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Kasganj News: आम की अच्छी पैदावार के विशेषज्ञ ने बताए तरीके
Sun, 18 Jan 2026 11:09 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:09 PM IST
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फोटो23डॉ. अंकित सिंह भदौरिया, कृषि वैज्ञानिक (उद्यानिकी)कृषि विज्ञान केंद्र, मोहनपुरा। सं
मोहनपुरा। जनपद में प्रमुख रूप से दशहरी, लंगड़ा और चौसा प्रजाति के आम के बाग हैं। कुछ दिनों बाद आम के पेड़ों पर फूल बनने की प्रक्रिया शुरू होगी। कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि आम में फूल बनने की प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील और जटिल होती है। जो पोषण, हार्मोन, आनुवांशिकता जैसे आंतरिक कारकों के साथ जलवायु, मिट्टी और प्रबंधन जैसे बाहरी कारकों पर निर्भर करती है।
मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का होना आवश्यक है। फूल बनने के लिए तापमान 10 से 15 डिग्री सेल्सियस सर्वाधिक उपयुक्त है। पुराने वृक्षों की अवांछित, रोगग्रस्त क्रॉस शाखाओं की कटाई छंटाई कर देनी चाहिए। फूल आने से एक माह पूर्व सिंचाई भी बंद कर देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट और 200 से 500 पीपीएम के प्रयोग से पुष्पन प्रक्रिया को बढ़ाया जा सकता है।
आम के पौधों में अच्छा बौर प्राप्त करने के लिए 5 किलोग्राम प्रति 200 लीटर एनपीके मिश्रण का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह 30 पेड़ों के लिए पर्याप्त रहेगा। आम के पेड़ों में पुष्प और पुष्प गुच्छ मिज कीट का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए 30 प्रतिशत सक्रिय तत्व का डायमेथोएट 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस प्रकार प्रबंधन करने से आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आएगा जिसके फलस्वरूप बेहतर फलन होने से अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा।
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अपनाएं कोहरे और पाले से बचाव के उपाय
वैज्ञानिक डॉ अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि असामान्य तापमान, तुषार, असमय वर्षा और कोहरे की बढ़ी अवधि आम में फलन को सीधा प्रभावित करती है। आम के छोटे पौधों को कोहरे और पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही पौधों को जूट के बोरे से ढक दें। पाले के कुप्रभाव से बचाने के लिए 2 ग्राम प्रति लीटर मैंकोजेब और कार्बेंडाजिम अथवा 0.25 ग्राम प्रति लीटर ट्राईफ़्लॉक्सीस्ट्रॉबिन 25 प्रतिशत और टेबूकोनाजोल 50 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें।
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मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का होना आवश्यक है। फूल बनने के लिए तापमान 10 से 15 डिग्री सेल्सियस सर्वाधिक उपयुक्त है। पुराने वृक्षों की अवांछित, रोगग्रस्त क्रॉस शाखाओं की कटाई छंटाई कर देनी चाहिए। फूल आने से एक माह पूर्व सिंचाई भी बंद कर देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट और 200 से 500 पीपीएम के प्रयोग से पुष्पन प्रक्रिया को बढ़ाया जा सकता है।
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आम के पौधों में अच्छा बौर प्राप्त करने के लिए 5 किलोग्राम प्रति 200 लीटर एनपीके मिश्रण का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यह 30 पेड़ों के लिए पर्याप्त रहेगा। आम के पेड़ों में पुष्प और पुष्प गुच्छ मिज कीट का प्रकोप दिखाई दे तो इसके नियंत्रण के लिए 30 प्रतिशत सक्रिय तत्व का डायमेथोएट 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस प्रकार प्रबंधन करने से आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आएगा जिसके फलस्वरूप बेहतर फलन होने से अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा।
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अपनाएं कोहरे और पाले से बचाव के उपाय
वैज्ञानिक डॉ अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि असामान्य तापमान, तुषार, असमय वर्षा और कोहरे की बढ़ी अवधि आम में फलन को सीधा प्रभावित करती है। आम के छोटे पौधों को कोहरे और पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही पौधों को जूट के बोरे से ढक दें। पाले के कुप्रभाव से बचाने के लिए 2 ग्राम प्रति लीटर मैंकोजेब और कार्बेंडाजिम अथवा 0.25 ग्राम प्रति लीटर ट्राईफ़्लॉक्सीस्ट्रॉबिन 25 प्रतिशत और टेबूकोनाजोल 50 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें।