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Kasganj News: पूर्व प्रधान ने धमकाया था...बच्ची कल मिल जाएगी जिंदा या मुर्दा
Tue, 09 Jun 2026 10:48 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Tue, 09 Jun 2026 10:48 PM IST
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कासगंज। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे सुरेश की आंखों में आंसू थे और आवाज में बेबसी...। सामने चार साल की पोती आरोही का शव था, जिसकी तलाश में पूरा परिवार पिछले तीन दिनों से दर-दर भटक रहा था। मंगलवार को जब मासूम का शव गांव के पास खेत में मिला तो परिवार का दर्द आक्रोश में बदल गया। कहा कि पूर्व प्रधान ने धमकाया था कि कल तुम्हारी बच्ची मिल जाएगी जिंदा या मुर्दा। उन्होंने कुछ लोगों पर शक भी जताया।
सुरेश का कहना है कि बीते 20 वर्षों में उनके परिवार के साथ यह तीसरी बड़ी वारदात है। हर बार न्याय मिलने के बजाय उन लोगों गुमराह कर दिया जाता है। गांव में अनुसूचित जाति के बस हमारे दो ही परिवार है। गांव में दूसरी पिछड़ी जाति का बहुल है। ऐसे में अब गांव में रहने से डर लगने लगा है। सुरेश ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले होली के दौरान गांव में विवाद हो गया था। तब उनके परिजन से दूसरे जाति के आरोपियों ने मारपीट की थी। आरोप है कि उनकी झोपड़ी फूंक दी गई थी। मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई, लेकिन पिछले साल गांव के लोगों ने हस्तक्षेप कर समझौता करा दिया।
सुरेश का आरोप है कि करीब 5 वर्ष पहले उनके छोटे भाई राकेश की हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था। आरोप है कि कुल्हाड़ी के प्रहार से उसकी हत्या की गई थी मगर यह मामला भी दाखिल दफ्तर हो गया। चार वर्षीय पोती आरोही को को भी आरोपियों ने नहीं बख्शा। बच्ची के ताऊ ने बताया कि कि गांव में उनके चचेरे भाई सनी प्रधान हैं, लेकिन दबदबा दूसरी जाति के लोगों का रहता है। उन्होंने गांव के दूसरी जाति के पूर्व प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाया। बताया कि उसने सोमवार को आकर कहा था कि कल तुम्हारी बच्ची मिल जाएगी, जिंदा या मुर्दा...। और अब मुर्दा ही मिली है। इस गांव में हम लोग सुरक्षित नहीं हैं। सरकार से गुहार करेंगे, हमें कहीं दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए। फिलहाल, बच्ची की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है। साथ ही उन्हें भविष्य को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है। परिजन ने मामले में न्याय की गुहार लगाई है।
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सुरेश का कहना है कि बीते 20 वर्षों में उनके परिवार के साथ यह तीसरी बड़ी वारदात है। हर बार न्याय मिलने के बजाय उन लोगों गुमराह कर दिया जाता है। गांव में अनुसूचित जाति के बस हमारे दो ही परिवार है। गांव में दूसरी पिछड़ी जाति का बहुल है। ऐसे में अब गांव में रहने से डर लगने लगा है। सुरेश ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले होली के दौरान गांव में विवाद हो गया था। तब उनके परिजन से दूसरे जाति के आरोपियों ने मारपीट की थी। आरोप है कि उनकी झोपड़ी फूंक दी गई थी। मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई, लेकिन पिछले साल गांव के लोगों ने हस्तक्षेप कर समझौता करा दिया।
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सुरेश का आरोप है कि करीब 5 वर्ष पहले उनके छोटे भाई राकेश की हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था। आरोप है कि कुल्हाड़ी के प्रहार से उसकी हत्या की गई थी मगर यह मामला भी दाखिल दफ्तर हो गया। चार वर्षीय पोती आरोही को को भी आरोपियों ने नहीं बख्शा। बच्ची के ताऊ ने बताया कि कि गांव में उनके चचेरे भाई सनी प्रधान हैं, लेकिन दबदबा दूसरी जाति के लोगों का रहता है। उन्होंने गांव के दूसरी जाति के पूर्व प्रधान पर धमकाने का आरोप लगाया। बताया कि उसने सोमवार को आकर कहा था कि कल तुम्हारी बच्ची मिल जाएगी, जिंदा या मुर्दा...। और अब मुर्दा ही मिली है। इस गांव में हम लोग सुरक्षित नहीं हैं। सरकार से गुहार करेंगे, हमें कहीं दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए। फिलहाल, बच्ची की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है। साथ ही उन्हें भविष्य को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है। परिजन ने मामले में न्याय की गुहार लगाई है।
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