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जेल में कैद सात सौ जिंदगी पर खतरा
Updated Wed, 15 Nov 2017 01:03 AM IST
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सात सौ बंदियों की जिंदगी पर खतरा
-कारागार में नहीं है फायर फाइटिंग की कोई व्यवस्था
-कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने किया खेल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी की जिला जेल में कदम दर कदम खेल किया गया। कार्यदायी संस्था ने मानकों को दरकिनार कर पूरे भवन में आग से निबटने का कोई इंतजाम नहीं किया है। फायर फाइटिंग व्यवस्था नहीं होने से हर वक्त सैकड़ों जिंदगियों पर खतरा मंडराता रहता है। जेल प्रशासन ने इसके लिए मुख्यालय को पत्र लिखा है।
जिला कारागार कौशाम्बी बनाने का काम कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपा गया था। तीन पुनरीक्षित बजट में 12 से बढ़कर 22 करोड़ रुपए आहरित करने के बावजूद कार्यदायी संस्था ने जेल में आवश्यक कार्य नहीं कराया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फायर फाइटिंग का काम बाकी है। नियमानुसार जेल के सभी हिस्से में वाटर टैंक, जेनरेटर कक्ष, रसोई कक्ष, विद्युत गृह, गोदाम तथा अस्पताल में समेत सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर कम से कम तीन दर्जन अगिभनशमन यंत्र लगाने चाहिए। इतना ही नहीं पूरे भवन में फायर प्वाइंट की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। आग की घटनाओं से निबटने के लिए ऐसी ही कुछ व्यवस्था आवासीय भवनों में भी होनी चाहिए। पर, कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके चलते जिला कारागार में हर वक्त रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों, बंदियों, कैदियों समेत तकरीबन सात सौ लोगों की जिंदगी पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
क्या कहते हैं अफसर
छोटी-छोटी बिल्डिंग तक में फायर फाइटिंग की व्यवस्था की जाती है। इतने बड़े कारागार भवन में आग से निबटने का कोई इंतजाम नहीं किया जाना हैरानी की बात है। इसके लिए अगिभनशमन मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।
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बीएस मुकुंद
प्रभारी जिला जेल
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-कारागार में नहीं है फायर फाइटिंग की कोई व्यवस्था
-कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने किया खेल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी की जिला जेल में कदम दर कदम खेल किया गया। कार्यदायी संस्था ने मानकों को दरकिनार कर पूरे भवन में आग से निबटने का कोई इंतजाम नहीं किया है। फायर फाइटिंग व्यवस्था नहीं होने से हर वक्त सैकड़ों जिंदगियों पर खतरा मंडराता रहता है। जेल प्रशासन ने इसके लिए मुख्यालय को पत्र लिखा है।
जिला कारागार कौशाम्बी बनाने का काम कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपा गया था। तीन पुनरीक्षित बजट में 12 से बढ़कर 22 करोड़ रुपए आहरित करने के बावजूद कार्यदायी संस्था ने जेल में आवश्यक कार्य नहीं कराया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फायर फाइटिंग का काम बाकी है। नियमानुसार जेल के सभी हिस्से में वाटर टैंक, जेनरेटर कक्ष, रसोई कक्ष, विद्युत गृह, गोदाम तथा अस्पताल में समेत सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर कम से कम तीन दर्जन अगिभनशमन यंत्र लगाने चाहिए। इतना ही नहीं पूरे भवन में फायर प्वाइंट की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। आग की घटनाओं से निबटने के लिए ऐसी ही कुछ व्यवस्था आवासीय भवनों में भी होनी चाहिए। पर, कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके चलते जिला कारागार में हर वक्त रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों, बंदियों, कैदियों समेत तकरीबन सात सौ लोगों की जिंदगी पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
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क्या कहते हैं अफसर
छोटी-छोटी बिल्डिंग तक में फायर फाइटिंग की व्यवस्था की जाती है। इतने बड़े कारागार भवन में आग से निबटने का कोई इंतजाम नहीं किया जाना हैरानी की बात है। इसके लिए अगिभनशमन मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।
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बीएस मुकुंद
प्रभारी जिला जेल