फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   कौशाम्बी के ‘केला’ को सरकार से नहीं मिला ‘धेला’

कौशाम्बी के ‘केला’ को सरकार से नहीं मिला ‘धेला’

Fri, 05 Apr 2019 08:38 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 05 Apr 2019 08:38 PM IST
विज्ञापन
कौशाम्बी के ‘केला’ को सरकार से नहीं मिला ‘धेला’
कौशाम्बी के ‘केला’ को सरकार से नहीं मिला ‘धेला’
विज्ञापन

एक जनपद एक उत्पाद में केले का हुआ था चयन
उद्यान विभाग ने दो सौ हेक्टेयर में रखा था बागवानी का लक्ष्य
फोटो नं. 28
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा के किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत और सशक्त बनाने की गरज से जिले में सबसे अधिक उत्पादन देने वाले केले को शासन ने भुला दिया। प्रदेश सरकार ने कौशाम्बी में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत केले का चयन तो कर लिया लेकिन अनुदान के नाम पर एक धेला नहीं दिया।
अमरूद के बाद कौशाम्बी की पहचान में केले ने चार चांद लगाया था। जिले के सदर और चायल तहसील के विभिन्न इलाकों में केले की खेती की जाती है। मौजूदा समय जिले के 32 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की बागवानी की जाती है। केले का उत्पादन बेहतर होने पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर साल भर पहले प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत केले का चयन किया। इसे लेकर जिले से दो हजार हेक्टेयर में केले की बागवानी का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए प्रदेश सरकार से बजट की मांग किया गया था। एक साल बीतने के बाद भी सरकार ने केले की बागवानी के लिए फूटी कौड़ी नहीं दी। नतीजतन जिले के किसान अपने हाल पर पड़े हैं। किसान उद्यान विभाग का चक्कर लगाकर थक चुके हैं। अब लोग केले की बागवानी के लिए छोड़े गए खेतों में गेहूं, धान उगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन

-------
तमाम लोगों को मिल जाता रोजगार
मंझनपुर। केले की बागवानी को बढ़ावा देने के लिए के साथ ही जिले में वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग युनिट भी लगाया जाना था। यहां पर केले का शोधन किया जाना था। इसके अलावा केले से बनने वाले जैम, जैली, चिप्स, जूस और दोना पत्तल बनाने की युनिट लगाई जानी थी। इससे जिले के हजारों लोगों को रोजगार मिल जाता।
विज्ञापन
विज्ञापन

--------
बड़े शहरों में मजदूरी को विवश हैं जिले के युवा
मंझनपुर। जिले में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। यहां के पढ़े-लिखे युवा गैर प्रांतों में दिहाड़ी करने के लिए मजबूर हैं। जिले में उद्योग नहीं लगाया गया है। इस जिले का मूल पेशा कृषि है। अब प्रदेश सरकार ने जिस बागवानी को बढ़ावा देने की योजना बनाई, उसके मद में फूटी कौड़ी नहीं दी जा सकी है।

--------

क्या कहते हैं अधिकारी
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत जिले में केले का चयन किया गया था। जिले में केला का उत्पादन बेहतर है। पिछले साल योजना लागू होने के बाद दो सौ हेक्टेयर में केला लगाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है। बजट नहीं मिलने से दिक्कत आई है।
भाष्कर राम मिश्रा, डीएचओ कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed