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138 साल पहले मशाल जलाकर होती थी गुवारा तैयबपुर की रामलीला

Thu, 07 Oct 2021 12:33 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:33 AM IST
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138 years ago, the Ramlila of Guwara Taibpur was lit by torching
138 years ago, the Ramlila of Guwara Taibpur was lit by torching - फोटो : KAUSHAMBI
138 साल सदर ब्लॉक के गुवारा तैयबपुर की ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत 1883 में गंगा राम साहू ने स्थानीय लोगों के सहयोग से कराई थी। पहले यहां रामलीला का मंचन तीन दिनों तक मशाल जलाकर होती थी। बाद में गैस की रोशनी और अब बिजली की चकाचौंध में रामलीला का मंचन होता है।
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गुवारा तैयबपुर की राम लीला का इतिहास काफी पुराना है। पहले लोग ज्यादा पढ़े-लिखे होते नहीं थे। उस समय सन 1883 में गांव के गंगाराम साहू ने कुछ लोगों से विचार-विमर्श कर गांव में रामलीला शुरू कराई थी।
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गांव के बीचोबीच रामलीला मंच व बस्ती से बाहर मिट्टी से रावण का पुतला बनाया गया था। शुरू में रामलीला तीन दिनों तक होती थी। लेकिन अब 11 दिनों तक रामलीला का मंचन होता है। 11 दिनों तक लोग भगवान के भौतिक स्वरूप का दर्शन-पूजन करते हैं।
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भूलता नही कई पात्रों का अभिनय
गुवारा तैयबपुर की रामलीला गांव के अलावा आसपास के लोगों का सहयोग व अभिनय आज भी नहीं भूलता है। भैला मकदूमपुर के 97 वर्षीय पंडित राम दत्त मिश्र बताते हैं कि उस समय ज्यादातर पात्र स्थानीय होते थे। वह स्वंय लक्ष्मण का पाठ करते थे।

वह बताते हैं शिवशरण मिश्र परशुराम जी, श्री राम सेवक तिवारी श्रीराम का अभिनय करते थे। मंच पर जब उनकी टीम पहुंचती थी, तब ऐसा लगता था कि साक्षात भगवान आ गए। इसी तरह गुवारा के अमृत लाल केसरवानी हनुमान जी, नत्थूलाल मौर्य अंगद व भुग्गन लाल का रावण का अभिनय लोग आज भी याद करते है।
रामलीला कार्यक्रम
08 अक्तूबर को मुकुट पूजन।
09 अक्तूबर को नारद मोह, श्री रामजन्म
10 अक्तूबर को मुनि आगमन,ताड़का बध।
11 अक्तूबर को धनुष यज्ञ।
12 अक्तूबर को परशुराम-लक्ष्मण संवाद,राम विवाह
13 अक्तूबर को राम वनवास।
14 अक्तूबर को बन में भरतजी को श्री राम को मनाने जाना।
15 अक्तूबर को सीताहरण।
16 अक्तूबर को राम सुग्रीव मित्रता, लंका दहन।
17 अक्तूबर को कुंभकर्ण बध।
18 अक्तूबर को रावण बध।
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