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Kasganj News: एसआईआर में कटे वोट बदल सकते हैं सियासी तस्वीर
Sun, 18 Jan 2026 11:11 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:11 PM IST
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फोटो26नीरज शर्मा,जिलाध्यक्ष भाजपा ।संवाद
कासगंज। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विशेष प्रागढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। कासगंज, अमांपुर और पटियाली विधानसभा क्षेत्रों में कटे 78,677 वोट पिछले विधानसभा चुनावों में हार-जीत के अंतर से कहीं अधिक हैं। ऐसे में इन कटे मतों का असर आगामी चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है और सियासी समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।
एसआईआर के तहत कराए गए सर्वे में मृतक मतदाताओं, दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके वोटरों और लापता मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। सबसे अधिक असर कासगंज विधानसभा में देखने को मिला है, जहां 66,583 वोट कटे हैं। यह आंकड़ा न केवल पिछले चुनावों में जीत के अंतर से अधिक है, बल्कि भाजपा के लिए भी चिंता का विषय माना जा रहा है। कासगंज सीट पर भाजपा 2017 और 2022 से काबिज है। वर्ष 2022 में भाजपा ने 46,265 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में जीत का अंतर 52,030 वोट रहा। इसके पहले 2012 में सपा ने 10,177 वोटों से जीत हासिल की थी।
अमांपुर विधानसभा में भी भाजपा लगातार दो चुनावों से जीत दर्ज करती आ रही है। वर्ष 2022 में भाजपा 43,229 वोटों से और 2017 में 41,804 वोटों से विजयी रही थी। 2012 में यहां बसपा ने 3,656 वोटों से जीत हासिल की थी। एसआईआर में अमांपुर में 46,516 वोट कटे हैं, जो पिछले चुनावी अंतर से अधिक हैं और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
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पटियाली विधानसभा में स्थिति और भी दिलचस्प मानी जा रही है। वर्ष 2022 में सपा ने यहां 4,001 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में भाजपा ने 3,771 वोटों से चुनाव जीता था। 2012 में सपा ने यहां 27,728 वोटों से बड़ी जीत हासिल की थी। एसआईआर के दौरान पटियाली में 59,173 वोट कटे हैं, जो इस सीट को आगामी चुनाव में बेहद संवेदनशील बना रहे हैं।
तीनों विधानसभा क्षेत्रों में हार-जीत के अंतर से अधिक वोट कटने के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। भाजपा इसे पारदर्शी प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे अपने लिए सियासी मौके के तौर पर देख रहे हैं।
राजनीतिक दल की बात
भाजपा ने हमेशा निष्पक्ष राजनीति की है। सर्वे पारदर्शिता से हुआ है। चुनाव में फर्जी वोटों का सहारा लेने वाले दल इससे परेशान हैं।-नीरज शर्मा, जिला अध्यक्ष भाजपा
एसआईआर सर्वे में भाजपा अपने जाल में स्वयं ही फंस गई है। पार्टी के कार्यकर्ताओं की सक्रियता से भाजपा अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाई।-विक्रम यादव, सपा जिला अध्यक्ष
एसआईआर सर्वे के दौरान पार्टी के कार्यकर्ता पूरी नजर बनाए रहे। इससे पार्टी का वोट बैंक कट नहीं पाया। आगामी चुनाव में भाजपा को नुकसान होगा।- रामवीर सिंह प्रधान, जिला अध्यक्ष बसपा
एसआईआर सर्वे में भेदभाव किया गया है। ऐसी तमाम शिकायतें सामने आ रही है। पार्टी इन शिकायतों का समाधान कराने में जुटी है।- मनोज पांडेय, जिला अध्यक्ष कांग्रेस
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एसआईआर के तहत कराए गए सर्वे में मृतक मतदाताओं, दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके वोटरों और लापता मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। सबसे अधिक असर कासगंज विधानसभा में देखने को मिला है, जहां 66,583 वोट कटे हैं। यह आंकड़ा न केवल पिछले चुनावों में जीत के अंतर से अधिक है, बल्कि भाजपा के लिए भी चिंता का विषय माना जा रहा है। कासगंज सीट पर भाजपा 2017 और 2022 से काबिज है। वर्ष 2022 में भाजपा ने 46,265 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में जीत का अंतर 52,030 वोट रहा। इसके पहले 2012 में सपा ने 10,177 वोटों से जीत हासिल की थी।
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अमांपुर विधानसभा में भी भाजपा लगातार दो चुनावों से जीत दर्ज करती आ रही है। वर्ष 2022 में भाजपा 43,229 वोटों से और 2017 में 41,804 वोटों से विजयी रही थी। 2012 में यहां बसपा ने 3,656 वोटों से जीत हासिल की थी। एसआईआर में अमांपुर में 46,516 वोट कटे हैं, जो पिछले चुनावी अंतर से अधिक हैं और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
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पटियाली विधानसभा में स्थिति और भी दिलचस्प मानी जा रही है। वर्ष 2022 में सपा ने यहां 4,001 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में भाजपा ने 3,771 वोटों से चुनाव जीता था। 2012 में सपा ने यहां 27,728 वोटों से बड़ी जीत हासिल की थी। एसआईआर के दौरान पटियाली में 59,173 वोट कटे हैं, जो इस सीट को आगामी चुनाव में बेहद संवेदनशील बना रहे हैं।
तीनों विधानसभा क्षेत्रों में हार-जीत के अंतर से अधिक वोट कटने के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। भाजपा इसे पारदर्शी प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे अपने लिए सियासी मौके के तौर पर देख रहे हैं।
राजनीतिक दल की बात
भाजपा ने हमेशा निष्पक्ष राजनीति की है। सर्वे पारदर्शिता से हुआ है। चुनाव में फर्जी वोटों का सहारा लेने वाले दल इससे परेशान हैं।-नीरज शर्मा, जिला अध्यक्ष भाजपा
एसआईआर सर्वे में भाजपा अपने जाल में स्वयं ही फंस गई है। पार्टी के कार्यकर्ताओं की सक्रियता से भाजपा अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाई।-विक्रम यादव, सपा जिला अध्यक्ष
एसआईआर सर्वे के दौरान पार्टी के कार्यकर्ता पूरी नजर बनाए रहे। इससे पार्टी का वोट बैंक कट नहीं पाया। आगामी चुनाव में भाजपा को नुकसान होगा।- रामवीर सिंह प्रधान, जिला अध्यक्ष बसपा
एसआईआर सर्वे में भेदभाव किया गया है। ऐसी तमाम शिकायतें सामने आ रही है। पार्टी इन शिकायतों का समाधान कराने में जुटी है।- मनोज पांडेय, जिला अध्यक्ष कांग्रेस