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Kasganj News: महंगाई और खाद किल्लत पर किसान सभा का प्रदर्शन
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फोटो10सहावर तहसील परिसर में धरना देते उत्तर प्रदेश किसान सभा के पदाधिकारी । स्रोत:संगठन
कासगंज। महंगाई, खाद की किल्लत, जलभराव और बिजली संकट जैसी गंभीर जनसमस्याओं पर उत्तर प्रदेश किसान सभा ने आक्रामक रुख अपना लिया है। मंगलवार को संगठन के जिला सचिव प्रमोद कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सहावर तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और धरना देने के बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान जिला सचिव प्रमोद कुमार ने आवश्यक वस्तुओं (रसोई गैस, चीनी, प्याज, खाद्य तेल) की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने और राशन कार्ड के जरिए नियंत्रित दरों पर वस्तुएं देने की मांग की। उन्होंने खुले बाजार में चीनी का अधिकतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम तय करने तथा किसानों को पर्याप्त डीएपी-यूरिया उपलब्ध कराने के साथ खाद के साथ जबरन अन्य वस्तुएं बेचने पर रोक लगाने की मांग उठाई।
किसान नेताओं ने गांवों में जल निकासी की व्यवस्था कराने और जलभराव से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से जल्द मुआवजा देने की मांग की। साथ ही अघोषित बिजली कटौती, बिलों की गड़बड़ी और फुंके ट्रांसफार्मरों को समय पर बदलने की आवाज भी उठाई गई।
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इस दौरान मनोज कुमार, सुनील कुमार, सालिगराम, बांकेलाल, राजकुमार, अजय, धीर सिंह और हरीशचंद्र सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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धाल खरीद के लिए केंद्र बनाने की मांग
किसान नेता राजकुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए जिला अस्पताल व सामुदायिक केंद्रों पर डेंगू, संचारी रोगों के इलाज व पर्याप्त स्टाफ की मांग की। इसके अलावा, धान खरीद के लिए अक्तूबर से सरकारी क्रय केंद्र स्थापित करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने, गन्ने का मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल करने तथा आलू किसानों को घाटे से बचाने की मांग प्रमुखता से रखी गई। पशुओं के टीकाकरण और आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी व खेत मजदूरों की समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।
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प्रदर्शन के दौरान जिला सचिव प्रमोद कुमार ने आवश्यक वस्तुओं (रसोई गैस, चीनी, प्याज, खाद्य तेल) की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने और राशन कार्ड के जरिए नियंत्रित दरों पर वस्तुएं देने की मांग की। उन्होंने खुले बाजार में चीनी का अधिकतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम तय करने तथा किसानों को पर्याप्त डीएपी-यूरिया उपलब्ध कराने के साथ खाद के साथ जबरन अन्य वस्तुएं बेचने पर रोक लगाने की मांग उठाई।
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किसान नेताओं ने गांवों में जल निकासी की व्यवस्था कराने और जलभराव से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से जल्द मुआवजा देने की मांग की। साथ ही अघोषित बिजली कटौती, बिलों की गड़बड़ी और फुंके ट्रांसफार्मरों को समय पर बदलने की आवाज भी उठाई गई।
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इस दौरान मनोज कुमार, सुनील कुमार, सालिगराम, बांकेलाल, राजकुमार, अजय, धीर सिंह और हरीशचंद्र सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
धाल खरीद के लिए केंद्र बनाने की मांग
किसान नेता राजकुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए जिला अस्पताल व सामुदायिक केंद्रों पर डेंगू, संचारी रोगों के इलाज व पर्याप्त स्टाफ की मांग की। इसके अलावा, धान खरीद के लिए अक्तूबर से सरकारी क्रय केंद्र स्थापित करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने, गन्ने का मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल करने तथा आलू किसानों को घाटे से बचाने की मांग प्रमुखता से रखी गई। पशुओं के टीकाकरण और आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी व खेत मजदूरों की समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।