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नीदरलैंड म्यूजियम की शान है कड़ा की ताजिया
Updated Wed, 27 Sep 2017 08:23 PM IST
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नीदरलैंड म्यूजियम की शान है कड़ा का ताजिया
फोटो...
चार साल पहले संग्रहालय के कर्मी कड़ा से ले गए थे ताजिया
विपिन गुप्ता
सिराथू। यूरोप महाद्वीप के प्रमुख देश नीदरलैंड के म्यूजियम किट्रोपर्न में कड़ा में बना ताजिया रख है। ये ताजिया चार साल पहले नीदरलैंड संग्राहलय से आए लोग लेकर गए हैं। वहां ताजिया को बहुत ही सुरक्षित तरीके से रखा गया है। कड़ा में ताजिया बनाने वालों की अपनी अलग पहचान हैं। प्रदेश के कई जिलों से लोग यहां ताजिया लेने आते हैं।
कड़ा के नियाज अली के परिवार में ताजिया बनाने की रेवायत कई पीढ़ियों से चली आ रही है। नियाज अली चौथे पीढ़ी के कारीगर हैं। नियाज को ताजिया बनाने का जादूगर कहा जाता है। बांस की कमाची व रंग-बिरंगे कागजों से वह ऐसी ताजिया बनाते हैं, देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं। नियाज के परिवार की महिलाएं भी ताजियां बनाती हैं। चार साल पहले इलाहाबाद के एक शख्स ने उनकी एक ताजिया की फोटो गूगल व सोशल साइट पर वायरल कर दी थी। इसके बाद नीदरलैंड संग्रहालय के लोगों ने उनसे संपर्क किया। इसके बाद एक लाख रुपया का आर्डर देकर ताजिया बनवाई। छह महीने में उन्होंने ताजिया बनाकर दी। इसके बाद ताजिया को नीदरलैंड ले जाया गया। इसके बाद नियाज अली के नाम का डंका बजने लगा। कई जगहों से उनको आर्डर मिलने लगे। प्रदेश के कई जिलों से उनको ताजिया बनाने का आर्डर मिलता है।
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नायाब हाथों की कारीगरी, फिर खाने को लाले
नियाज अली ताजिया तैयार करने में माहिद हैं। वही नहीं उनके परिवार के लगभग सभी सदस्यों का हुनर काबिले तारीफ है। इसके बावजूद यह परिवार भुखमरी के कगार पर है। इतना आर्डर नहीं मिलता कि रोजी-रोटी चल सके। नियाज अली बताते हैं कि भारतीय कला को नींदरलैंड की शोभा बनाकर उन्होंने अपना हक अदा कर दिया, लेकिन प्रशासन उनकी मदद नहीं कर रहा है। न तो उनके पास रहने को घर है, कच्चे मकान में रहते हैं और न ही रोजगार बढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध। साल भर किसी तरह परिजनों का भरण-पोषण करते हैं।
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इमाम हुसैन की शहादत की याद में बनाते हैं ताजिया
कड़ा को ताजिया बनाने वालों का गांव भी कहा जाता है। यहां चांदी वर्क भी बनता है। यही कारण है कि ताजिया को नियाज अली अलग से रूप देने में कामयाब हो जात हैं। वह बताते हैं कि ताजिया इमाम हुसैन की शहादत की याद में बनाया जाता है। यही ताजिया इमामबाड़े में रखा जाता है, इसके बाद लोग इमाम हुसैन को याद करते हैं। कहा कि उनकी शहादत इंसानियत के लिए थी, इसलिए वह पूरी शिद्दत से ताजिया बनाते हैं।
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चार साल पहले संग्रहालय के कर्मी कड़ा से ले गए थे ताजिया
विपिन गुप्ता
सिराथू। यूरोप महाद्वीप के प्रमुख देश नीदरलैंड के म्यूजियम किट्रोपर्न में कड़ा में बना ताजिया रख है। ये ताजिया चार साल पहले नीदरलैंड संग्राहलय से आए लोग लेकर गए हैं। वहां ताजिया को बहुत ही सुरक्षित तरीके से रखा गया है। कड़ा में ताजिया बनाने वालों की अपनी अलग पहचान हैं। प्रदेश के कई जिलों से लोग यहां ताजिया लेने आते हैं।
कड़ा के नियाज अली के परिवार में ताजिया बनाने की रेवायत कई पीढ़ियों से चली आ रही है। नियाज अली चौथे पीढ़ी के कारीगर हैं। नियाज को ताजिया बनाने का जादूगर कहा जाता है। बांस की कमाची व रंग-बिरंगे कागजों से वह ऐसी ताजिया बनाते हैं, देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं। नियाज के परिवार की महिलाएं भी ताजियां बनाती हैं। चार साल पहले इलाहाबाद के एक शख्स ने उनकी एक ताजिया की फोटो गूगल व सोशल साइट पर वायरल कर दी थी। इसके बाद नीदरलैंड संग्रहालय के लोगों ने उनसे संपर्क किया। इसके बाद एक लाख रुपया का आर्डर देकर ताजिया बनवाई। छह महीने में उन्होंने ताजिया बनाकर दी। इसके बाद ताजिया को नीदरलैंड ले जाया गया। इसके बाद नियाज अली के नाम का डंका बजने लगा। कई जगहों से उनको आर्डर मिलने लगे। प्रदेश के कई जिलों से उनको ताजिया बनाने का आर्डर मिलता है।
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नायाब हाथों की कारीगरी, फिर खाने को लाले
नियाज अली ताजिया तैयार करने में माहिद हैं। वही नहीं उनके परिवार के लगभग सभी सदस्यों का हुनर काबिले तारीफ है। इसके बावजूद यह परिवार भुखमरी के कगार पर है। इतना आर्डर नहीं मिलता कि रोजी-रोटी चल सके। नियाज अली बताते हैं कि भारतीय कला को नींदरलैंड की शोभा बनाकर उन्होंने अपना हक अदा कर दिया, लेकिन प्रशासन उनकी मदद नहीं कर रहा है। न तो उनके पास रहने को घर है, कच्चे मकान में रहते हैं और न ही रोजगार बढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध। साल भर किसी तरह परिजनों का भरण-पोषण करते हैं।
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इमाम हुसैन की शहादत की याद में बनाते हैं ताजिया
कड़ा को ताजिया बनाने वालों का गांव भी कहा जाता है। यहां चांदी वर्क भी बनता है। यही कारण है कि ताजिया को नियाज अली अलग से रूप देने में कामयाब हो जात हैं। वह बताते हैं कि ताजिया इमाम हुसैन की शहादत की याद में बनाया जाता है। यही ताजिया इमामबाड़े में रखा जाता है, इसके बाद लोग इमाम हुसैन को याद करते हैं। कहा कि उनकी शहादत इंसानियत के लिए थी, इसलिए वह पूरी शिद्दत से ताजिया बनाते हैं।