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जिले को ओडीएफ बनाने के लिए डीपीआरओ ने कसी कमर
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:40 AM IST
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ओडीएफ बनाने के लिए डीपीआरओ ने कसी कमर
सरस हाल में सेक्रेट्रियों के साथ बैठक कर बनाई रणनीति
शौचालय बनवाने के साथ व्यवहार परिवर्तन पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
प्रदेश के चार जिले ओडीएफ होने के बाद कौशांबी डीपीआरओ भी कमर कसते दिख रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन उन्होंने जिले भर के सेक्रेट्रियों के साथ विकास भवन स्थित सरस हाल में बैठक की। बैठक में उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शौचालय बनवाने के साथ-साथ खुले में शौच न करने के लिए लोगों के व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया।
प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 31 जिलों को खुले में शौच से मुक्त करते हुए पूर्ण ओडीएफ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कौशांबी, बिजनौर, हापुड़, गाजियाबाद सहित 31 जिले शामिल हैं। इनमें से गाजियाबाद, हापुड़, बिजनौर सहित चार जिले पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित कर दिए गए। जिले में अभी 50 फीसदी ग्राम सभाएं भी पूर्ण से ओडीएफ नहीं हो सकी है। चार जिलों के ओडीएफ होने और कौशांबी के फिसड्डी रहने को डीपीआरओ कमल किशोर ने गंभीरता से लिया। रविवार को उन्होंने जिले भर की ग्राम सभाओं में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों के साथ सरस हाल में बैठक की। बैठक में उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शौचालयों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराने के साथ-साथ ग्रामीणों के व्यवहार परिवर्तन पर भी जोर दें। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण होने के बाद भी कुछ लोग खुले में शौच कर रहे हैं। ऐसे लोगों को खुले में शौच न करने के लिए के प्रेरित करते हुए उनका व्यवहार परिवर्तित कराएं। अंत में उन्होंने कहा कि जिले को पूर्ण रूप से ओडीएफ बनाए जाने के लिए 31 दिसंबर की तिथि निर्धारित है। नियत तिथि के अंदर जिले को पूर्ण ओडीएफ बनाना ही होगा।
किसी को नहीं मिलेगा वीर भाई का पुरस्कार
रक्षा बंधन के मौके पर डीपीआरओ कमल किशोर ने ओडीएफ अभियान से जुड़ी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रतियोगिता के माध्यम से उन्होंने घोषणा किया था कि जो भाई राखी बंधवाने के बाद अपनी बहन को शौचालय गिफ्ट करेगा उसे प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार देकर 15 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। पंचायती राज विभाग की इस प्रतियोगिता में एक भी भाई ने हिस्सा नहीं लिया। इस पर डीपीआरओ ने अफसोस जाहिर किया है। प्रतियोगिता में एक भी नाम दर्ज न होता देख उन्होंने एक असहाय महिला से राखी बंधवाकर स्वयं शौचालय गिफ्ट दिया। सोमवार को वह गिफ्ट दिए गए शौचालय का निर्माण स्वयं ढोकसहा गांव पहुंचकर शुरू कराएंगे।
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लोगों की सोच बदलने को चलेगा अभियान
ओडीएफ अभियान के जिम्मेदार डीपीआरओ कमल किशोर लगातार प्रयासरत हैं। उनके द्वारा मार्निंग फालोअप कार्यक्रम के जरिए शौचालय निर्माण व लोगों को खुले में शौच न करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। बावजूद इसके सोच नहीं बदल रही है। अफसरों का मानना है कि उनके गांव से हटते ही ग्रामीण फिर उसी नक्शेकदम पर चल पड़ते हैं। शौच के प्रति ग्रामीणों की सोच बदलने के लिए अब अफसरों द्वारा शिविर लगाए जाएंगे। इसके लिए जिले स्तर पर अफसरों के साथ रणनीति बनाई जा रही है।
शासन ने जिले को 31 दिसंबर तक ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया है। 25 फीसदी ग्राम सभाएं पूर्ण ओडीएफ हो चुकी है। कुछ लोगों की सोच न बदलने के कारण अभियान परवान नहीं पा रहा। इसके लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
कमल किशोर, डीपीआरओ
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सरस हाल में सेक्रेट्रियों के साथ बैठक कर बनाई रणनीति
शौचालय बनवाने के साथ व्यवहार परिवर्तन पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
प्रदेश के चार जिले ओडीएफ होने के बाद कौशांबी डीपीआरओ भी कमर कसते दिख रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन उन्होंने जिले भर के सेक्रेट्रियों के साथ विकास भवन स्थित सरस हाल में बैठक की। बैठक में उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शौचालय बनवाने के साथ-साथ खुले में शौच न करने के लिए लोगों के व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया।
प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 31 जिलों को खुले में शौच से मुक्त करते हुए पूर्ण ओडीएफ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कौशांबी, बिजनौर, हापुड़, गाजियाबाद सहित 31 जिले शामिल हैं। इनमें से गाजियाबाद, हापुड़, बिजनौर सहित चार जिले पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित कर दिए गए। जिले में अभी 50 फीसदी ग्राम सभाएं भी पूर्ण से ओडीएफ नहीं हो सकी है। चार जिलों के ओडीएफ होने और कौशांबी के फिसड्डी रहने को डीपीआरओ कमल किशोर ने गंभीरता से लिया। रविवार को उन्होंने जिले भर की ग्राम सभाओं में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों के साथ सरस हाल में बैठक की। बैठक में उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शौचालयों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराने के साथ-साथ ग्रामीणों के व्यवहार परिवर्तन पर भी जोर दें। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण होने के बाद भी कुछ लोग खुले में शौच कर रहे हैं। ऐसे लोगों को खुले में शौच न करने के लिए के प्रेरित करते हुए उनका व्यवहार परिवर्तित कराएं। अंत में उन्होंने कहा कि जिले को पूर्ण रूप से ओडीएफ बनाए जाने के लिए 31 दिसंबर की तिथि निर्धारित है। नियत तिथि के अंदर जिले को पूर्ण ओडीएफ बनाना ही होगा।
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किसी को नहीं मिलेगा वीर भाई का पुरस्कार
रक्षा बंधन के मौके पर डीपीआरओ कमल किशोर ने ओडीएफ अभियान से जुड़ी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रतियोगिता के माध्यम से उन्होंने घोषणा किया था कि जो भाई राखी बंधवाने के बाद अपनी बहन को शौचालय गिफ्ट करेगा उसे प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार देकर 15 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। पंचायती राज विभाग की इस प्रतियोगिता में एक भी भाई ने हिस्सा नहीं लिया। इस पर डीपीआरओ ने अफसोस जाहिर किया है। प्रतियोगिता में एक भी नाम दर्ज न होता देख उन्होंने एक असहाय महिला से राखी बंधवाकर स्वयं शौचालय गिफ्ट दिया। सोमवार को वह गिफ्ट दिए गए शौचालय का निर्माण स्वयं ढोकसहा गांव पहुंचकर शुरू कराएंगे।
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लोगों की सोच बदलने को चलेगा अभियान
ओडीएफ अभियान के जिम्मेदार डीपीआरओ कमल किशोर लगातार प्रयासरत हैं। उनके द्वारा मार्निंग फालोअप कार्यक्रम के जरिए शौचालय निर्माण व लोगों को खुले में शौच न करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। बावजूद इसके सोच नहीं बदल रही है। अफसरों का मानना है कि उनके गांव से हटते ही ग्रामीण फिर उसी नक्शेकदम पर चल पड़ते हैं। शौच के प्रति ग्रामीणों की सोच बदलने के लिए अब अफसरों द्वारा शिविर लगाए जाएंगे। इसके लिए जिले स्तर पर अफसरों के साथ रणनीति बनाई जा रही है।
शासन ने जिले को 31 दिसंबर तक ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया है। 25 फीसदी ग्राम सभाएं पूर्ण ओडीएफ हो चुकी है। कुछ लोगों की सोच न बदलने के कारण अभियान परवान नहीं पा रहा। इसके लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
कमल किशोर, डीपीआरओ