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बेबाकी से बोली आधी दुनिया, समाज में लेंगे बराबरी का हक
अमर उजाला ब्यूरो, मंझनपुर।
Updated Tue, 18 Dec 2018 06:00 PM IST
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मंझनपुर। नारी गरिमा व सम्मान के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल’ के तहत मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने बेबाकी से अपनी राय रखी। शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहीं महिलाओं ने कहा कि वह समाज में अपना बराबरी का हक हर हाल में हासिल करके ही रहेंगी।
संविधान में नारी गरिमा के लिए जो कानून बने हैं और जितना उन्हें अधिकार दिया गया वह किसी कीमत पर छोड़ने वाली नहीं है। आज के दौर में बेटियां वह सब बेहतर तरीके से कर रही हैं जो पुरुष वर्ग ही करता था। बेटियों ने आज उस समाज को आइना दिखाया है जो कभी उन्हें अभिशाप समझता था। महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत होगी, तभी उनके विकास का रास्ता प्रशस्त होगा। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि अमर उजाला की ओर से की गई पहल निश्चित तौर एक नया आयाम देगी।
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क्या कहती हैं महिलाएं
आज उस दौर का अंत हो चुका है। जिसमें बेटियों को बोझ माना जाता था। बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। अमर उजाला की यह मुहिम निश्चित तौर पर महिलाओें को और सशक्त करने में कारगर साबित होगी।
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डॉ. छवि जौहरी, डिप्टी सीएमओ
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महिलाओं में जागरूकता आई है। जिले में पिछले साल हाईस्कूल और इंटर की टॉपर लिस्ट में बेटियों की संख्या ज्यादा थी। जिले की ही दो बेटियों ने प्रदेश और देश स्तर पर कौशाम्बी का परचम लहराया है।
अनीता त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता
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महिलाएं पराजित नहीं हो सकती हैं। शिक्षा से वह सबल होती हैं। पढ़ी-लिखी महिला घर परिवार के अलावा समाज को भी सहीं दिशा व दशा दे सकती है। महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास होना चाहिए।
ज्योति अभिजीत, स्कूल प्रबंधक
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महिला समाज की एक कुशल मैनेजर की तरह काम करती है। घर की जिम्मेदारी के साथ ही वह समाज में मिले अपने दायित्व का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करती हैं। सशक्त महिला स्वावलंबी बनकर समाज व परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है।
मीना केसरवानी, सामाजिक कार्यकर्ता
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संविधान में नारी गरिमा के लिए जो कानून बने हैं और जितना उन्हें अधिकार दिया गया वह किसी कीमत पर छोड़ने वाली नहीं है। आज के दौर में बेटियां वह सब बेहतर तरीके से कर रही हैं जो पुरुष वर्ग ही करता था। बेटियों ने आज उस समाज को आइना दिखाया है जो कभी उन्हें अभिशाप समझता था। महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत होगी, तभी उनके विकास का रास्ता प्रशस्त होगा। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि अमर उजाला की ओर से की गई पहल निश्चित तौर एक नया आयाम देगी।
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क्या कहती हैं महिलाएं
आज उस दौर का अंत हो चुका है। जिसमें बेटियों को बोझ माना जाता था। बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। अमर उजाला की यह मुहिम निश्चित तौर पर महिलाओें को और सशक्त करने में कारगर साबित होगी।
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डॉ. छवि जौहरी, डिप्टी सीएमओ
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महिलाओं में जागरूकता आई है। जिले में पिछले साल हाईस्कूल और इंटर की टॉपर लिस्ट में बेटियों की संख्या ज्यादा थी। जिले की ही दो बेटियों ने प्रदेश और देश स्तर पर कौशाम्बी का परचम लहराया है।
अनीता त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता
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महिलाएं पराजित नहीं हो सकती हैं। शिक्षा से वह सबल होती हैं। पढ़ी-लिखी महिला घर परिवार के अलावा समाज को भी सहीं दिशा व दशा दे सकती है। महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास होना चाहिए।
ज्योति अभिजीत, स्कूल प्रबंधक
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महिला समाज की एक कुशल मैनेजर की तरह काम करती है। घर की जिम्मेदारी के साथ ही वह समाज में मिले अपने दायित्व का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करती हैं। सशक्त महिला स्वावलंबी बनकर समाज व परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है।
मीना केसरवानी, सामाजिक कार्यकर्ता
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