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कहां खप रही करोड़ों की मेडीसिन!

Updated Sun, 14 Jan 2018 12:29 AM IST
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कहां खप रहीं करोड़ों की दवाएं!
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-डॉक्टर और केमिस्ट मालामाल, मरीज हो रहे कंगाल
-जिला अस्पताल में सालाना होती है एक करोड़ से अधिक की दवाओं की स्थानीय खरीदारी
फोटो नंबर- एक से छह तक
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर आने वाली करोड़ों रुपए की दवाएं कहां खप रही हैं! सालाना एक करोड़ रुपए की दवा स्थानीय स्तर पर खरीदी जाती है। इसके बावजूद अस्पताल के मेडिकल स्टोर में अक्सर दवाआें का टोटा बना रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि चाह कर भी वे मरीजों का अच्छा उपचार नहीं कर पा रहे हैं। गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को बाहर से दवा लिखना आदत बन चुकी है। दूसरी तरफ, बाहर से लिखी जाने वाली दवाओं सेेडॉक्टर और केमिस्ट मालामाल और मरीज कंगाल हो रहे हैं।
जिले के 20 लाख बाशिंदों की सेहत के लिए 10 करोड़ की लागत से जिला संयुक्त चिकित्सालय बनाया गया है। अस्पताल में रोजाना 400 से 500 मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों के उपचार के लिए करीब पांच लाख रुपए की दवा प्रतिमाह क्रय की जाती है। इसके अलावा सर्जिकल, इमरजेंसी के साथ वीआईपी लोगों के लिए अलग से बजट है। विभागीय सूत्रों की मानें तो सालाना जिला अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये की दवा खरीदी जाती है। भारी भरकम धनराशि से खरीदी गई दवा आखिर कहां खप रही है! इसके बावजूद मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं। दूसरी तरफ जिम्मेदारों का दावा है कि उनके पास सभी दवाएं उपलब्ध रहती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को बाहर से क्यों लिखी जाती है? दवाओं में यह खेल आम मरीजों की समझ से बाहर है। उधर दबी जुबान चिकित्सकों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक उपलब्धता नहीं होने से मजबूरी में बाहर से दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि बाहर से लिखी जाने वाली दवाओं में तगड़ी सेटिंग के जरिए डॉक्टर ऐसा कर रहे हैं। जिसका खामियाजा गांव की भोली-भाली गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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हमेशा रहता है दवा का अभाव
जिला अस्पताल के मेडिकल स्टोर में आए दिन दवाओं का टोटा बना रहने के पीछे बजट का अभाव बताया जा रहा है। जिम्मेदारों की मानें तो बजट की कमी के चलते सारी दवाओं का क्रय किया जाना संभव नहीं है। इसके बावजूद प्रयास रहता है कि अधिकतर दवाएं अस्पताल में उपलब्ध रहें जबकि हकीकत में यहां सब कुछ उल्टा ही होता है।
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हर पर्चे में दिखती है कैल्शियम, आयरन के साथ पीसी
जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले हर मरीज के पर्चे में कैल्शियम के साथ आयरन, पीसी और पैरासीटामॉल दिखती है। मरीजों को लाल-पीली दवा थमाकर डॉक्टर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। मरीज चाहे बुखार से पीड़ित हो अथवा पेट दर्द से। सभी के पर्चे में यह दवाएं जरूर लिखी मिलेंगी।
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अस्पताल में 284 दवाओं की उपलब्धता का है मानक
जिला संयुक्त चिकित्सालय में 284 दवाओं की उपलब्धता का मानक है। इसमें एंटीबायोटिक के साथ अन्य दवाएं शामिल हैं। दूसरी तरफ कौशाम्बी स्थित जिला अस्पताल के स्टोर में महज 165 दवाएं ही मौजूद हैं। अन्य दवाएं क्यों नहीं क्रय की जाती हैं। इसका जवाब जिम्मेदारों के पास नहीं है।
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इमरजेंसी के लिए दवा का नहीं बनता रजिस्टर
जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवा के लिए प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से कौन-कौन से दवा क्रय की गई और उसे कितने मरीजों में खपाया गया इसका रजिस्टर संबंधित स्टोर में नहीं बनाया जाता है। ऐसे में लाखों का खेल कर लिया जाता है और इसकी भनक तक किसी को नहीं चलती है।
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प्रिंट 6 सौ और कीमत मात्र 80 रुपया
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ अजीबोगरीब खेल किया जाता है। अस्पताल के चिकित्सक रोजाना दो चार मरीजों को पिपरासाइक्लीन नामक इंजेक्शन लिखते हैं। इसमें प्रिंट रेट 6 सौ से अधिक का होता है। जबकि इसकी वास्तविक कीमत मात्र 80 रुपए है। इस तरह से मरीजों का आर्थिक शोषण कर चिकित्सक और केमिस्ट अपनी जेब भर रहे हैं।
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कमीशन के चक्कर में बाहर से लिखी जा रहीं दवाएं
जिला अस्पताल में भर्ती समदा गांव की राशिदा बेगम की मानें तो वह तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उसे पांच सौ 34 रुपए का एक इंजेक्शन रोज दिया जाता है। पर, आज तक उसे आराम नहीं मिला। बताया कि इसके अलावा अन्य दवाएं भी बाहर से लिखकर मंगाई है। जब वह अस्पताल से लाकर दवा देने की बात करती है तो उसे डांट दिया जाता है।
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जिला अस्पताल से की जाती है दवा की चोरी!
संयुक्त चिकित्सालय की इमरजेंसी के नाम आने वाली दवाओं के साथ अन्य दवाओं की चोरी की जाती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। आज से दो साल पहले अस्पताल में तैनात एक फार्मासिस्ट को चोरी की दवा के साथ पकड़ा भी गया था। तत्कालीन सीएमएस ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए डीओ लेटर भी लिखा था। सूत्रों की मानें तो आरोपी फार्मासिस्ट इन दिनों फिर स्थानांतरण कराकर जिला अस्पताल आ गया है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
अस्पताल में पर्याप्त दवाएं मौजूद हैं। बाहर से दवा लिखने और मंगवाने के लिए सभी चिकित्सकों को मना किया गया है। यदि इसके बाद भी मरीजों को बाहर से दवा लिखी जाती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ दीपक सेठ
सीएमएस
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