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Kasganj News: मोहनपुरा में रबी फसलों की बुवाई तेज
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फोटो 31- मोहनपुरा क्षेत्र में खेतों में डाली गई गोबर की खाद। संवाद
मोहनपुरा। रबी की फसलों की बुवाई का दौर शुरू होते ही मोहनपुरा क्षेत्र के किसानों ने खेतों की तैयारी तेज कर दी है। रामपुर, सलेमपुर पीरौंदा, अफजलपुर, खुर्रमपुर, बादामपुर और नारायनपुर सहित अन्य गांवों में किसान मटर व सरसों की बुवाई से पहले खेतों में देसी गोबर की सड़ी खाद डालकर मिट्टी की सेहत सुधारने में जुटे हैं।
एक तरफ जहां सहकारी समितियों पर रासायनिक खाद के लिए किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं दूसरी तरफ गोबर की खाद का यह इस्तेमाल खेती को टिकाऊ बनाने का बेहतर विकल्प बन रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के प्रभारी डॉ. विकास रंजन चौधरी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय गोबर की खाद का संतुलित उपयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने, उसकी संरचना सुधारने और नमी बनाए रखने में बेहद सहायक है।
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पादप संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. रितेश कुमार ने भी कहा कि सही प्रबंधन से जैविक खाद, रासायनिक उर्वरकों का शानदार विकल्प साबित हो सकती है। क्षेत्रीय किसानों का भी इस ओर रुझान बढ़ रहा है।
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क्या बोले किसान
बादामपुर के किसान राजेश कुमार ने बताया कि बेहतर उत्पादन और लागत संतुलित करने के लिए उन्होंने सरसों की बुवाई से पहले खेतों में देशी गोबर की खाद डाली है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
रामपुर के किसान गणेश कुमार ने मटर की बुवाई के लिए खेत तैयार करते समय जैविक खाद का उपयोग किया है। उनका मानना है कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है।
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एक तरफ जहां सहकारी समितियों पर रासायनिक खाद के लिए किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं दूसरी तरफ गोबर की खाद का यह इस्तेमाल खेती को टिकाऊ बनाने का बेहतर विकल्प बन रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के प्रभारी डॉ. विकास रंजन चौधरी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय गोबर की खाद का संतुलित उपयोग मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने, उसकी संरचना सुधारने और नमी बनाए रखने में बेहद सहायक है।
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पादप संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. रितेश कुमार ने भी कहा कि सही प्रबंधन से जैविक खाद, रासायनिक उर्वरकों का शानदार विकल्प साबित हो सकती है। क्षेत्रीय किसानों का भी इस ओर रुझान बढ़ रहा है।
क्या बोले किसान
बादामपुर के किसान राजेश कुमार ने बताया कि बेहतर उत्पादन और लागत संतुलित करने के लिए उन्होंने सरसों की बुवाई से पहले खेतों में देशी गोबर की खाद डाली है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
रामपुर के किसान गणेश कुमार ने मटर की बुवाई के लिए खेत तैयार करते समय जैविक खाद का उपयोग किया है। उनका मानना है कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है।

फोटो 31- मोहनपुरा क्षेत्र में खेतों में डाली गई गोबर की खाद। संवाद

फोटो 31- मोहनपुरा क्षेत्र में खेतों में डाली गई गोबर की खाद। संवाद