फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   तीन तलाक : रोती आंखों के चेहरे दिखी दिली खुशी

तीन तलाक : रोती आंखों के चेहरे दिखी दिली खुशी

Wed, 23 Aug 2017 01:12 AM IST
Updated Wed, 23 Aug 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
तीन तलाक : रोती आंखों के चेहरे दिखी दिली खुशी
मायूस चेहरों पर बिखरी मुस्कान
विज्ञापन

तीन तलाक पर आए फैसले का घर-घर हुआ स्वागत, मौलानाओं में नहीं सामंजस्य
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर ।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के फैसले का मंगलवार को घर-घर स्वागत हुआ। क्या हिंदू और क्या मुसलमान, सभी इस फैसले से राजी हैं। सबसे ज्यादा खुशी उनके चेहरे पर दिखी जो तीन तलाक के कहर से पीड़ित हैं। उनकी आंख में आंसू तो थे लेकिन चेहरे पर दिली खुशी साफ झलक रही थी। हालांकि मौलानाओं में आपसी सामंजस्य नहीं दिखा। किसी ने इसे बेहतरीन फैसला बताया तो किसी ने कानून बनाने में धर्मगुरुओं की राय जानने की बात कही।
तीन तलाक को सुप्रीमकोर्ट ने प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही इस पर कानून बनाने के लिए संसद को प्रस्ताव रखने को कहा है। टीवी चैनल व सोशल मीडिया पर जैसे ही यह न्यूज छाई महिलाओं के चेहरे खिल गए। घर-घर इस फैसले का स्वागत हुआ। वे चेहरे भी खुशी से रो पडे़ जो तीन तलाक का दंश झेल रहे हैं। करारी, मंझनपुर, सैयदसरांवा, महगांव, परास समेत तमाम मुस्लिम आबादी बाहुल्य वाले गांवों का माहौल बदला था। महिलाओं के दिल से तलाक के खौफ में जीने का डर निकल चुका था। वहीं मौलानाओं में इस फैसले को लेकर तालमेल नहीं दिखा। मौलानाओं की अलग-अलग राय रही। उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर रजामंदी तो जाहिर की लेकिन अपनी शर्तें भी जरूर रखीं।
विज्ञापन




‘वे सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानते हैं, लेकिन संसद में जो कानून पास होना है इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जरूर रखे जाएं और उनकी राय जरूर ली जाए। इसके बाद ही कानून बनाया जाए।’
विज्ञापन
विज्ञापन

मौलाना हाफिज आरिफ (चायल)

‘खुले दिल से इस फैसले का स्वागत है। काफी दिनों से तीन तलाक का विरोध हो रहा था। इसका लोग बेजा इस्तेमाल करने लगे थे। यह हमारे धर्म के खिलाफ भी था। कानून बनने से अब तलाक का खौफ महिलाओं में नहीं रहेगा।’
हाफिज तसौव्वर हुसैन (चायल)


सुप्रीम कोर्ट की बात सही है, लेकिन शरियत के कानून में दखलंदाजी भी नहीं होनी चाहिए। कानून बनाते समय इसका ख्याल रखा जाए, नहीं तो विरोध होगा।
मौलाना हाफिज अब्दुल कलाम कुरैशी (करारी)


तलाकशुदा रेशमा को मिला सुकून
तलाक का दंश झेल रही पीड़िता की आंखों में फैसले से दिखा बेटी का सुरक्षित भविष्य
-यास्मीन बानो का भी मजबूत हुआ कलेजा
सरदार रिजवी
अमर उजाला ब्यूरो
करारी। तीन तलाक ने कइयों की जिंदगी बर्बाद कर दी। इनमें से कई ऐसी हैं जिनके हाथ की मेंहदी भी नहीं छूटी थी और तीन तलाक का कहर उन पर टूटा। करारी की रेशमा बानो भी इन्हीं में से एक हैं। इनका दर्द सुनकर हर व्यक्ति सिहर जाता है। 17 साल से वह तलाक का कहर ढो रही हैं। इकलौती बेटी मनकसा 18 साल की हो चुकी है। तीन तलाक पर प्रतिबंध का फैसला आया तो वह अपनी बीती जिंदगी का दर्द भूल गईं। बेटी का भविष्य सुरक्षित देख उन्हें काफी सुकून मिला। ऐसी महिलाओं में अकेले रेशमा नहीं हैं बल्कि करारी की यास्मीन बानो ने भी राहत महसूस की।
करारी की रेशमा बानों पुत्री मो. सलीम की शादी लगभग 19 साल पहले बहादुरपुर के निसार अहमद के साथ हुई थी। शादी के डेढ़ साल बाद निसार अहमद ने रेशमा बानो को तलाक दे दिया। तलाक सुनते ही रेशमा बानो कांप उठी थी। गोद में मासूम बच्ची मनकसा थी। उसके पिता मो. सलीम भी बौखला गए थे लेकिन तलाक तो हो चुका था। कोई गुंजाइश नहीं बची थी। रेशमा बानो मासूम बेटी के साथ अपने पिता के घर आ गई। बेटी का किसी तरह पालन-पोषण किया। अपने स्तर से रेशमा बानो ने पढ़ाई-लिखाई में कोई कोताही नहीं बरती। लगभग 17 साल हो गए रेशमा को तलाक मिले। रेशमा के भाई दुकान चलाते हैं लेकिन घर में उनको भाभी से मां का ही प्यार मिला। यही कारण था कि बोझ हलका हुआ, लेकिन वह जब हाईस्कूल में पढ़ रही मनकसा को देखतीं तो तलाक का खौफ उन्हें बेचैन कर देता था। बेटी को लेकर वह चिंतित थीं। मंगलवार को जब तीन तलाक पर प्रतिबंध का फैसला आया तो रेशमा को बेहद ही खुशी हुई। यह खुशी हो भी क्यों न उन्हें, 17 साल एक लंबा वक्त होता है। तलाक ने उनकी जिंदगी नरक कर दी थी लेकिन अब उन्हें बेटी मनकसा को लेकर यह डर नहीं है। यही हाल करारी की यास्मीन बानों का है। यास्मीन बानो को डेढ़ साल पहले पति हसीन खान ने तलाक दिया था। शादी वर्ष 2007 में हुई थी। पांचवीं क्लास में बेटा पढ़ता है। मो. यासीन के साथ यास्मीन रहती है, लेकिन बेटे की फिक्र में उन्हें नींद नहीं आती है। भविष्य कैसा होगा? इसको लेकर वह खुद कहती हैं उन्हें कोई अंदाजा नहीं है।




तीन तलाक पर प्रतिबंध जरूरी था। इसका दुरुपयोग होता था। अब महिलाओं को तलाक की चिंता नहीं रहेगी, न ही वे इसके डर से घर में रहेंगी। सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का स्वागत है।
दुर्गेश गुप्ता
पूर्व आईटी सेल जिला प्रमुख (भाजपा)


तीन तलाक पर सुप्रीमकोर्ट का निर्णय सही है। कई महिलाएं इससे पीड़ित थीं। कइयों ने अपनी पूरी जिंदगी तलाक के बाद गुजार दी अपने मां-बाप के घरों में। समाज के भीतर इसका विरोध था। अब इसको लेकर महिलाओं को चिंता नहीं होगी।
ऐलिया रिजवी
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ कार्यकर्ता (भाजपा)

फैसले का स्वागत है। कहीं न कहीं इसको लेकर शादीशुदा महिलाओं में डर बैठा रहता है। कुछ लोग इसकी आड़ में महिलाओं को डराते भी रहते थे, लेकिन अब यह डर उनके भीतर नहीं होगा और वे सुकून से रहेंगी।
फैसल अहमद
समाज सेवी (मंझनपुर)


तीन तलाक पर प्रतिबंध का फैसला जायज है। सुप्रीमकोर्ट ने सही निर्णय सुनाया है। इसे मौलानाओं का मानना चाहिए और संसद में साथ में बैठकर कानून बनवाने में मदद करनी चाहिए। महिलाओं के साथ यही सबसे बड़ा इंसाफ होगा।
इंतजार रिजवी, मंझनपुर



मोबाइल पर फात्मा को मिला था तलाक
मंझनपुर (ब्यूरो)। पूरामुफ्ती के रसूलाबाद कोइलहा गांव की फात्मा को तलाक मोबाइल पर मिला था। व्हाट्सअप पर उसके पति अशफाक ने तलाक भेजा था। इसके तलाक की चिट्ठी डाक से सात दिन बाद भेजी थी। तलाक मिलने से फात्मा की जिंदगी नरक हो चुकी है। वह अपने मां-बाप के साथ घर में रहने को मजबूर है। इसकी शिकायत भी पुलिस प्रशासन से की गई लेकिन कोई हला-भला नहीं हो सका। तीन तलाक मिलने के बाद से फात्मा को लग रहा है कि अभी भी उसको शौहर अशफाक बुलाने आएगा। पुलिस ने कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन फात्मा ने ही रोक दिया था। इस उम्मीद मे की पति उसे जरूर बुला ले जाएगा।

‘महिलाओं की स्थिति तब ही सुधरेगी जब तक कानून मौलानाओं के साथ मिलकर नहीं बनाया जाएगा। सुप्रीमकोर्ट का फैसला पांच जजों ने सुनाया है। इनमें तीन जजों की राय थी कि प्रतिबंध लगाया जाए जबकि दो इसके पक्ष में नहीं थे। कानून बनाते समय यह भी देखा जाए कि धर्म के मामलों में हस्तक्षेप के लिए कहीं यह फैसला नजीर न बन जाए।’
मौलाना जमीर हैदर रिजवी (करारी)



देर से ही सही, मगर बिलकुल सही
-तलाक ने कइयों की जिंदगी की बर्बाद, अपने ही घर में हैं पराया
सईदुर्रहमान
अमर उजाला ब्यूरो
चायल। अब न तो आह निकलती है, न ही उनके मुंह से उफ निकलता है। बेबस आंसू ही उनकी पहचान हैं। अपने ही मां-बाप के घरों में परायों जैसी जिंदगी जीने की मजबूरी है। यह उनकी घुटन भरी जिंदगी तीन तलाक की देन है। चायल क्षेत्र की आशिया, शबाना, महमूदा और शाहिदा तलाक पीड़िता हैं, सभी ने तीन तलाक पर प्रतिबंध के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन उनकी लड़खड़ाती जुबान ने यह चुगली भी कर दी है कि फैसला बहुत देर से आया है। पहले आया होता तो उनके हिस्से में यह दर्द भरी जिंदगी न होती।

मनौरी की आशिया बेगम को हाल ही में तलाक मिला है। बूढ़े मां-बाप के साथ वह अकेले रहती हैं। बच्चाें के पालन पोषण की चिंता आशिया को और मां बाप को आशिया की। आशिया को तलाक देने वाले पति को मनाने की तमाम कोशिशें र्हुइं लेकिन सब नाकाफी रहे। पति अपनी जिद पर ही अड़ा रहा। नतीजतन आशिया अपने बच्चों के साथ किसी तरह जीने को मजबूर है। अब तो उसके सामने मजदूरी करने की नौबत आ गई है। यही हाल चायल की शबाना का है। उसका पति अमेठी में रहता था। तीन बच्चे हैं। बिना कोई कारण बताए पति ने अमेठी से ही तीन तलाक भिजवा दिया। तलाक मिला तो शबाना के साथ उसके मां-बाप का कलेजा चाक हो गया। दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। शबाना के साथ उसके बच्चों की जिंदगी दांव पर लगी है। कैसे वह बच्चों को पढ़ाए लिखाए और पहाड़ जैसी जिंदगी काटे, इसकी कोई सूरत नहीं दिख रही है। महमूदा बेगम का गम जुदा नहीं है। वह भी तलाक का शिकार हैं। महमूदा को भी नहीं पता कि उनको शौहर ने किस वजह से तलाक दिया है। तलाक के बाद से वह अपने घर में रहती हैं। मां-बाप भाई सब मदद करते हैं, कभी कोई कमी नहीं होने देते हैं, लेकिन शबाना को लगता है कि वह जाने-अनजाने में वह अपने घरवालों पर बोझ बन गई है। यह दुख उसे रात-दिन सालता रहता है, लेकिन करें क्या, यह नहीं सूझ रहा है। शाहिदा बीबी भी तलाक की वजह से बेखबर हैं। मंगलवार दोपहर बाद जब उनको यह पता चला कि तीन तलाक पर प्रतिबंध लग गया है तो उनके चेहरे पर मुस्कान आई। यह मुस्कान इसलिए थी कि अब उनके जैसा किसी दूसरी महिला का हश्र तो नहीं होगा। वह सुकून में रहेगी और तलाक का खौफ उसके जेहन में कभी नहीं रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed