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दोआबा से मसुरियादीन ने 1967 में मारा था चौका

Thu, 28 Mar 2019 05:39 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2019 05:39 PM IST
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दोआबा से मसुरियादीन ने 1967 में मारा था चौका
दोआबा से मसुरियादीन ने 1967 में मारा था चौका
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लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर बनाया था रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
सिराथू। 1967 के चौथे लोक सभा चुनाव में दोआबा से कांग्रेस के टिकट पर दलित नेता मसुरियादीन ने जीत का चौका लगाया था। मसुरियादीन ने सर्वाधिक लगातार चार बार सांसद रहने का रिकार्ड कायम किया था। जो अब तक नहीं टूट सका है।
1967 के चुनाव में कांग्रेस ने हैट्रिक मारने वाले मसुरियादीन को चायल सुरक्षित सीट से चौथी बार भी टिकट देकर मैदान में उतारा। इस चुनाव में कांग्रेस को टक्कर देने के लिए मैदान में
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छोटेलाल निर्दल, केएल सोनकर बीजेएस, और केके राय निर्दल प्रत्याशी के रूप में सामने आए। विपक्षी प्रत्याशियों ने गांव-गांव घूमकर सियासी माहौल को मोड़ने का प्रयास किया। पर, वे दोआबा में कांग्रेस के अभेद्य किले को भेदने मेें कामयाब नहीं हो सके। चौथे लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस की आंधी ने विरोधियाें को चारो खाने चित्त कर दिया। चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मसुरियादीन 85916 वोट हासिलकर अपना लोहा मनवाने में कामयाब रहे। विपक्षी खेमे के सीसी लाल अथक प्रयास के बावजूद 59982 मत पाकर दूसरे स्थान से आगे नहीं बढ़ सके। इसी क्रम में बीजेएस से मैदान में उतरे केएल सोनकर 46257 वोट पाकर तीसरे पायदान पर रहे। निर्दल प्रत्याशी केके राय भी 8920 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे। चुनाव में तमाम प्रयास के बाद भी मतदान का प्रतिशत 42.42 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाया। चौथे लोकसभा चुनाव में भी मसुरियादीन दोआबा में कांग्रेस का डंका बजवाने में कामयाब रहे। इसके साथ ही उन्होंने दोआबा के इतिहास में एक ही दल से सर्वाधिक लगातार चार बार सांसद चुने जाने का रिकार्ड भी अपने नाम दर्ज करा लिया, जो अब तक बरकरार है। यह भी माना जाता है कि मसुरियादीन के बाद उनके जैसा दलित नेता दोआबा जनता की दिल में जगह बना पाने में कामयाब नहीं हो सका।
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चुनाव दर चुनाव बढ़ती गई थी लोकप्रियता
मंझनपुर। दलित नेता मसुरियादीन दोआबा की सियासत में चुनाव दर चुनाव लोकप्रिय होते चले गए। इसकी बानगी चुनावों में मिले वोटों से लगाई जा सकती है। 1952 के पहले चुनाव में उन्हें पडे़ वोटों का 30.13 फीसदी मत मिला था। दूसरी बार 1957 के चुनाव में आंकड़ा बढ़कर 32.17 फीसदी पहुंच गया। इसके बाद 62 और 67 के चुनाव में तो उन्होंने क्रमश: 42.42 और 42.73 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत का डंका बजाया था।
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