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सिंचाई के अभाव में सूख रहीं धान की फसलें
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:41 AM IST
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मंझनपुर। मौसम की बेरुखी, बिजली विभाग की दगाबाजी और माइनरों से उड़ रही धूल ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत में खड़ी फसलें सिंचाई के अभाव में सूख रही हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे करीब 25 फीसदी धान की पैदावार कम होने की संभावना है। लिहाजा इस वक्त किसी भी सूरत में फसलों की सिंचाई आवश्यक है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती पर इस बार शुरू से संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जून, जुलाई में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण जिले में लक्ष्य 48 हजार के मुकाबले सिर्फ 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के आसपास ही धान की फसल रोपित हो सकी थी। अगस्त के अंत तक फसल के लिए अपेक्षित 750 मिली मीटर बारिश हुई तो किसानों के चेहरे चमक उठे, लेकिन पूरा सितंबर गुजरने के बावजूद फसल के लिए आवश्यक 210 के मुकाबले सिर्फ सात मिली मीटर ही बारिश हुई। पूरे महीने बारिश के बजाय चटख धूप निकलने के कारण खेतों की नमी गायब हो गई। इससे फसल पर विपरीत असर पड़ने लगा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय सिंह के मुताबिक इस वक्त फसल गर्भावस्था (गाले में बालियाें का आना) में है। ऐसे में सिंचाई की सख्त आवश्यकता है, लेकिन किसानों के सामने मुश्किल यह है कि सिंचाई का प्रमुख साधन नहर की अधिकतर माइनरें सूखी हैं। दूसरे नलकूप भी दगा दे रहे हैं। करीब 25 फीसदी नलकूप विद्युत अथवा यांत्रिक खराबी के चलते ठप हैं। निजी नलकूप भी लो-वोल्टेज अथवा ट्रांसफार्मरों की खराबी से पानी नहीं दे रहे हैं।
कौशाम्बी जिले में राम गंगा कमांड की तकरीबन 30 किलोमीटर लंबी नहर और 100 किलोमीटर माइनरें फैली हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण लंबे समय से इनमें पानी नहीं आया है। एक मात्र किशुनपुर पंप कैनाल ही है जहां पानी रहता है। जरौली पंप कैनाल से निकली निचली रामगंगा कमांड में भी महीने भर पहले डीएम मनीष कुमार वर्मा और भाकियू नेता नूरुल इस्लाम व बलवीर सिंह चौहान की कवायद के बाद पानी छोड़ा जा सका था, लेकिन टेल तक पानी नहीं पहुंचा। ऐसे में कहने को तो जिले में नहरों व माइनरों का जाल है। पर पानी के अभाव में किसान परेशान हैं। जिले में तीन महीने से ट्रांसफार्मर की कमी है। लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मर धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए सिर्फ नलकूपों के सौ से अधिक ट्रांसफार्मर डंप हैं। महीनों चक्कर लगाने के बावजूद फुंके ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। जबकि सरकार ने 72 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान है। जनप्रतिनिधि और अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती पर इस बार शुरू से संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जून, जुलाई में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण जिले में लक्ष्य 48 हजार के मुकाबले सिर्फ 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के आसपास ही धान की फसल रोपित हो सकी थी। अगस्त के अंत तक फसल के लिए अपेक्षित 750 मिली मीटर बारिश हुई तो किसानों के चेहरे चमक उठे, लेकिन पूरा सितंबर गुजरने के बावजूद फसल के लिए आवश्यक 210 के मुकाबले सिर्फ सात मिली मीटर ही बारिश हुई। पूरे महीने बारिश के बजाय चटख धूप निकलने के कारण खेतों की नमी गायब हो गई। इससे फसल पर विपरीत असर पड़ने लगा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय सिंह के मुताबिक इस वक्त फसल गर्भावस्था (गाले में बालियाें का आना) में है। ऐसे में सिंचाई की सख्त आवश्यकता है, लेकिन किसानों के सामने मुश्किल यह है कि सिंचाई का प्रमुख साधन नहर की अधिकतर माइनरें सूखी हैं। दूसरे नलकूप भी दगा दे रहे हैं। करीब 25 फीसदी नलकूप विद्युत अथवा यांत्रिक खराबी के चलते ठप हैं। निजी नलकूप भी लो-वोल्टेज अथवा ट्रांसफार्मरों की खराबी से पानी नहीं दे रहे हैं।
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कौशाम्बी जिले में राम गंगा कमांड की तकरीबन 30 किलोमीटर लंबी नहर और 100 किलोमीटर माइनरें फैली हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण लंबे समय से इनमें पानी नहीं आया है। एक मात्र किशुनपुर पंप कैनाल ही है जहां पानी रहता है। जरौली पंप कैनाल से निकली निचली रामगंगा कमांड में भी महीने भर पहले डीएम मनीष कुमार वर्मा और भाकियू नेता नूरुल इस्लाम व बलवीर सिंह चौहान की कवायद के बाद पानी छोड़ा जा सका था, लेकिन टेल तक पानी नहीं पहुंचा। ऐसे में कहने को तो जिले में नहरों व माइनरों का जाल है। पर पानी के अभाव में किसान परेशान हैं। जिले में तीन महीने से ट्रांसफार्मर की कमी है। लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मर धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए सिर्फ नलकूपों के सौ से अधिक ट्रांसफार्मर डंप हैं। महीनों चक्कर लगाने के बावजूद फुंके ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। जबकि सरकार ने 72 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने का फरमान है। जनप्रतिनिधि और अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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