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ट्रांसफार्मर ले उड़े निजी व राजकीय नलकूपों की बिजली
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:44 AM IST
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ट्रांसफार्मरों ने ठप किया नलकूपाें का संचालन
बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण बंद पड़े हैं सौ से भी अधिक निजी नलकूप
एक तिहाई किसान नहीं कर सके धान की रोपाई तो सूख रही रोपी गई फसलें
48 घंटे तो क्या माहभर में नहीं बदले जा सके फुंके ट्रांसफार्मर, मचा हाहाकार
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
ट्रांसफार्मर फुंकने से जिले में सौ से अधिक राजकीय व निजी नलकूप ठप हैं। नलकूपों के बंद होने से नलकूपों के सहारे खेती करने वाले एक तिहाई किसानों के खेतों में अभी तक धान की रोपाई नहीं कर सके। शुरुआत में जिन किसानों ने फसल की रोपाई कर लिया है उनकी फसलें सिंचाई के आभाव में सूख रही है। वर्कशॉप के जिम्मेदार हैं कि ट्रांसफार्मर मौजूद होने के बाद भी किसानों को नहीं दे रहे हैं। इससे जिले भर के निजी व राजकीय नलकूप के सहारे खेती करने वाले किसानों में हाहाकार मच गया है।
प्रदेश सरकार द्वारा पावर कार्पोरेशन के जिम्मेदारों को फुंका ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे रखा है। उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर के लिए स्टोर का चक्कर न काटना पड़े इसे देखे हुए वर्कशॉप को सीधे ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। शासन का यह फरमान जिले के उपभोक्ताओं के लिए हवाहवाई साबित हो रहा है। एक जुलाई को जैसे ही वर्कशॉप को ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी मिली व्यवस्था चरमराने लगी। दस जुलाई तक फुंके ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी 50 के ऊपर पहुंच गई। इसके बाद पेंडेंसी घटने का नाम नहीं लिया। आंकड़ा दो सौ के पार पहुंचा तो मामले को मुख्य अभियंता अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने गंभीरता से लिया। उन्होंने जिले के वर्कशॉप में दूसरे स्थानों से ट्रांसफार्मरों की खेप पहुंचाया। लेकिन वर्कशॉप ठेकेदार की मनमानी के चलते उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहा है। कभी 1912 का पेंच तो कभी सरकारी वाहन से ट्रांसफार्मर देने की बात कहकर उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दिए जा रहे। हालात ऐसे हो गए हैं कि ट्रांसफार्मर खराबी के चलते 25 राजकीय नलकूप व कम से कम 75 निजी नलकूप महीने भर से ठप हैं। इसके अलावा कम से कम सौ ट्रांसफार्मर घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली मुहैया कराने वाले जले हैं। जिन्हें बारिश की कालीरात में अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर नहीं मिलने से नलकूप व घरेलू उपभोक्ताओं में हाहाकार मचा हुआ है।
पखवारे भर से ट्रांसफार्मर के लिए भकट रहा छेदीलाल
विद्युत उपकेंद्र अरका के बल्लोपुर निवासी छेदीलाल ने खेती करने के लिए निजी नलकूप लगा रखा है। उसका आरोप है कि पखवारे भर पहले उसका ट्रांसफार्मर फुंक गया था। जेई को सूचना देने के बाद उसने ट्रांसफार्मर वर्कशॉप में जमा किया। तब से आज तक वह वर्कशॉप का चक्कर काट रहा है पर ट्रांसफार्मर नहीं मुहैया कराया गया। इसके चलते उसकी धान की रोपाई का काम ठप हो गया और खेत बंजर पड़े हैं।
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मुख्य अभियंता के निर्देशों का नहीं दिख रहा असर
जिले में ट्रांसफार्मर की बढ़ रही पेंडेंसी को खत्म कराने के लिए मुख्य अभियंता इलाहाबाद मंडल अश्वनी कुमार श्रीवास्तव मंगलवार को वर्कशॉप पहुंचे। उन्होंने पेंडंसी को खत्म कराने का निर्देश वर्कशॉप के एसडीओ व जेई को दिया। बताया कि ट्रांसफार्मर की कोई कमी नहीं है परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ बनाएं। बावजूद इसके ठेकेदार ट्रांसफार्मर परिवहन में मनमानी बरत रहा है।
धान रोपाई न कर पाने वाले किसानों का हाल बेहाल
धान रोपाई के ऐन वक्त पर ट्रांसफार्मर फुंकने से सैकड़ों किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। फुंका ट्रांसफार्मर वर्कशॉप में जमा करने के बाद वह जेई व एसडीओ का चक्कर काट रहे हैं पर कोई सुनने वाला नहीं है। सरायअकिल उपकेंद्र के म्योहर गांव निवासी पवन सिंह का कहना है कि वह ट्रांसफार्मर के लिए वर्कशॉप के जेई व एसडीओ से रोज मिल रहे हैं। आज-कल की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। ट्रांसफार्मर कब मिलेगा कोई बताने वाला तक नहीं है।
ट्रांसफार्मर वितरण सरकारी गाड़ी से ही कराया जाय इसके लिए विधायक ने दबाव बनाया है। इसके चलते उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दिए जा रहे। ठेकेदार ने तीन गाड़ी लगा रखी है। जितना संभव है उतने ट्रांसफार्मर रोज भेजे जा रहे हैं।
अखिलेश चौहान, जेई वर्कशॉप
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बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण बंद पड़े हैं सौ से भी अधिक निजी नलकूप
एक तिहाई किसान नहीं कर सके धान की रोपाई तो सूख रही रोपी गई फसलें
48 घंटे तो क्या माहभर में नहीं बदले जा सके फुंके ट्रांसफार्मर, मचा हाहाकार
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
ट्रांसफार्मर फुंकने से जिले में सौ से अधिक राजकीय व निजी नलकूप ठप हैं। नलकूपों के बंद होने से नलकूपों के सहारे खेती करने वाले एक तिहाई किसानों के खेतों में अभी तक धान की रोपाई नहीं कर सके। शुरुआत में जिन किसानों ने फसल की रोपाई कर लिया है उनकी फसलें सिंचाई के आभाव में सूख रही है। वर्कशॉप के जिम्मेदार हैं कि ट्रांसफार्मर मौजूद होने के बाद भी किसानों को नहीं दे रहे हैं। इससे जिले भर के निजी व राजकीय नलकूप के सहारे खेती करने वाले किसानों में हाहाकार मच गया है।
प्रदेश सरकार द्वारा पावर कार्पोरेशन के जिम्मेदारों को फुंका ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे रखा है। उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर के लिए स्टोर का चक्कर न काटना पड़े इसे देखे हुए वर्कशॉप को सीधे ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। शासन का यह फरमान जिले के उपभोक्ताओं के लिए हवाहवाई साबित हो रहा है। एक जुलाई को जैसे ही वर्कशॉप को ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी मिली व्यवस्था चरमराने लगी। दस जुलाई तक फुंके ट्रांसफार्मरों की पेंडेंसी 50 के ऊपर पहुंच गई। इसके बाद पेंडेंसी घटने का नाम नहीं लिया। आंकड़ा दो सौ के पार पहुंचा तो मामले को मुख्य अभियंता अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने गंभीरता से लिया। उन्होंने जिले के वर्कशॉप में दूसरे स्थानों से ट्रांसफार्मरों की खेप पहुंचाया। लेकिन वर्कशॉप ठेकेदार की मनमानी के चलते उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहा है। कभी 1912 का पेंच तो कभी सरकारी वाहन से ट्रांसफार्मर देने की बात कहकर उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दिए जा रहे। हालात ऐसे हो गए हैं कि ट्रांसफार्मर खराबी के चलते 25 राजकीय नलकूप व कम से कम 75 निजी नलकूप महीने भर से ठप हैं। इसके अलावा कम से कम सौ ट्रांसफार्मर घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली मुहैया कराने वाले जले हैं। जिन्हें बारिश की कालीरात में अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर नहीं मिलने से नलकूप व घरेलू उपभोक्ताओं में हाहाकार मचा हुआ है।
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पखवारे भर से ट्रांसफार्मर के लिए भकट रहा छेदीलाल
विद्युत उपकेंद्र अरका के बल्लोपुर निवासी छेदीलाल ने खेती करने के लिए निजी नलकूप लगा रखा है। उसका आरोप है कि पखवारे भर पहले उसका ट्रांसफार्मर फुंक गया था। जेई को सूचना देने के बाद उसने ट्रांसफार्मर वर्कशॉप में जमा किया। तब से आज तक वह वर्कशॉप का चक्कर काट रहा है पर ट्रांसफार्मर नहीं मुहैया कराया गया। इसके चलते उसकी धान की रोपाई का काम ठप हो गया और खेत बंजर पड़े हैं।
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मुख्य अभियंता के निर्देशों का नहीं दिख रहा असर
जिले में ट्रांसफार्मर की बढ़ रही पेंडेंसी को खत्म कराने के लिए मुख्य अभियंता इलाहाबाद मंडल अश्वनी कुमार श्रीवास्तव मंगलवार को वर्कशॉप पहुंचे। उन्होंने पेंडंसी को खत्म कराने का निर्देश वर्कशॉप के एसडीओ व जेई को दिया। बताया कि ट्रांसफार्मर की कोई कमी नहीं है परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ बनाएं। बावजूद इसके ठेकेदार ट्रांसफार्मर परिवहन में मनमानी बरत रहा है।
धान रोपाई न कर पाने वाले किसानों का हाल बेहाल
धान रोपाई के ऐन वक्त पर ट्रांसफार्मर फुंकने से सैकड़ों किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। फुंका ट्रांसफार्मर वर्कशॉप में जमा करने के बाद वह जेई व एसडीओ का चक्कर काट रहे हैं पर कोई सुनने वाला नहीं है। सरायअकिल उपकेंद्र के म्योहर गांव निवासी पवन सिंह का कहना है कि वह ट्रांसफार्मर के लिए वर्कशॉप के जेई व एसडीओ से रोज मिल रहे हैं। आज-कल की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। ट्रांसफार्मर कब मिलेगा कोई बताने वाला तक नहीं है।
ट्रांसफार्मर वितरण सरकारी गाड़ी से ही कराया जाय इसके लिए विधायक ने दबाव बनाया है। इसके चलते उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दिए जा रहे। ठेकेदार ने तीन गाड़ी लगा रखी है। जितना संभव है उतने ट्रांसफार्मर रोज भेजे जा रहे हैं।
अखिलेश चौहान, जेई वर्कशॉप