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अब घरेलू हिंसा रोकने में अहम भूमिका निभाएंगी आशा कार्यकर्ता

Wed, 29 May 2019 12:29 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2019 12:29 AM IST
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अब घरेलू हिंसा रोकने में अहम भूमिका निभाएंगी आशा कार्यकर्ता
मंझनपुर। गांवों में आशा कार्यकर्ता अब स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही घरेलू हिंसा रोकने में भी मददगार बनेंगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ यह प्रशिक्षण आशा संगिनी भी प्राप्त कर रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आशाएं अपने क्षेत्र के प्रभावित परिवारों की काउंसिलिंग करेंगी।
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घरेलू हिंसा की बढ़ती घटनाओं के रोकथाम के लिए आशा कार्यकर्ताओं को भी लगाया जा रहा है। अब तक ये स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का प्रचार प्रसार और उनके क्रियान्वयन का दायित्व संभाले थीं। अब उन्हें घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति आम लोगों और महिलाओं को जागरूक करने की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। डायरेक्टर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी फरमान के बाद आशा कार्यकर्ताओं को घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं की मदद करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। डीसीपीएम संजय कुमार ने बताया कि घरेलू हिंसा के कानूनी विकल्पों और उनके अधिकारों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में कुल 1660 आशा कार्यकर्ता हैं। इनमें 1203 का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
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उनके साथ आशा संगिनी भी प्रशिक्षण ले रही हैं। बताया कि चायल, मूरतगंज, नेवादा, मंझनपुर, कौशाम्बी तथा सिराथू समेत छह ब्लाकों में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। कड़ा ब्लॉक में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद सरसवां विकास खंड की आशाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। बताया कि हिंसा का मुद्दा कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य से जुड़ा है। किसी भी महिला पर हिंसा होने पर सीधा असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी एवं कड़ा के प्रशिक्षक सुनील सरोज ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा यह प्रशिक्षण पांच दिवसीय है। पहले दो दिन गृह आधारित नवजात शिशु की देखभाल से संबंधित बातों को दोहराया और सिखाया गया। इसमें हाथ धोना, शिशु का तापमान लेना, कंबल में लपेटना, उसकी देखभाल करना, ओआरएस बनाना आदि का प्रशिक्षण दिया गया है।
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