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मासूमों की जिंदगी से खेल रहे स्कूल संचालक
Updated Wed, 15 Nov 2017 06:18 PM IST
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मासूमों की जिंदगी से खेल रहे स्कूल संचालक
मानकों को दरकिनार कर सड़क पर फर्राटा भर रहे वाहन
फोटो-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। मानकों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भर रहे स्कूली वाहनों से नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है। स्कूल संचालकों की मनमानी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण अभिभावकों का विरोध भी बेअसर साबित होता है। छात्र मलय द्विवेदी की मौत इसी मनमानी का नतीजा मानी जा रही है। हालांकि इसके बावजूद घटना के दूसरे दिन भी किसी तरह की प्रशासनिक संजीदगी नहीं देखने को मिली।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त कानून बना रखा है। अदालत भी इसे लेकर काफी संजीदा है। पर, इससे इतर कौशाम्बी जिले में इसका कोई असर नहीं देखने को मिल रहा है। यहां सर्वाधिक लापरवाही बच्चों के आवागमन के दौरान बरती जा रही है। मनमानी किराया वसूलने के बावजूद स्कूली वाहनों में मानक के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मंगलवार को रिजवी कॉलेज करारी में पढ़ने वाले छात्र मलय द्विवेदी की मौत से बस ड्राइवर, कंडक्टर की लापरवाही का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस घटना ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला तो चलती बस का गेट क्यों खुला छोड़ा गया? दूसरा घर से पहले मलय गेट पर कैसे आया? उसे धकेला गया या फिर वह खुद बस से कूदा। घटना के वक्त बस कंडक्टर क्या कर रहा था? इन सारे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।
भूसे की तरह भरकर ढोए जा रहे नौनिहाल
जिले में यूं तो निजी स्कूल-कॉलेजों की संख्या पांच सौ के ऊपर हैं। पर इनमें ठीकठाक विद्यालयों की तादाद चार दर्जन के आसपास है। इन विद्यालयों ने उप सम्भागीय परिवहन कार्यालय में विभिन्न प्रकार के 145 स्कूली वाहनों का पंजीकरण करा रखा है। नियमानुसार वाहनों में निर्धारित क्षमता के हिसाब से बच्चों को बैठाना चाहिए। पर देखा जा रहा है कि यहां के अधिकतर स्कूली वाहन क्षमता से दो गुना बच्चों को भूसे की तरह ठूंस कर स्कूल लाते और ले जाते हैं।
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स्पीड गवर्नर के बगैर दौड़ रहे वाहन
स्कूली वाहनों को नियमानुसार नगरीय इलाके में अधिकतम 30 व उसके बाहर 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने का प्राविधान है। इसके लिए स्पीड गवर्नर लगवाए जाते हैं। कौशाम्बी में अधिकतर स्कूली वाहन बगैर स्पीड गवर्नर के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। हालांकि एआरटीओ शंकर जी सिंह का कहना है कि बगैर स्पीड गवर्नर के नए वाहनों का पंजीकरण नहीं किया जा रहा है।
स्कूली वाहनों के लिए जरूरी मानक
0 वाहन में स्कूल का नाम पता, प्रधानाचार्य/प्रबंधक का मोबाइल नम्बर लिखा होना अनिवार्य है।
0 निर्धारित सीटिंग क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाना चाहिए।
0 स्कूली वाहन में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की मौजूदगी आवश्यक है।
0 बस के दरवाजों में विश्वसनीय ताले जरूर लगे हों।
0 स्कूल बस में ड्राइवर के साथ ही एक अन्य शिक्षित व्यक्ति/शिक्षक का होना आवश्यक है।
0 स्कूल बस में अगिभनशमन यंत्र आवश्यक हैं।
0 स्कूल बैग की सुरक्षा के लिए सीट के नीचे जगह होनी चाहिए।
0 सेफ्टी बेल्ट आर्मरेस्ट व बाडी के बीच में साधारण हुक से लगाई जानी चाहिए।
0 बस में चढ़ने-उतरने के लिए फुटरेस्ट होना चाहिए।
0 सीट के खिड़की के पैनल ऐसे हों कि बच्चे गर्दन बाहर न निकाल सकें।
0 स्कूली वाहन किसी भी सूरत में एलपीजी गैस से संचालित नहीं होने चाहिए।
क्या कहते हैं अफसर
परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से संजीदा है। वाहनों के संचालन में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए इसके लिए अभियान चलाकर चेकिंग और कार्रवाई भी की जाती है। इस सत्र में 29 स्कूली वाहन सीज और 64 का चालान भी किया जा चुका है।
शंकरजी सिंह-एआरटीओ
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मानकों को दरकिनार कर सड़क पर फर्राटा भर रहे वाहन
फोटो-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। मानकों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भर रहे स्कूली वाहनों से नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है। स्कूल संचालकों की मनमानी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण अभिभावकों का विरोध भी बेअसर साबित होता है। छात्र मलय द्विवेदी की मौत इसी मनमानी का नतीजा मानी जा रही है। हालांकि इसके बावजूद घटना के दूसरे दिन भी किसी तरह की प्रशासनिक संजीदगी नहीं देखने को मिली।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त कानून बना रखा है। अदालत भी इसे लेकर काफी संजीदा है। पर, इससे इतर कौशाम्बी जिले में इसका कोई असर नहीं देखने को मिल रहा है। यहां सर्वाधिक लापरवाही बच्चों के आवागमन के दौरान बरती जा रही है। मनमानी किराया वसूलने के बावजूद स्कूली वाहनों में मानक के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मंगलवार को रिजवी कॉलेज करारी में पढ़ने वाले छात्र मलय द्विवेदी की मौत से बस ड्राइवर, कंडक्टर की लापरवाही का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस घटना ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला तो चलती बस का गेट क्यों खुला छोड़ा गया? दूसरा घर से पहले मलय गेट पर कैसे आया? उसे धकेला गया या फिर वह खुद बस से कूदा। घटना के वक्त बस कंडक्टर क्या कर रहा था? इन सारे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।
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भूसे की तरह भरकर ढोए जा रहे नौनिहाल
जिले में यूं तो निजी स्कूल-कॉलेजों की संख्या पांच सौ के ऊपर हैं। पर इनमें ठीकठाक विद्यालयों की तादाद चार दर्जन के आसपास है। इन विद्यालयों ने उप सम्भागीय परिवहन कार्यालय में विभिन्न प्रकार के 145 स्कूली वाहनों का पंजीकरण करा रखा है। नियमानुसार वाहनों में निर्धारित क्षमता के हिसाब से बच्चों को बैठाना चाहिए। पर देखा जा रहा है कि यहां के अधिकतर स्कूली वाहन क्षमता से दो गुना बच्चों को भूसे की तरह ठूंस कर स्कूल लाते और ले जाते हैं।
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स्पीड गवर्नर के बगैर दौड़ रहे वाहन
स्कूली वाहनों को नियमानुसार नगरीय इलाके में अधिकतम 30 व उसके बाहर 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने का प्राविधान है। इसके लिए स्पीड गवर्नर लगवाए जाते हैं। कौशाम्बी में अधिकतर स्कूली वाहन बगैर स्पीड गवर्नर के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। हालांकि एआरटीओ शंकर जी सिंह का कहना है कि बगैर स्पीड गवर्नर के नए वाहनों का पंजीकरण नहीं किया जा रहा है।
स्कूली वाहनों के लिए जरूरी मानक
0 वाहन में स्कूल का नाम पता, प्रधानाचार्य/प्रबंधक का मोबाइल नम्बर लिखा होना अनिवार्य है।
0 निर्धारित सीटिंग क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाना चाहिए।
0 स्कूली वाहन में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की मौजूदगी आवश्यक है।
0 बस के दरवाजों में विश्वसनीय ताले जरूर लगे हों।
0 स्कूल बस में ड्राइवर के साथ ही एक अन्य शिक्षित व्यक्ति/शिक्षक का होना आवश्यक है।
0 स्कूल बस में अगिभनशमन यंत्र आवश्यक हैं।
0 स्कूल बैग की सुरक्षा के लिए सीट के नीचे जगह होनी चाहिए।
0 सेफ्टी बेल्ट आर्मरेस्ट व बाडी के बीच में साधारण हुक से लगाई जानी चाहिए।
0 बस में चढ़ने-उतरने के लिए फुटरेस्ट होना चाहिए।
0 सीट के खिड़की के पैनल ऐसे हों कि बच्चे गर्दन बाहर न निकाल सकें।
0 स्कूली वाहन किसी भी सूरत में एलपीजी गैस से संचालित नहीं होने चाहिए।
क्या कहते हैं अफसर
परिवहन विभाग बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से संजीदा है। वाहनों के संचालन में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए इसके लिए अभियान चलाकर चेकिंग और कार्रवाई भी की जाती है। इस सत्र में 29 स्कूली वाहन सीज और 64 का चालान भी किया जा चुका है।
शंकरजी सिंह-एआरटीओ