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कौशाम्बीः तालाब खुदाई में मिली 600 वर्ष पुरानी भगवान विष्णु की प्रतिमा
Sat, 23 May 2020 11:57 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशाम्बी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशाम्बी
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 11:57 PM IST
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600 year old statue of Lord Vishnu found in pond excavation
- फोटो : KAUSHAMBI
सदर तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बड़गांव स्थित कुंभी तालाब में शनिवार को खुदाई के दौरान पत्थर को तराश कर बनाई गई भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा मिली है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने प्रतिमा को कलक्ट्रेट में बनी वीथिका में संरक्षित किया है। करीब ढाई फिट ऊंची प्रतिमा और आकृति अंकन से प्रयागराज विश्वविद्यालय के शोध छात्र मनीष तिवारी ने उसके 14 या 15 वीं शताब्दी के होने का दावा किया। प्रशासन ने प्रतिमा मिलने की सूचना पुरातत्व विभाग को दे दी है।
कौशाम्बी विकास खंड के रसूलपुर बड़गांव में मनरेगा से कुंभी तालाब की खुदाई कराई जा रही थी। इस दौरान श्रमिक सुखराज पुत्र तेजी का फावड़ा एक बड़े से पत्थर से टकराया। कौतूहलवश सुखराज ने अन्य साथियों की मदद से पत्थर को बाहर निकला तो वह प्रतिमा थी। तालाब की खुदाई कर रहे मजदूरों ने इसकी जानकारी ग्राम प्रधान के पति रामयश को दी तो वह मौके पर पहुंचे। मूर्ति देखने पर भगवान गौतम बुद्ध या भगवान विष्णु की लग रही थी।
प्रधान पति ने प्रतिमा मिलने की जानकारी एसडीएम सदर राजेश चंद्रा को दी। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार भानु प्रताप सिंह प्रतिमा को कलक्ट्रेट ले गए। इसकी जानकारी इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर और पुरातत्वविद डीपी दुबे को उनके शोध छात्र मनीष तिवारी के जरिए मिली। प्रतिमा की फोटो देखने के बाद डीपी दुबे ने दावा किया कि यह मूर्ति हल्के स्लेटी पाषाण पट्ट से निर्मित भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा है। मूर्ति के बाएं हाथों में शंख, चक्र, गदा और चौथा हाथ बरद मुद्रा में है।
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प्रतिमा में विष्णु कर्णकुंडल, कंठहार, बाजूबंद, कंकण, करधनी और पैरों मे नूपुर धारण किए हुए हैं। वनमाला व यज्ञोपवीत का भी अंकन है। विष्णु के पैरों के दाईं ओर त्रिभंगमुद्रा में एक स्त्री व बाई ओर त्रिभंगमुद्रा में एक पुरुष तथा प्रतिमा के नीचे आसनस्थ अंजलिबद्ध उपासक हैं और शीर्ष पर सुंदर करंड मुकुट शोभायमान है। शोध छात्र मनीष तिवारी का दावा है प्रतिमा 14-15 वीं सदी की लग रही है। इस दुर्लभ प्रतिमा के संरक्षण की आवश्यकता है।
राजेश चंद्रा, एसडीएम सदर
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कौशाम्बी विकास खंड के रसूलपुर बड़गांव में मनरेगा से कुंभी तालाब की खुदाई कराई जा रही थी। इस दौरान श्रमिक सुखराज पुत्र तेजी का फावड़ा एक बड़े से पत्थर से टकराया। कौतूहलवश सुखराज ने अन्य साथियों की मदद से पत्थर को बाहर निकला तो वह प्रतिमा थी। तालाब की खुदाई कर रहे मजदूरों ने इसकी जानकारी ग्राम प्रधान के पति रामयश को दी तो वह मौके पर पहुंचे। मूर्ति देखने पर भगवान गौतम बुद्ध या भगवान विष्णु की लग रही थी।
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प्रधान पति ने प्रतिमा मिलने की जानकारी एसडीएम सदर राजेश चंद्रा को दी। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार भानु प्रताप सिंह प्रतिमा को कलक्ट्रेट ले गए। इसकी जानकारी इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर और पुरातत्वविद डीपी दुबे को उनके शोध छात्र मनीष तिवारी के जरिए मिली। प्रतिमा की फोटो देखने के बाद डीपी दुबे ने दावा किया कि यह मूर्ति हल्के स्लेटी पाषाण पट्ट से निर्मित भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा है। मूर्ति के बाएं हाथों में शंख, चक्र, गदा और चौथा हाथ बरद मुद्रा में है।
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प्रतिमा में विष्णु कर्णकुंडल, कंठहार, बाजूबंद, कंकण, करधनी और पैरों मे नूपुर धारण किए हुए हैं। वनमाला व यज्ञोपवीत का भी अंकन है। विष्णु के पैरों के दाईं ओर त्रिभंगमुद्रा में एक स्त्री व बाई ओर त्रिभंगमुद्रा में एक पुरुष तथा प्रतिमा के नीचे आसनस्थ अंजलिबद्ध उपासक हैं और शीर्ष पर सुंदर करंड मुकुट शोभायमान है। शोध छात्र मनीष तिवारी का दावा है प्रतिमा 14-15 वीं सदी की लग रही है। इस दुर्लभ प्रतिमा के संरक्षण की आवश्यकता है।
इनका कहना है
भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली है। नायब तहसीलदार को मौके पर भेजा गया था। प्रतिमा को कलक्ट्रेट में संरक्षित करा दिया गया है। वह कितनी प्राचीन है? इस बाबत कुछ कहा नहीं जा सकता। पुरातत्व विभाग को खबर कर दी गई है।राजेश चंद्रा, एसडीएम सदर