फरवरी तक रहेगी। परीक्षा प्रारंभ होने से ठीक 24 घंटे पहले शिक्षकों के महाहड़ताल पर जाने से प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने डीआईओएस को विकल्प तैयार रखने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि शिक्षामित्रों को इस महत्वपूर्ण काम में लगाया जा सकता है। इसे लेकर अफसरों के बीच मंथन चल रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक का कहना है कि शिक्षकों की महाहड़ताल 12 फरवरी तक है। इस अवधि तक छोटी-छोटी परीक्षाएं है। इसलिए माध्यमिक शिक्षकों से काम चल जाएगा। हड़ताल लंबी खिंची तब कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता बढ़ेगी। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
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पर्यवेक्षक की निगरानी में संकलन केंद्र जाएंगी कॉपियां
मंझनपुर। बोर्ड परीक्षा के लिए बने 78 केंद्रों में 50 वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। परीक्षा के दौरान कॉपी बदलने की घटनाएं इन केंद्रों पर ज्यादा होने की संभावना है। लिहाजा प्रशासन ने इन पर पहरा बढ़ा दिया है। डीएम ने केंद्र पर कॉपियां सील करने के बाद उन्हें संकलन केंद्र में जमा कराने तक की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती का निर्देश दिया है। डीआईओएस ने बताया कि इसके लिए लेखपालों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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...तो क्या जेब से तेल खर्च कर नकल रोकेंगे अफसर?
सिराथू। बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए चरणबद्ध तरीके से अधिकारियों की टीम निरंतर परीक्षा केंद्रों के निरीक्षण एवं निगरानी के लिए लगाई जाती है। ऐसे अधिकारियोें को अपने वाहन में तेल तक नहीं दिया जाता है। सवाल उठता है कि ऐसे कितने अधिकारी होंगे, जो अपने जेब से पैसा लगाकर बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए प्रयास करेंगे। डीआईओएस एसके सिंह का कहना है कि व्यवस्था शासन की है। इसमें वह कुछ नहीं कह सकते हैं।
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